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विश्व क्षय दिवस पर सिम्स में व्यापक जागरूकता अभियान, टीबी मरीजों को पोषण सामग्री एवं फल वितरित

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर। विश्व क्षय दिवस (24 मार्च 2026) के अवसर पर छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) बिलासपुर के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग द्वारा टीबी उन्मूलन के उद्देश्य से एक व्यापक जागरूकता एवं सेवा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में टीबी जैसी गंभीर बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा मरीजों को बेहतर उपचार एवं पोषण सहायता उपलब्ध कराना रहा।
कार्यक्रम के अंतर्गत सिम्स चिकित्सालय में पंजीकृत टीबी मरीजों को प्रोटीन पाउडर का वितरण किया गया, वहीं वार्ड में भर्ती मरीजों को फल प्रदान कर उनके पोषण स्तर को सुदृढ़ करने का प्रयास किया गया। इसके साथ ही मरीजों एवं उनके परिजनों के लिए एक विशेष जागरूकता सत्र आयोजित किया गया, जिसमें टीबी रोग के लक्षण, कारण, बचाव एवं उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. प्रतीक कुमार ने अपने संबोधन में बताया कि टीबी एक संक्रामक रोग है, जो मुख्यतः फेफड़ों को प्रभावित करता है, लेकिन समय पर पहचान और नियमित उपचार से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मरीजों को दवा का पूरा कोर्स करना अत्यंत आवश्यक है, अन्यथा रोग पुनः उभर सकता है और जटिल रूप ले सकता है।
सहायक प्राध्यापक डॉ. अनिल कुमार ने टीबी के दुष्प्रभावों एवं इसके सामाजिक-आर्थिक असर पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह बीमारी न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को प्रभावित करती है, बल्कि परिवार और समाज पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ता है। इसलिए समय पर उपचार एवं जागरूकता अत्यंत आवश्यक है।
इस अवसर पर सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि
“टीबी आज भी एक चुनौतीपूर्ण स्वास्थ्य समस्या है, लेकिन यह पूर्णतः उपचार योग्य है। जरूरत है समय पर जांच, सही निदान और नियमित उपचार की। सिम्स में आधुनिक जांच तकनीकों एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम के माध्यम से मरीजों को उच्च स्तरीय उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। हमारा उद्देश्य है कि हर मरीज को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा मिले और समाज को टीबी मुक्त बनाया जा सके।”
वहीं सिम्स के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि
“टीबी के खिलाफ लड़ाई में जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण हथियार है। मरीजों को किसी प्रकार की झिझक या भय नहीं रखना चाहिए। प्रारंभिक अवस्था में जांच और उपचार से इस बीमारी को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। सिम्स प्रशासन मरीजों की बेहतर देखभाल, दवाइयों की उपलब्धता और सतत निगरानी के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।”
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि विगत वर्ष सिम्स में कुल 887 टीबी मरीजों की पहचान कर उनका सफल उपचार किया गया। इसके अलावा 84 एमडीआर (मल्टी ड्रग रेसिस्टेंट) टीबी मरीजों को नोडल डीआरटीबी सेंटर एवं टीबी वार्ड में उन्नत चिकित्सा सुविधा प्रदान कर स्वास्थ्य लाभ दिलाया गया।
विश्व क्षय दिवस के इस अवसर पर टीबीएचवी श्रीमती कविता सिंह, फार्मासिस्ट सुश्री स्वाति श्रीवास्तव, श्री तूफान सिंह सूर्यवंशी सहित विभाग के अन्य चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर टीबी उन्मूलन के लिए जनजागरूकता फैलाने और मरीजों की सेवा करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम का समापन मरीजों एवं उनके परिजनों को जागरूक करते हुए तथा उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए किया गया। इस प्रकार सिम्स द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम न केवल मरीजों के लिए उपयोगी सिद्ध हुआ, बल्कि समाज में टीबी के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल भी साबित हुआ।

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