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महिला अधिकारी का पलटवार: ऑफिस में घुसकर ‘बादाम फेंक’ अपमान, वीडियो बनाकर रिश्वत का आरोप… महिला अफसर ने लगाया उत्पीड़न और डिजिटल ब्लैकमेलिंग का गंभीर आरोप

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
4 Min Read

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ आवास बोर्ड में पदस्थ एक महिला अधिकारी ने अपने ही कार्यालय में घुसकर अपमान, मानसिक उत्पीड़न, आपराधिक धमकी और सोशल मीडिया पर फर्जी वीडियो प्रसारित करने जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से शिकायत की है। मामला सरकारी दफ्तर की कार्यसंस्कृति, महिला सुरक्षा और डिजिटल दुरुपयोग जैसे कई अहम पहलुओं को एक साथ सामने लाता है।


घटना का पूरा घटनाक्रम: ऑफिस में घुसा, फाइल में दखल… फिर अपमानजनक हरकत
शिकायतकर्ता श्रीमती पूनम बंजारे, सहायक स्टेट मैनेजर (संपत्ति प्रबंधन), छत्तीसगढ़ आवास बोर्ड, बिलासपुर के अनुसार, 17 अप्रैल 2026 को दोपहर करीब 1 बजे वह अपने कार्यालय में नियमित कार्य कर रही थीं। इसी दौरान श्री तोरन साहू बिना किसी अनुमति के उनके कक्ष में प्रवेश कर गया।
आरोप है कि आरोपी ने:
उनके शासकीय कार्य में अनावश्यक हस्तक्षेप किया
फाइलों को लेकर दबाव बनाने की कोशिश की
अभद्र और अपमानजनक व्यवहार किया
उनकी टेबल पर बादाम फेंककर तंज कसते हुए कहा—“इन्हें खाओ, याददाश्त बढ़ेगी”
फाइल ढूंढकर देने के लिए दबाव बनाया
इस पूरे घटनाक्रम से महिला अधिकारी को गंभीर मानसिक आघात और अपमान महसूस हुआ।
बिना अनुमति वीडियो बनाया, वायरल करने की धमकी… फिर सोशल मीडिया पर पोस्ट
शिकायत में उल्लेख है कि आरोपी ने:
बिना सहमति वीडियो रिकॉर्डिंग की
वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दी
बाद में इंस्टाग्राम पर उक्त वीडियो पोस्ट कर दिया
वीडियो में आरोपी द्वारा महिला अधिकारी पर रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया, जिसे शिकायतकर्ता ने पूरी तरह झूठा, निराधार और मानहानिकारक बताया है।
कानूनी धाराओं के तहत गंभीर आरोप
शिकायत में कहा गया है कि आरोपी के कृत्य कई कानूनी प्रावधानों के अंतर्गत आते हैं, जिनमें शामिल हैं:
आपराधिक धमकी (Criminal Intimidation)
मानहानि (Defamation)
महिला की गरिमा भंग (Outraging Modesty)
निजता का उल्लंघन (Violation of Privacy) – सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत
यह मामला सरकारी कर्मचारी के खिलाफ डिजिटल माध्यम से छवि धूमिल करने के आरोप को भी उजागर करता है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म बना हथियार: ‘सोशल मीडिया ट्रायल’ का आरोप
शिकायत में यह भी उल्लेख है कि आरोपी ने सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर:
वीडियो को व्यापक स्तर पर प्रसारित किया
एकतरफा आरोप लगाकर महिला अधिकारी की छवि खराब करने की कोशिश की
बिना जांच के ‘डिजिटल ट्रायल’ जैसी स्थिति बनाई
यह पहलू सरकारी तंत्र में सोशल मीडिया के दुरुपयोग और व्यक्तिगत प्रतिष्ठा पर उसके प्रभाव को रेखांकित करता है।
शिकायत में की गई प्रमुख मांगें
महिला अधिकारी ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से:
आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने
कड़ी कानूनी कार्रवाई करने
सोशल मीडिया से मानहानिकारक वीडियो हटवाने
भविष्य में सुरक्षा सुनिश्चित करने
की मांग की है। उन्होंने यह भी बताया कि उनके पास वीडियो और फोटो सहित सभी साक्ष्य मौजूद हैं, जिन्हें जांच में प्रस्तुत किया जाएगा।
सरकारी दफ्तर की सुरक्षा और मर्यादा पर सवाल
घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं:
क्या सरकारी कार्यालयों में बाहरी व्यक्तियों की एंट्री नियंत्रित है?
महिला अधिकारियों की कार्यस्थल सुरक्षा कितनी सुनिश्चित है?
क्या डिजिटल माध्यम से आरोप लगाने पर कोई निगरानी या जवाबदेही तंत्र मौजूद है? (Timeline)
17 अप्रैल 2026, दोपहर 1 बजे: कार्यालय में कथित घटना
घटना के बाद: वीडियो बनाने और वायरल करने की धमकी
हाल ही में: इंस्टाग्राम पर वीडियो प्रसारित
18 अप्रैल 2026: एसएसपी कार्यालय में शिकायत दर्ज
मामले के कई एंगल
महिला उत्पीड़न और कार्यस्थल गरिमा
डिजिटल प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग
सरकारी छवि बनाम व्यक्तिगत आरोप
कानूनी कार्रवाई और साइबर अपराध का दायरा
(यह मामला फिलहाल शिकायत के आधार पर है। पुलिस जांच और आगे की कार्रवाई के बाद तथ्य और स्पष्ट हो सकेंगे।)

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