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बस्तर में नक्सलियों की सबसे बड़ी घर वापसी: 108 माओवादियों ने डाली बंदूक

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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₹3.29 करोड़ के इनामी कैडर मुख्यधारा में लौटे; 44 महिला नक्सली भी शामिल, 1 किलो सोना और करोड़ों की नकदी सुरक्षा बलों को सौंपी
रायपुर/जगदलपुर , बिलासपुर| 11 मार्च
छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही मुहिम को बुधवार को बड़ी सफलता मिली, जब 108 सशस्त्र माओवादियों ने एक साथ आत्मसमर्पण कर दिया। इन सभी पर मिलाकर करीब ₹3.29 करोड़ का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण करने वालों में 44 महिला माओवादी कैडर भी शामिल हैं।
इस सामूहिक सरेंडर के दौरान माओवादियों ने सुरक्षा एजेंसियों को करीब 1 किलो सोना और करोड़ों रुपये नकद भी सौंपे, जिसे माओवादी संगठन की फंडिंग और गतिविधियों से जुड़ा माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार यह बरामदगी माओवादी संगठन के आर्थिक नेटवर्क पर बड़ा झटका है।


लगातार बढ़ते सुरक्षा दबाव, विकास कार्यों के विस्तार और सरकार की पुनर्वास नीति के कारण बड़ी संख्या में माओवादी अब हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं। बस्तर में एक साथ इतनी बड़ी संख्या में माओवादियों के आत्मसमर्पण को नक्सलवाद के कमजोर पड़ते नेटवर्क का संकेत माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री बोले— अब बस्तर में बंदूक नहीं, विश्वास जीत रहा
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस घटनाक्रम को बस्तर में शांति और विकास की दिशा में ऐतिहासिक सफलता बताते हुए कहा कि अब बस्तर में बंदूक नहीं, बल्कि विश्वास की जीत हो रही है।
उन्होंने कहा कि 108 माओवादियों का हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि बस्तर में शांति, सुशासन और विकास का वातावरण लगातार मजबूत हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आत्मसमर्पण करने वालों में बड़ी संख्या में महिला कैडर शामिल होना यह दर्शाता है कि बस्तर के अंदरूनी क्षेत्रों में भी लोग हिंसा से दूर होकर विकास और स्थिरता की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं।
बस्तर के छह जिलों से जुड़े थे कैडर
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी बस्तर संभाग के कई जिलों में सक्रिय रहे हैं। इनमें प्रमुख रूप से —
बीजापुर
दंतेवाड़ा
सुकमा
बस्तर
कांकेर
नारायणपुर
जैसे जिले शामिल हैं।
इनमें से कई माओवादी डिविजनल कमेटी और एरिया कमेटी स्तर पर संगठन में सक्रिय थे और लंबे समय से नक्सली गतिविधियों में शामिल रहे हैं। उनके सरेंडर से संगठन की स्थानीय संरचना को बड़ा झटका लगा है।
हथियार और संसाधनों के नेटवर्क पर असर
सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि आत्मसमर्पण के दौरान मिली नकदी और सोना माओवादी संगठन के उस आर्थिक तंत्र का हिस्सा था, जिससे संगठन अपनी गतिविधियां संचालित करता था।
इस रकम का इस्तेमाल आमतौर पर —
हथियार खरीदने
कैडरों के संचालन
संगठनात्मक गतिविधियों
स्थानीय नेटवर्क बनाए रखने
के लिए किया जाता था।
इतनी बड़ी मात्रा में नकदी और सोने की बरामदगी को माओवादी संगठन की आर्थिक क्षमता पर बड़ा प्रहार माना जा रहा है।
पुनर्वास नीति से बढ़ा भरोसा
राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए कई योजनाएं लागू की गई हैं।
इनमें —
आर्थिक सहायता
कौशल प्रशिक्षण
रोजगार के अवसर
आवास और सामाजिक पुनर्वास
जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा अभियान के साथ-साथ सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार सुविधाओं के विस्तार से बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों में प्रशासन की पहुंच बढ़ी है, जिससे माओवादी संगठन की पकड़ कमजोर हुई है।
केंद्र-राज्य की संयुक्त रणनीति
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में देश में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार केंद्र के साथ समन्वय करते हुए नक्सलवाद के पूर्ण खात्मे की दिशा में लगातार काम कर रही है।
राज्य सरकार का लक्ष्य बस्तर सहित पूरे छत्तीसगढ़ को भयमुक्त, शांतिपूर्ण और विकसित राज्य बनाना है। इसके लिए सरकार सुरक्षा, विकास और विश्वास— इन तीनों मोर्चों पर एक साथ काम कर रही है।
फैक्ट फाइल
कुल आत्मसमर्पण : 108 माओवादी
कुल इनामी राशि : ₹3.29 करोड़
महिला माओवादी : 44
बरामद सोना : करीब 1 किलो
बरामद नकदी : करोड़ों रुपये
प्रभावित क्षेत्र : बस्तर संभाग के 6 जिले

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