बिलासपुर (छत्तीसगढ़)।
तेजी से बढ़ती डिजिटल तकनीक के बीच अब अपराधियों ने ठगी के नए तरीके अपनाने शुरू कर दिए हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से बनाई गई नकली आवाज़ के जरिए लोगों को ठगने के मामले सामने आने लगे हैं। इसी खतरे को लेकर बिलासपुर पुलिस (छ.ग.) ने जनजागरूकता के उद्देश्य से एक विशेष एडवाइजरी जारी की है, जिसमें लोगों को सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध कॉल पर तुरंत भरोसा न करने की बात कही गई है।
पोस्टर में साफ तौर पर चेतावनी दी गई है—“सावधान! AI से बनाई गई नकली आवाज़ से ठगी”। इसमें बताया गया है कि अज्ञात परिस्थितियों में अपराधी रिश्तेदार बनकर फोन करते हैं और पैसों की तत्काल मांग करते हैं। कॉल को “अर्जेंट” दिखाकर पीड़ित को मानसिक दबाव में लाने की कोशिश की जाती है।
रिश्तेदार बनकर कॉल, ‘बेटा’ की आवाज़ से फंसाने की साजिश
पोस्टर में एक मोबाइल स्क्रीन का चित्रण किया गया है, जिसमें “SON (बेटा)” नाम से आने वाली कॉल दिखाई गई है और उसे “Urgent” बताया गया है। इसके जरिए यह दर्शाया गया है कि अपराधी AI तकनीक से किसी परिचित या परिजन की आवाज़ की नकल कर भरोसा जीतने की कोशिश करते हैं। साथ ही, एक हुडी पहने संदिग्ध व्यक्ति लैपटॉप पर काम करता दिखाया गया है, जो साइबर अपराध के बढ़ते खतरे को संकेत करता है।
सुरक्षा से जुड़ी प्रमुख बातें पोस्टर में शामिल
बिलासपुर पुलिस द्वारा जारी इस जागरूकता पोस्टर में “Safety Tips Section” के तहत कई महत्वपूर्ण बिंदु दिए गए हैं—
पैसे भेजने से पहले वीडियो कॉल या व्यक्तिगत पुष्टि करें
केवल आवाज़ पर भरोसा न करें
OTP या बैंक से जुड़ी जानकारी साझा न करें
घबराहट में तुरंत कोई निर्णय न लें
परिवार के भीतर “Secret Verification Code” तय करें
पोस्टर में इन बिंदुओं को हाइलाइट कर लोगों को डिजिटल ठगी के नए तरीकों के प्रति जागरूक करने की कोशिश की गई है।
‘Verify Before You Transfer Money’ पर विशेष जोर
पोस्टर के निचले हिस्से में बड़े अक्षरों में लिखा गया है—“VERIFY BEFORE YOU TRANSFER MONEY”। इसके साथ ही एक सुरक्षा प्रतीक (शील्ड और लॉक) दिखाकर साइबर सुरक्षा के महत्व को दर्शाया गया है।
हेल्पलाइन नंबर और संपर्क जानकारी भी जारी
इस एडवाइजरी में साइबर अपराध से जुड़े मामलों के लिए हेल्पलाइन नंबर भी साझा किए गए हैं—
साइबर हेल्पलाइन नंबर: 1930
कंट्रोल रूम नंबर: 112 (CGDIAL112)
इन नंबरों के माध्यम से किसी भी संदिग्ध गतिविधि या ठगी की जानकारी तत्काल पुलिस तक पहुंचाने की बात कही गई है।
पोस्टर के अंत में “बिलासपुर पुलिस (छ.ग.)” का स्पष्ट उल्लेख किया गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि यह अभियान स्थानीय स्तर पर साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए चलाया जा रहा है।

