
बिलासपुर में आठ जिलों के प्रतिनिधियों ने रखे सुझाव; विवाह, तलाक, भरण-पोषण और उत्तराधिकार पर हुई चर्चा, धार्मिक आस्था में हस्तक्षेप नहीं होने का समिति ने दिया भरोसा
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (UCC) का प्रारूप तैयार करने की कवायद के बीच बिलासपुर में हुई संभाग स्तरीय परामर्श बैठक में पारिवारिक कानूनों, महिलाओं और बच्चों के अधिकारों तथा विभिन्न समुदायों की धार्मिक परंपराओं को लेकर अलग-अलग पक्ष सामने आए। आठ जिलों के प्रतिनिधियों ने विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषयों पर अपने विचार रखे। वहीं, तालापारा स्थित ताज मस्जिद की मस्जिद-मदरसा कमेटी ने मुस्लिम पर्सनल लॉ और धार्मिक स्वतंत्रता की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए प्रस्तावित संहिता पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं।
एक ओर समिति के सदस्य शत्रुघ्न सिंह ने समान नागरिक संहिता को महिलाओं और बच्चों के अधिकार मजबूत करने तथा पारिवारिक मामलों में समानता बढ़ाने से जुड़ी पहल बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि संहिता के तहत किसी धर्म की पूजा-पद्धति, धार्मिक आस्था और रीति-रिवाजों में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। दूसरी ओर, ताज मस्जिद कमेटी ने अपने ज्ञापन में आशंका जताई है कि यदि मुस्लिम समुदाय के विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और पारिवारिक व्यवस्था से जुड़े व्यक्तिगत कानूनों को पूरी तरह समाप्त या निष्प्रभावी किया गया, तो इसका समाज पर विशेष और गंभीर प्रभाव पड़ेगा।
आठ जिलों के प्रतिनिधियों ने रखे पक्ष-विपक्ष में सुझाव
देवकी नंदन दीक्षित सभागृह, लाल बहादुर शास्त्री स्कूल परिसर में 28 अक्टूबर को आयोजित संभाग स्तरीय समूह चर्चा एवं परामर्श बैठक में बिलासपुर, मुंगेली, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, जांजगीर-चांपा, कोरबा, रायगढ़, सक्ती और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों के प्रतिनिधि शामिल हुए। सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक संगठनों के पदाधिकारियों, शिक्षाविदों, गणमान्य नागरिकों तथा विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों ने संहिता के पक्ष और विपक्ष में अपने विचार रखे। चर्चा में पारंपरिक सामाजिक मान्यताओं, समुदायों की प्रथाओं और आधुनिक कानूनी सुधारों से जुड़े पहलुओं पर बात हुई।
बैठक में राज्य शासन की ओर से गठित समान नागरिक संहिता उच्च स्तरीय समिति के सदस्य एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह और एमके राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार, सेवानिवृत्त प्राचार्य ज्योति रानी सिंह, रायपुर संभागायुक्त एवं समिति के सचिव श्याम धावड़े तथा बिलासपुर संभागायुक्त सुनील जैन मौजूद रहे।
समिति ने कहा- महिलाओं और बच्चों के अधिकार होंगे मजबूत
समिति के सदस्य शत्रुघ्न सिंह ने समान नागरिक संहिता की पृष्ठभूमि और आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान में पारिवारिक विषयों से संबंधित दो दर्जन से अधिक कानून एवं प्रावधान प्रचलित हैं, जिनमें कई तरह की भिन्नताएं हैं। संहिता पर विचार का उद्देश्य इन विषयों में समानता को बढ़ावा देना और महिलाओं तथा बच्चों के अधिकारों को अधिक सुदृढ़ बनाना है।
उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 44 का उल्लेख करते हुए कहा कि उच्चतम न्यायालय ने भी विभिन्न निर्णयों में समान नागरिक संहिता की आवश्यकता रेखांकित की है। उनके मुताबिक, प्रस्तावित संहिता का संबंध विवाह, विवाह-विच्छेद, भरण-पोषण और उत्तराधिकार जैसे नागरिक एवं पारिवारिक मामलों से होगा। उन्होंने यह भी कहा कि किसी धर्म की पूजा-पद्धति, धार्मिक आस्था और रीति-रिवाजों में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा।
सिंह ने बताया कि विभिन्न वर्गों से प्राप्त सुझावों और मौजूदा कानूनी व्यवस्थाओं के अध्ययन के आधार पर प्रारूप तैयार किया जाएगा। समिति के अन्य सदस्यों ने भी बैठक में अपने विचार रखे और सभी सुझावों के अध्ययन के बाद प्रारूप तैयार करने की बात कही।
मस्जिद कमेटी ने उठाया मुस्लिम पर्सनल लॉ का मुद्दा
इसी प्रक्रिया के बीच बिलासपुर के तालापारा स्थित ताज मस्जिद की मस्जिद एवं मदरसा कमेटी ने प्रस्तावित समान नागरिक संहिता के संबंध में अपना पक्ष रखते हुए संवैधानिक, धार्मिक और विधिक आपत्तियां दर्ज कराई हैं। समिति अथवा प्राधिकरण के अध्यक्ष और सदस्यों को संबोधित निवेदन में कमेटी ने मुस्लिम पर्सनल लॉ तथा धार्मिक स्वतंत्रता की सुरक्षा का मुद्दा उठाया है।
कमेटी के सदर वहीदउल्ला खान और सचिव हाजी शेख अजीमुद्दीन के नाम से प्रस्तुत ज्ञापन में कहा गया है कि मुस्लिम समाज महिलाओं के सम्मान, बच्चों के अधिकार, न्याय, समानता और संविधानसम्मत सामाजिक सुधारों का विरोध नहीं करता। हालांकि, कमेटी ने सामाजिक सुधार और किसी धार्मिक समुदाय के मान्य एवं संरक्षित व्यक्तिगत कानून को समाप्त करने के बीच अंतर बताया है।
ज्ञापन में कहा गया है कि यदि समान नागरिक संहिता के नाम पर मुस्लिम समुदाय के विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, पारिवारिक व्यवस्था तथा अन्य व्यक्तिगत मामलों से संबंधित धार्मिक एवं व्यक्तिगत विधि को पूरी तरह समाप्त या निष्प्रभावी किया जाता है, तो इसका मुस्लिम समाज पर विशेष और गंभीर प्रभाव पड़ेगा। कमेटी ने इसी आशंका के आधार पर प्रस्तावित संहिता के स्वरूप पर आपत्ति जताई है।
कमेटी के निवेदन का प्रमुख विषय छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित यूसीसी के संबंध में मुस्लिम समाज की संवैधानिक, धार्मिक और विधिक आपत्तियों के साथ मुस्लिम पर्सनल लॉ एवं धार्मिक स्वतंत्रता की सुरक्षा है। ज्ञापन में विवाह, तलाक और उत्तराधिकार जैसे व्यक्तिगत मामलों को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखी गई हैं।
प्रारूप बनाने से पहले होगा कानूनी व्यवस्थाओं का अध्ययन
बैठक में बताया गया कि समिति छत्तीसगढ़ की मौजूदा विधिक स्थिति के साथ अन्य राज्यों में प्रचलित व्यवस्थाओं का भी अध्ययन कर रही है। नागरिकों, सामाजिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों से प्राप्त सुझावों तथा कानूनी अध्ययन के आधार पर संहिता का प्रारूप तैयार कर राज्य शासन को प्रस्तुत किया जाएगा। इसके साथ आवश्यक विधायी एवं प्रशासनिक अनुशंसाएं भी दी जाएंगी।
बैठक में पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के जरिए समान नागरिक संहिता की अवधारणा और उससे जुड़े प्रमुख विषयों की जानकारी दी गई। समिति के सदस्य एमके राउत, श्याम धावड़े, मोहन पवार और ज्योति रानी सिंह ने भी संबोधित किया। स्वागत उद्बोधन बिलासपुर संभागायुक्त सुनील जैन ने दिया। कार्यक्रम का संचालन सौरभ सक्सेना ने किया और आभार प्रदर्शन एडीएम शिवकुमार बनर्जी ने किया। इस अवसर पर अपर कलेक्टर वीरेंद्र बहादुर पचभाई, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संदीप अग्रवाल, उपायुक्त स्मृति तिवारी और हरिशंकर चौहान भी उपस्थित थे।
30 अक्टूबर तक ऑनलाइन सुझाव देने का मौका
समान नागरिक संहिता के प्रारूप को लेकर आम नागरिक और संगठन 30 अक्टूबर तक अपने सुझाव दे सकते हैं। इसके लिए राज्य शासन की ओर से ucc.cgstate.gov.in वेबसाइट और ucc-chhattisgarh@cg.gov.in ई-मेल उपलब्ध कराया गया है। परामर्श बैठक में विभिन्न वर्गों से प्राप्त सुझावों को प्रारूप तैयार करने की प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया।
प्रमुख आपत्ति: मुस्लिम पर्सनल लॉ और धार्मिक स्वतंत्रता की सुरक्षा।
प्रमुख चिंता: विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, पारिवारिक व्यवस्था और अन्य व्यक्तिगत मामलों से संबंधित धार्मिक एवं व्यक्तिगत विधि को समाप्त या निष्प्रभावी किए जाने की आशंका।
