कोनी और सिरगिट्टी में अवैध रिफिलिंग का नेटवर्क पकड़ा, हॉस्टल छात्रों को बेचता था गैस; शहर में सप्लाई संकट के बीच होटल-ढाबों में घरेलू सिलेंडर का खेल जारी

बिलासपुर। शहर में रसोई गैस की कालाबाजारी का बड़ा नेटवर्क सामने आया है। प्रशासन और खाद्य विभाग की टीम ने गुरुवार को कोनी और सिरगिट्टी इलाके में छापेमारी कर अवैध रिफिलिंग और भंडारण का खुलासा किया। दो अलग-अलग ठिकानों से कुल 126 गैस सिलेंडर, रिफिलिंग मशीन और तौल कांटा जब्त किया गया। हैरानी की बात यह है कि शहर में आम उपभोक्ता सिलेंडर के लिए 25 दिन तक इंतजार करने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी ओर कालाबाजारियों के पास दर्जनों सिलेंडरों का जखीरा मिला।
जांच में यह भी सामने आया है कि अवैध तरीके से घरेलू सिलेंडरों से गैस निकालकर छोटी टंकियों में भरकर ऊंचे दामों पर बेची जा रही थी। खाद्य विभाग अब इस पूरे नेटवर्क में शामिल डिलीवरी बॉय, एजेंसियों और अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रहा है।




कोनी में किराए के मकान से 55 सिलेंडर जब्त, डेढ़ साल से चल रहा था खेल
कोनी क्षेत्र में गुडाखू फैक्ट्री के सामने वाली गली में संचालित अवैध रिफिलिंग सेंटर पर खाद्य विभाग की टीम ने कार्रवाई की। सहायक जिला खाद्य अधिकारी राजीव लोचन तिवारी के नेतृत्व में टीम ने किराए के मकान में छापा मारा, जहां सिलेंडरों का अंबार मिला।
मौके से 55 नग खाली और भरे हुए सिलेंडर बरामद किए गए। जांच में सामने आया कि आरोपी श्रवण साहू पिछले डेढ़ साल से यहां गैस की कालाबाजारी कर रहा था। वह 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडरों से गैस निकालकर 5 किलो की छोटी टंकियों में भरता और उन्हें हॉस्टल में रहने वाले छात्रों को ऊंचे दामों पर बेचता था।
खाद्य विभाग का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में सिलेंडर एक व्यक्ति तक कैसे पहुंचे, इसकी भी जांच की जा रही है।
सिरगिट्टी में दुकान से 61 सिलेंडर बरामद, रिफिलिंग उपकरण भी मिले
सिरगिट्टी के बन्नाक चौक के पास प्राथमिक स्कूल की बाउंड्री वाल से लगी दो शटर वाली दुकान में भी अवैध भंडारण की सूचना पर कार्रवाई की गई। यह दुकान सुशील किराना के बगल में स्थित बताई गई है।
दुकान बंद और लावारिस मिलने पर पुलिस की मौजूदगी में गवाहों के सामने ताला तोड़कर जांच की गई। अंदर से 61 घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर मिले, जिनमें 5 घरेलू सिलेंडर भरे हुए पाए गए।
इसके अलावा 2 रिफिलिंग यंत्र और 1 तौल मशीन भी बरामद हुई। दुकान को बाद में नए ताले से सील कर दिया गया। यहां से 8 घरेलू खाली और 2 कमर्शियल खाली सिलेंडर अलग से दर्ज किए गए। बताया जा रहा है कि यह ठिकाना प्रीति किचन केयर, बन्नाक चौक सिरगिट्टी के नाम से संचालित था।
बॉक्स: घनी बस्ती में ‘बम’ के ढेर पर रह रहे थे लोग
कोनी और सिरगिट्टी दोनों ही जगहों पर सिलेंडरों का भंडारण घनी आबादी के बीच किया गया था। एक छोटे कमरे में दर्जनों सिलेंडरों का जमा होना किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता था। रिफिलिंग के दौरान मामूली चिंगारी भी पूरे इलाके को तबाही में बदल सकती थी।
प्रशासन अब मकान मालिकों की भूमिका की भी जांच कर रहा है और नोटिस जारी करने की तैयारी में है।
उपभोक्ता परेशान, नंबर के लिए 25 दिन तक इंतजार
शहर में आम उपभोक्ता रसोई गैस के लिए परेशान हैं। पहले गैस बुकिंग के बाद 24 घंटे के भीतर नंबर लग जाता था, हालांकि नियम के अनुसार 21 दिनों के भीतर सप्लाई दी जानी थी।
अब हालात यह हैं कि कई उपभोक्ताओं को 25 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। बड़ी संख्या में लोगों का नंबर नहीं लग पा रहा, जिससे वे हलकान हैं।
उधर, छापों में एक साथ दर्जनों सिलेंडर मिलने से सवाल उठ रहे हैं कि जब आम उपभोक्ता को समय पर गैस नहीं मिल रही, तो कालाबाजारियों तक इतनी बड़ी संख्या में सिलेंडर कैसे पहुंच रहे हैं।
होटल-ढाबों में अभी भी घरेलू सिलेंडरों का इस्तेमाल
शहर में गैस की कालाबाजारी पर पूरी तरह लगाम नहीं लग सकी है। कई होटल और ढाबों में अभी भी घरेलू रसोई गैस सिलेंडरों का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है। नियम के अनुसार व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में कमर्शियल सिलेंडर का इस्तेमाल होना चाहिए, लेकिन सस्ती गैस के लालच में घरेलू सिलेंडरों का उपयोग जारी है।
प्रशासन की ताजा कार्रवाई ने इस अवैध नेटवर्क की परतें जरूर खोल दी हैं, लेकिन शहर में गैस की कालाबाजारी और अवैध रिफिलिंग का खेल पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

