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सिम्स बना ‘लाइफ सेविंग’ ट्रेनिंग का हब, 78 पीजी छात्रों को BCLS-ACLS की ट्रेनिंग, CPR-AED से लेकर कार्डियक इमरजेंसी तक सीखी बारीकियां

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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3 दिन का इंटेंस प्रोग्राम: 16 से 18 अप्रैल तक चला प्रशिक्षण, प्रैक्टिकल फोकस पर रहा पूरा जोर
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) ने एक बार फिर चिकित्सा शिक्षा और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। 16 से 18 अप्रैल 2026 तक आयोजित तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में Basic Life Support (BCLS) और Advanced Cardiovascular Life Support (ACLS) के जरिए 78 पीजी प्रथम वर्ष (बैच 2025–26) के छात्र-छात्राओं को उन्नत जीवन रक्षक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया।
यह प्रशिक्षण पूरी तरह प्रैक्टिकल ओरिएंटेड रहा, जिसमें विद्यार्थियों को वास्तविक आपातकालीन परिस्थितियों के अनुरूप तैयार किया गया। कार्यक्रम ने सिम्स को केवल उपचार केंद्र ही नहीं, बल्कि कुशल और संवेदनशील चिकित्सक तैयार करने वाले अग्रणी संस्थान के रूप में सामने रखा।
आपातकालीन चिकित्सा पर फोकस: ‘गोल्डन टाइम’ में निर्णय ही जीवन रक्षक
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को CPR (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन), AED (ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर) के उपयोग, कार्डियक अरेस्ट, स्ट्रोक और अन्य जटिल हृदय संबंधी आपात स्थितियों से निपटने की आधुनिक तकनीकों का गहन अभ्यास कराया गया।
विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि “गोल्डन टाइम” में लिया गया सही निर्णय और त्वरित उपचार मरीज की जान बचाने में निर्णायक होता है।
छात्रों को टीमवर्क, कम्युनिकेशन स्किल और क्लिनिकल डिसीजन मेकिंग की बारीकियां भी सिखाई गईं, ताकि गंभीर परिस्थितियों में समन्वय के साथ काम किया जा सके।
मरीज सुरक्षा और क्वालिटी ट्रीटमेंट की दिशा में पहल
इस तरह के उन्नत प्रशिक्षण कार्यक्रम सिम्स में विकसित हो रहे आधुनिक और सुरक्षित उपचार तंत्र की झलक पेश करते हैं।
यहां न केवल मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं, बल्कि चिकित्सा कर्मियों को नियमित रूप से प्रशिक्षित कर उनकी दक्षता को भी बढ़ाया जा रहा है।
यह पहल सीधे तौर पर मरीज सुरक्षा, उपचार की गुणवत्ता सुधारने और मृत्यु दर में कमी लाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
वरिष्ठ नेतृत्व का मार्गदर्शन
कार्यक्रम का आयोजन एनेस्थीसियोलॉजी विभाग के नेतृत्व में किया गया, जिसकी अध्यक्षता विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति ने की।
इस मौके पर अधिष्ठाता डॉ. रमेश मूर्ति ने कहा—
“इस प्रकार के प्रशिक्षण से चिकित्सकों की कार्यक्षमता में वृद्धि होती है और मरीजों को समय पर बेहतर उपचार मिलने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।”
वहीं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा—
“आपातकालीन चिकित्सा में प्रशिक्षित टीम ही जीवन रक्षा की सबसे बड़ी ताकत होती है, और सिम्स इस दिशा में लगातार कार्य कर रहा है।”
इन विशेषज्ञों ने संभाली ट्रेनिंग की कमान
प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफल बनाने में कई विशेषज्ञ चिकित्सकों की सक्रिय भागीदारी रही। इनमें प्रमुख रूप से—
डॉ. मधुमिता मूर्ति, डॉ. श्वेता कुजूर, डॉ. मिल्टन दे बर्मा, डॉ. किसलय देवांगन, डॉ. घनश्याम, डॉ. अभिषेक कलवानी, डॉ. पूनम और डॉ. अंकित शामिल रहे।
इन सभी ने विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण देते हुए आपातकालीन चिकित्सा की बारीकियों से अवगत कराया।
छात्रों में बढ़ा आत्मविश्वास
तीन दिवसीय प्रशिक्षण के बाद प्रतिभागियों में आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने का आत्मविश्वास स्पष्ट रूप से बढ़ा है।
अब वे न केवल सैद्धांतिक रूप से बल्कि व्यावहारिक रूप से भी जीवन रक्षक तकनीकों में दक्ष हो चुके हैं।
सिम्स: इलाज के साथ उन्नत प्रशिक्षण का केंद्र
लगातार आयोजित हो रहे ऐसे प्रशिक्षण और नवाचार सिम्स को प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का मजबूत स्तंभ बना रहे हैं।
यहां एक ओर मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं, वहीं दूसरी ओर भविष्य के डॉक्टरों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण देकर स्वास्थ्य व्यवस्था को नई दिशा दी जा रही है।

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