0- बिना शिकायत पुलिस की बड़ी कार्रवाई, बैंकों को करोड़ों के नुकसान से बचाया
0- ओडिशा का कुख्यात आरोपी श्रीधर राउत दबोचा, कई फर्जी नामों से बना रहा था नेटवर्क
0- फर्जी पासपोर्ट, आधार, डिग्री और बैंक खातों का जखीरा बरामद, हाई-प्रोफाइल पहचान का दुरुपयोग
रायपुर। राजधानी में एक बड़े वित्तीय अपराध की साजिश को रायपुर पुलिस ने अंजाम तक पहुंचने से पहले ही ध्वस्त कर दिया। थाना कबीर नगर पुलिस ने अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय कुख्यात ठग श्रीधर राउत (32) को गिरफ्तार किया है, जो पिछले करीब 7 महीनों से फर्जी पहचान के साथ शहर में रह रहा था और करोड़ों की बैंक ठगी की तैयारी में जुटा था।
AIIMS डॉक्टर बनकर बना रहा था भरोसा, बैंकों से लेना चाहता था भारी लोन
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी खुद को AIIMS का डॉक्टर बताकर बैंक अधिकारियों, व्यापारियों और आम लोगों के बीच विश्वसनीयता बनाने में लगा हुआ था। इस हाई-प्रोफाइल पहचान के जरिए वह बड़े लोन हासिल करने की फिराक में था।
उसकी साजिश के प्रमुख बिंदु —
फर्जी पहचान के आधार पर करोड़ों की जमीन खरीदने के लिए बैंक लोन लेना
लग्जरी वाहन फॉर्च्यूनर के लिए भी ऋण लेना
लोन पास होते ही रकम लेकर फरार हो जाना
आसपास के लोगों को भी झांसा देकर पैसे ऐंठना
एक नहीं, कई पहचान: गिरफ्तारी से बचने के लिए बदले नाम
आरोपी ने खुद को बचाने के लिए कई फर्जी नामों का इस्तेमाल कर रखा था —
आदित्य मिश्रा
आदित्य अग्निहोत्री
डॉ. सिद्धार्थ
इन्हीं पहचान के सहारे वह अलग-अलग जगहों पर संपर्क बनाकर ठगी का जाल फैलाने में जुटा था। इतना ही नहीं, मेडिकल छात्रों को वीजा दिलाने का झांसा देकर उनके पासपोर्ट भी हासिल कर लेता था।
प्रोएक्टिव पुलिसिंग का बड़ा उदाहरण: बिना शिकायत ही खुला राज
इस पूरे मामले की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि —
अब तक कोई पीड़ित सामने नहीं आया था
किसी बैंक ने शिकायत दर्ज नहीं कराई थी
ठगी की वारदात घटित भी नहीं हुई थी
इसके बावजूद पुलिस ने अपने खुफिया इनपुट और सतर्क निगरानी के आधार पर आरोपी की गतिविधियों को ट्रैक किया और समय रहते गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई से करोड़ों रुपये की संभावित ठगी टल गई।
ओडिशा में दर्ज हैं कई संगीन केस, जेल जा चुका है आरोपी
श्रीधर राउत का आपराधिक रिकॉर्ड भी गंभीर है। वह ओडिशा के कटक जिले में कई मामलों में आरोपी रह चुका है और जेल भी जा चुका है।
उसके खिलाफ दर्ज प्रमुख मामले —
2015: चोरी व घर में घुसपैठ (धारा 380, 457 IPC)
2017: मारपीट, छेड़छाड़ सहित अन्य धाराएं
2018: महिला अपराध से जुड़े प्रकरण
2024: धोखाधड़ी, जालसाजी और कूटरचना (धारा 419, 420, 465, 468, 471, 511 IPC)
जेल से छूटने के बाद वह रायपुर आकर छिप गया और यहां भी उसी पैटर्न पर ठगी की नई साजिश रचने लगा।
फर्जी दस्तावेजों का बड़ा नेटवर्क उजागर
गिरफ्तारी के दौरान आरोपी के पास से भारी मात्रा में जाली दस्तावेज बरामद किए गए —
फर्जी आधार और पैन कार्ड
अलग-अलग नामों से बैंक पासबुक और एटीएम कार्ड
तीन लोगों के नाम पर पासपोर्ट
फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्र और डिग्रियां
AIIMS सहित प्रतिष्ठित संस्थानों के नकली आईडी कार्ड
यह बरामदगी इस बात का संकेत है कि आरोपी लंबे समय से सुनियोजित तरीके से ठगी का नेटवर्क संचालित कर रहा था।
रायपुर में बनाकर रखा था ठिकाना, 7 महीने से सक्रिय
पुलिस के अनुसार आरोपी —
मूल निवासी: कटक, ओडिशा
रायपुर में ठिकाना: अविनाश आशीर्वाद कॉलोनी, कबीर नगर क्षेत्र
पहचान: फर्जी AIIMS डॉक्टर
निवास अवधि: लगभग 7 महीने
पुलिस की अपील: हाई-प्रोफाइल पहचान पर आंख बंद कर भरोसा न करें
पुलिस ने नागरिकों और बैंक प्रबंधन को सतर्क करते हुए कहा है —
किसी भी हाई-प्रोफाइल व्यक्ति की पहचान का स्वतंत्र सत्यापन करें
किरायेदार और कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य कराएं
संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत 112 या नजदीकी थाने को दें
अंतरराज्यीय ठगी का नया पैटर्न
यह पूरा मामला बताता है कि अपराधी अब एक राज्य से दूसरे राज्य में जाकर नई पहचान के साथ सक्रिय हो रहे हैं और बड़े वित्तीय अपराधों की तैयारी करते हैं।

