यातायात सुधार का दावा, लेकिन एसपी ऑफिस के पास ही ‘नो पार्किंग’ में जाम—मल्टीलेवल पार्किंग के बावजूद सड़कों पर कब्जा









बिलासपुर। शहर की यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने ऑटो चालकों के खिलाफ व्यापक अभियान तेज कर दिया है। पिछले 48 घंटे में 200 से अधिक उल्लंघनकर्ता ऑटो चालकों पर कार्रवाई की गई है, जबकि अप्रैल माह में अब तक 516 चालकों पर सख्त कार्रवाई दर्ज की जा चुकी है। इसी के साथ ऑटो चालकों के लिए यूनिफॉर्म अनिवार्य करने का निर्णय लागू करते हुए 7 दिन की समय-सीमा तय कर दी गई है।
यह पूरा अभियान पुलिस उप महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के निर्देशन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (यातायात) रामगोपाल करियारे के पर्यवेक्षण में संचालित किया जा रहा है। शहर में ट्रैफिक को सुचारू, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाए रखने के लिए विभाग द्वारा लगातार मॉनिटरिंग और फील्ड एक्शन किया जा रहा है।
बैठकों में समझाइश, अब सख्ती की बारी
ट्रैफिक पुलिस ने पहले चरण में ऑटो चालक संघों और संगठनों के साथ लगातार बैठकें कर नियमों के पालन को लेकर समझाइश दी। चालकों को बताया गया कि—
यातायात नियमों का कड़ाई से पालन करें
ओवरलोडिंग, गलत पार्किंग और अवैध स्टैंड से बचें
यात्रियों के साथ व्यवहार में अनुशासन रखें
इसके बाद अब दूसरे चरण में सख्त कार्रवाई शुरू की गई है, जिसमें नियम तोड़ने वालों पर सीधे चालान और कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
यूनिफॉर्म अनिवार्य: पहचान और सुरक्षा दोनों
ट्रैफिक पुलिस ने ऑटो चालकों के लिए यूनिफॉर्म को अनिवार्य कर दिया है। इसके पीछे दो बड़े कारण बताए गए—
स्पष्ट पहचान: किसी भी घटना, विवाद या शिकायत की स्थिति में चालक की पहचान तुरंत हो सके।
अपराध नियंत्रण: संदिग्ध गतिविधियों में शामिल लोगों द्वारा ऑटो का उपयोग करने की आशंका को कम करना।
चालकों को 7 दिन के भीतर यूनिफॉर्म अपनाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद बिना यूनिफॉर्म पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।
नशे में ड्राइविंग और दुर्व्यवहार पर ‘जीरो टॉलरेंस’
ट्रैफिक पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि—
शराब या नशे की हालत में वाहन चलाने वाले चालकों पर मोटर व्हीकल एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज होगा
यात्रियों के साथ बदसलूकी या जिम्मेदारी से हटकर व्यवहार करने वालों को सीधे न्यायालय में पेश किया जाएगा
अधिकारियों के मुताबिक, कई मामलों में ऑटो चालकों द्वारा यात्रियों के साथ अनुचित व्यवहार और नशे में ड्राइविंग की शिकायतें सामने आई थीं, जिसके बाद यह सख्ती बढ़ाई गई है।
आईटीएमएस और डिजिटल निगरानी का नेटवर्क
शहर में निगरानी को हाईटेक बनाया गया है—
ITMS (इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम) के जरिए कैमरों से निगरानी
नेक्स्ट जेन एम-परिवहन पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन चालान
आम नागरिकों और कर्मचारियों की सहभागिता से शिकायत और कार्रवाई
इस डिजिटल सिस्टम के कारण बिना मौके पर पकड़े भी नियम उल्लंघन पर कार्रवाई संभव हो रही है।
यात्रियों की सुरक्षा: प्राथमिकता पर महिलाएं, बच्चे और वरिष्ठ नागरिक
ट्रैफिक पुलिस ने ऑटो चालकों को विशेष रूप से निर्देशित किया है कि—
महिलाओं और बच्चों के साथ संवेदनशील व्यवहार रखें
वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों को प्राथमिकता दें
किराया और मार्ग को लेकर पारदर्शिता रखें
ऑटो को शहर में सबसे सुलभ सार्वजनिक परिवहन माना जाता है, ऐसे में यात्रियों का भरोसा बनाए रखना प्राथमिकता में रखा गया है।
मैदान की हकीकत: एसपी कार्यालय के पास ही नियमों की अनदेखी
जहां एक ओर ऑटो चालकों पर सख्ती की जा रही है, वहीं शहर के सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक क्षेत्र—पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सामने—में ही यातायात नियमों की खुली अनदेखी नजर आ रही है।
एसपी ऑफिस के बगल की गली में बेतरतीब तरीके से वाहन खड़े किए जा रहे हैं
टाउन हॉल से सटी सड़क पर कई ‘नो पार्किंग’ बोर्ड लगे होने के बावजूद नियमों का पालन नहीं
सड़क किनारे खड़े वाहनों के कारण जाम की स्थिति
मल्टीलेवल पार्किंग खाली, सड़कें भरी
इस क्षेत्र में करोड़ों रुपए खर्च कर बनाई गई मल्टी लेवल पार्किंग सुविधा मौजूद है, लेकिन इसका उपयोग सीमित नजर आता है।
इसके विपरीत, सड़क किनारे अवैध पार्किंग जारी रहने से—
यातायात बाधित हो रहा है
दुर्घटना का खतरा बढ़ रहा है
प्रशासनिक क्षेत्र में अव्यवस्था बनी हुई है
दोहरी तस्वीर: सख्ती बनाम ढिलाई
शहर में एक ओर ट्रैफिक पुलिस ऑटो चालकों के खिलाफ अभियान चलाकर सख्ती दिखा रही है, वहीं दूसरी ओर प्रमुख स्थानों पर नियमों के उल्लंघन की तस्वीर भी सामने आ रही है।
यह स्थिति शहर की यातायात व्यवस्था में दो अलग-अलग परिदृश्य पेश करती है—
एक तरफ नियम पालन के लिए दबाव और कार्रवाई
दूसरी तरफ सार्वजनिक स्थानों पर अव्यवस्था और अनदेखी
यातायात पुलिस का अभियान जारी है और शहर में नियमों के पालन को लेकर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

