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Bilaspur High court : ‘प्लास्टिक की गुड़िया बनी गवाह’… मूक-बधिर युवती ने इशारों में सुनाई दरिंदगी, उच्च न्यायालय ने सुनाई मरते दम तक उम्रकैद

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर (छत्तीसगढ़)। अदालत में एक ऐसी गवाही दर्ज हुई, जिसने न्याय व्यवस्था को झकझोर दिया। बोल और सुन नहीं सकने वाली युवती ने प्लास्टिक की गुड़िया और इशारों के जरिए अपने साथ हुई दरिंदगी की पूरी कहानी बयां की—और यही गवाही आरोपी के खिलाफ सबसे मजबूत सबूत बन गई। हाईकोर्ट ने इस अनोखी लेकिन भरोसेमंद गवाही को स्वीकार करते हुए आरोपी को मरते दम तक उम्रकैद की सजा सुनाई।
घर में अकेली थी युवती… रिश्तेदार ने बनाया शिकार
मामला बालोद जिले के अर्जुदा थाना क्षेत्र का है।
29 जुलाई 2020 को 20 वर्षीय मूक-बधिर युवती घर में अकेली थी, जबकि उसके माता-पिता खेत में काम करने गए थे।
इसी दौरान रिश्तेदार नीलम कुमार देशमुख घर में घुसा और युवती के साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया।
मां लौटी तो इशारों में टूटा दर्द
शाम को जब युवती की मां घर लौटी, तो बेटी रोती हुई मिली।
पूछने पर युवती ने इशारों के जरिए पूरी घटना बताई और आरोपी की पहचान भी स्पष्ट की।
इसके बाद परिजन तत्काल थाने पहुंचे, जहां पुलिस ने मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू की। आरोपी को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया गया।
कोर्ट में सबसे बड़ी चुनौती: गवाही कैसे दर्ज हो?
चूंकि पीड़िता बोल और सुन नहीं सकती थी, इसलिए अदालत के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसकी गवाही को रिकॉर्ड करना था।
सुनवाई के दौरान साइन लैंग्वेज एक्सपर्ट की मदद ली गई, लेकिन जब कुछ पहलुओं को समझना कठिन हुआ, तब कोर्ट ने एक अनोखा तरीका अपनाया—
प्लास्टिक की गुड़िया को माध्यम बनाया गया।
युवती ने उसी गुड़िया के जरिए इशारों में पूरी घटना को विस्तार से समझाया। अदालत ने इस प्रस्तुति को गंभीरता से लिया और इसे सुसंगत व विश्वसनीय पाया।
मेडिकल और फॉरेंसिक रिपोर्ट ने मजबूत किया केस
जांच के दौरान मेडिकल और फॉरेंसिक रिपोर्ट में भी आरोपी के खिलाफ ठोस सबूत मिले।
पीड़िता के सैंपल में मानव शुक्राणु पाए गए
आरोपी के कपड़ों पर भी समान जैविक साक्ष्य मिले
इन सबूतों पर आरोपी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका।
हाईकोर्ट की टिप्पणी: इशारे भी हैं ‘मौखिक साक्ष्य’
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि—
मूक-बधिर होना किसी गवाह की विश्वसनीयता को कम नहीं करता
इशारों के जरिए दी गई जानकारी भी कानूनी रूप से मौखिक साक्ष्य मानी जाती है
अदालत ने माना कि पीड़िता की गवाही पूरी तरह संगत, स्पष्ट और भरोसेमंद है।
कठोर सजा: मरते दम तक उम्रकैद
अदालत ने आरोपी नीलम कुमार देशमुख को—
धारा 376(2) के तहत मरते दम तक उम्रकैद
धारा 450 के तहत 5 साल की सजा
साथ ही 21 हजार रुपए का जुर्माना
की सजा सुनाई है।
फिलहाल आरोपी जेल में है और उसे पूरी सजा काटनी होगी।

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