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नाजिया इलाही खान के खिलाफ बिलासपुर हाईकोर्ट में आपराधिक याचिका स्वीकार, नोटिस जारी

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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पैगंबर हजरत मुहम्मद साहब और हजरत आयशा को लेकर कथित टिप्पणियों का मामला; राज्य सरकार से भी मांगा जवाब
बिलासपुर। नाजिया इलाही खान के खिलाफ छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में दायर आपराधिक याचिका स्वीकार कर ली गई है। हाईकोर्ट ने 26 अक्टूबर को मामले में नाजिया इलाही खान को नोटिस जारी किया है। साथ ही राज्य सरकार से भी जवाब तलब किया है। याचिका TNRAT के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं अधिवक्ता डॉ. आमिर खान तथा वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. सितारा खान के माध्यम से दायर की गई है। याचिकाकर्ता पक्ष ने इसे न्यायिक प्रक्रिया की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
पॉडकास्ट में कथित टिप्पणियों को लेकर विवाद
याचिकाकर्ता पक्ष के अनुसार, नाजिया इलाही खान अपने विभिन्न भाषणों में मुस्लिम समुदाय के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणियां करती रही हैं। हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान पैगंबर हजरत मुहम्मद साहब और उनकी पत्नी हजरत आयशा रजियल्लाहु अन्हा के संबंध में की गई कथित टिप्पणियों को लेकर मुस्लिम समुदाय के विभिन्न वर्गों में नाराजगी सामने आई है।
इस मामले को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। इसी क्रम में अधिवक्ता डॉ. आमिर खान के माध्यम से संबंधित एफआईआर और अन्य उपलब्ध तथ्यों के आधार पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में आपराधिक याचिका दायर की गई। याचिका में संबंधित प्रकरण में कानूनी कार्रवाई और न्यायालय के हस्तक्षेप की मांग की गई है।

अधिवक्ता डॉ. आमिर खान ने क्या कहा सुनिए…

कानूनी प्रक्रिया के तहत न्यायालय पहुंचे याचिकाकर्ता
याचिकाकर्ता पक्ष का कहना है कि मामले को संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत न्यायालय के समक्ष रखा गया है। याचिका स्वीकार किए जाने, संबंधित पक्ष को नोटिस जारी होने और राज्य सरकार से जवाब मांगे जाने को उन्होंने महत्वपूर्ण प्रक्रियात्मक कदम बताया है।
TNRAT के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं अधिवक्ता डॉ. आमिर खान और वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. सितारा खान ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि हाईकोर्ट मामले के तथ्यों, उपलब्ध साक्ष्यों और लागू कानूनों के आधार पर निष्पक्ष एवं न्यायसंगत निर्णय करेगा।
धार्मिक आस्था और सामाजिक सद्भाव पर जोर
याचिकाकर्ता पक्ष ने कहा कि धार्मिक आस्थाओं से जुड़े संवेदनशील मामलों में कानून का पालन, सामाजिक सद्भाव और संवैधानिक मर्यादाओं का सम्मान बेहद जरूरी है। किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई कानून और न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप ही होनी चाहिए।
याचिकाकर्ता पक्ष को उम्मीद है कि आगामी न्यायिक कार्यवाही में मामले के सभी पहलुओं पर विचार किया जाएगा और न्यायालय न्याय के अनुरूप निर्णय करेगा।
प्रस्तुति संबंधी जानकारी: इस मामले में नोटिस जारी होना न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है। इसे आरोपों की पुष्टि या अंतिम न्यायिक निर्णय नहीं माना जा सकता। मामले में आगे की कार्रवाई और न्यायालय का निर्णय महत्वपूर्ण होगा।

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