बिलासपुर। अशोकनगर से बिरकोना मार्ग पर प्रस्तावित गौरव पथ योजना अभी कागजों में है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि नाली निर्माण की शुरुआत ने ही लोगों की जिंदगी मुश्किल कर दी है। पिछले एक सप्ताह से सड़क के दोनों ओर नाली निर्माण का काम चल रहा है, मगर रफ्तार इतनी सुस्त है कि आमजन को रोजाना कीचड़, धूल और गड्ढों का सामना करना पड़ रहा है।
अशोक नगर चौक बना कीचड़ चौक
नाली खुदाई के बाद मलबा और गीली मिट्टी सड़क पर ही छोड़ दी गई है। अशोक नगर चौक पर हालात ऐसे हैं कि दोपहिया वाहन फिसल रहे हैं और पैदल चलना जोखिम भरा हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुबह-शाम स्कूल, दफ्तर और बाजार जाने वालों के लिए यह रास्ता परेशानी का सबब बन चुका है।


धूल का गुबार, सांस लेना तक मुश्किल
जहां पानी जमा नहीं है, वहां धूल उड़ रही है। खुदाई के बाद न तो नियमित पानी का छिड़काव हो रहा है और न ही सड़क समतलीकरण। हल्की हवा में धूल का गुबार उठता है, जिससे दुकानदारों और राहगीरों को भारी दिक्कत हो रही है।
सड़क पर गड्ढे, रोज दुर्घटना का खतरा
निर्माण कार्य के दौरान कई जगह बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। हैरानी की बात यह है कि न तो पर्याप्त बैरिकेडिंग की गई है और न ही चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक आए दिन कोई न कोई वाहन चालक असंतुलित होकर गिर रहा है।
रविवार को फूटी अमृत मिशन की पाइप लाइन
रविवार को निर्माण एजेंसी की लापरवाही खुलकर सामने आ गई। खुदाई के दौरान अमृत मिशन की पानी सप्लाई पाइप लाइन क्षतिग्रस्त हो गई। पानी फव्वारे की तरह सड़क पर बहने लगा। मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने रबर बांधकर लीकेज रोकने की कोशिश की, लेकिन तब तक सड़क पर कीचड़ और बढ़ चुका था।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, काफी देर तक पानी व्यर्थ बहता रहा। सवाल उठता है कि क्या बिना समन्वय और तकनीकी जांच के खुदाई की जा रही है?
हजारों लोग रोज झेल रहे परेशानी
यह मार्ग अशोकनगर से बिरकोना की ओर जाने वाला प्रमुख रास्ता है, जहां से प्रतिदिन हजारों लोग गुजरते हैं। प्रस्तावित गौरव पथ के नाम पर शुरू हुआ नाली निर्माण फिलहाल जनता के लिए मुसीबत बन गया है।
स्थानीय लोगों की मांग
तत्काल सड़क समतलीकरण और नियमित पानी छिड़काव
गड्ढों की भराई और सख्त बैरिकेडिंग
पाइप लाइन क्षति की उच्चस्तरीय जांच
कार्य की समय-सीमा सार्वजनिक की जाए
प्रस्तावित गौरव पथ से पहले ही निर्माण की लापरवाही ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि जिम्मेदार विभाग ने समय रहते व्यवस्था नहीं सुधारी, तो यह परियोजना शुरू होने से पहले ही अव्यवस्था की भेंट चढ़ सकती है।

