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राइस मिल में मौत का मंजर: बोरियों के ढेर में दबकर मजदूर की मौत, परिजनों का फूटा गुस्सा

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल, प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप; मुआवजा और कार्रवाई की मांग
तखतपुर | बिलासपुर
तखतपुर क्षेत्र के खपरी स्थित श्री शिवाय राइस मिल में शुक्रवार दोपहर एक दर्दनाक हादसे में मजदूर की जान चली गई। घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है, जिन्होंने इसे हादसा नहीं बल्कि प्रबंधन की लापरवाही बताया है।
मिली जानकारी के अनुसार, राकेश केवट (35) पिता रमेश केवट, रोज की तरह राइस मिल में काम कर रहा था। दोपहर करीब 3 बजे धान की बोरियों का ओवरलोड ढेर अचानक उसके ऊपर गिर पड़ा। बोरियों का वजन इतना ज्यादा था कि मजदूर को बाहर निकालने में काफी समय लग गया।
अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने किया मृत घोषित
घटना के बाद गंभीर हालत में उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। इस खबर के फैलते ही परिजनों में कोहराम मच गया।
परिजनों का आरोप—सुरक्षा के नाम पर कुछ नहीं
मृतक के परिजनों ने राइस मिल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि मिल में सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। न तो मजदूरों को सेफ्टी उपकरण दिए जाते हैं और न ही मानक नियमों का पालन किया जाता है। जान जोखिम में डालकर काम कराया जा रहा था, जिसके कारण यह हादसा हुआ।
आक्रोशित लोगों ने की सख्त कार्रवाई की मांग
घटना के बाद मौके पर जुटे परिजनों और स्थानीय लोगों ने राइस मिल संचालक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि जब तक जिम्मेदारों पर सख्त कदम नहीं उठाया जाएगा, तब तक ऐसे हादसे रुकने वाले नहीं हैं।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
मृतक राकेश केवट अपने पीछे पत्नी और तीन छोटे बच्चों को छोड़ गया है। परिवार के सामने अब रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। परिजनों ने प्रशासन से उचित मुआवजा और परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी लेने की मांग की है।
जांच का भरोसा, आंदोलन की चेतावनी
फिलहाल पुलिस ने मामले में जांच शुरू करने की बात कही है। वहीं स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
बड़ा सवाल—कब सुधरेगी सुरक्षा व्यवस्था?
इस घटना ने एक बार फिर औद्योगिक प्रतिष्ठानों में मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यही है कि आखिर कब तक लापरवाही के चलते मजदूरों की जान जाती रहेगी।

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