

सरपंचों पर दबाव, पसंदीदा ठेकेदारों से काम कराने से लेकर सीमांकन विवाद तक उठे सवाल; विजय केशरवानी के घर जुटे जनप्रतिनिधि, प्रशासन को 12 सूत्रीय शिकायतों की जांच की मांग
बिलासपुर/बेलतरा। बेलतरा विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में एक बार फिर टकराव की स्थिति बनती दिखाई दे रही है। कांग्रेस नेताओं, सरपंचों और पंचायत प्रतिनिधियों ने बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला पर कथित राजनीतिक दबाव, प्रशासनिक हस्तक्षेप और राजनीतिक विरोधियों को परेशान किए जाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। इन शिकायतों को लेकर अब कांग्रेस खेमे ने जिला प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलने का ऐलान किया है। 13 अक्टूबर को कलेक्टर कार्यालय का घेराव करने की घोषणा की गई है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि आंदोलन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से किया जाएगा। उनका दावा है कि कलेक्टर को शिकायतों से संबंधित ज्ञापन भेजा गया है और मूल प्रति भी प्रस्तुत की जाएगी।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब बेलतरा के कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष एवं सेलर सरपंच धनंजय सिंह ठाकुर और विधायक सुशांत शुक्ला के बीच जमीन के सीमांकन को लेकर विवाद पहले ही राजनीतिक रंग ले चुका है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार धनंजय सिंह ने प्रशासनिक अमले पर विधायक के दबाव का आरोप लगाया था, जिसके बाद विधायक की ओर से उन्हें मानहानि का कानूनी नोटिस भेजा गया।
विजय केशरवानी के घर जुटे जनप्रतिनिधि, फिर बनी आंदोलन की रणनीति
इसी पूरे विवाद और क्षेत्र की अन्य शिकायतों को लेकर बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के कई जनप्रतिनिधि, सरपंच, कांग्रेस पदाधिकारी और नागरिक पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं बेलतरा विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी रहे विजय केशरवानी के निज निवास पर पहुंचे।
बैठक से पहले नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने केशरवानी के स्वास्थ्य की जानकारी ली। वे उपचार के बाद हाल ही में मुंबई से लौटे हैं। इसके बाद क्षेत्र की पंचायतों, विकास कार्यों, कथित प्रशासनिक हस्तक्षेप, ठेकेदारों की भूमिका, सीमांकन विवाद, अवैध उत्खनन और कथित धन वसूली जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
बैठक में मौजूद लोगों ने आरोप लगाया कि यदि प्रशासन शिकायतों पर निष्पक्ष सुनवाई नहीं करता है तो लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करना जरूरी होगा। इसी के बाद 13 अक्टूबर को कलेक्टर कार्यालय घेराव का निर्णय लिया गया।
‘पसंदीदा ठेकेदारों’ का मामला भी गरमाया
ज्ञापन में सबसे गंभीर आरोपों में से एक पंचायत विकास कार्यों में कथित राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कुछ सरपंचों और पंचायत प्रतिनिधियों पर कथित तौर पर दबाव बनाया जाता है कि पंचायत के विकास कार्य विधायक के पसंदीदा अथवा करीबी ठेकेदारों से ही कराए जाएं।
ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ मामलों में काम शुरू होने से पहले कथित अग्रिम भुगतान किए जाने की शिकायतें हैं। विरोध करने वाले पंचायत प्रतिनिधियों के विकास कार्य प्रभावित किए जाने अथवा स्वीकृति रोकने का आरोप भी लगाया गया है।
इसके अलावा पंचायत सचिवों के स्थानांतरण को भी शिकायतकर्ताओं ने कथित राजनीतिक दबाव से जोड़कर जांच की मांग की है।
अब प्रशासन से सीधा सवाल—किस पंचायत में किसे मिला काम?
शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि बेलतरा विधानसभा क्षेत्र की पंचायतों में पिछले वर्षों में हुए विकास कार्यों का रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से जांचा जाए।
इसमें—
किस पंचायत में कौन-सा काम स्वीकृत हुआ?
किस एजेंसी या ठेकेदार को काम मिला?
किस प्रक्रिया के तहत काम दिया गया?
स्वीकृत राशि कितनी थी?
कितना भुगतान हुआ?
क्या कोई अग्रिम भुगतान किया गया?
काम की वर्तमान स्थिति क्या है?
निर्माण की तकनीकी गुणवत्ता कैसी है?
इन सभी बिंदुओं की जांच कराने की मांग की गई है।
धनंजय सिंह प्रकरण ने बढ़ाई सियासी गर्मी
धनंजय सिंह ठाकुर का मामला इस राजनीतिक टकराव का एक प्रमुख केंद्र बन गया है। वे कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष होने के साथ सेलर गांव के सरपंच और सरपंच संगठन से जुड़े पदाधिकारी हैं।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया था कि खड़ी फसल के बीच उनकी जमीन के सीमांकन के लिए प्रशासनिक कार्रवाई कराई गई और उन्होंने इसमें विधायक के कथित दबाव का आरोप लगाया। इसके बाद विधायक सुशांत शुक्ला की ओर से मानहानि का नोटिस भेजे जाने की खबर सामने आई है।
अब कांग्रेस नेताओं ने इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।
ज्ञापन में कहा गया है कि बारिश और खड़ी फसल के दौरान सीमांकन की कार्रवाई तथा बाद में जारी किए गए नोटिस की परिस्थितियों की भी जांच होनी चाहिए।
‘यह सिर्फ एक मामला नहीं’—कांग्रेस नेताओं का दावा
बैठक में शामिल नेताओं का दावा है कि धनंजय सिंह का मामला अकेला नहीं है। उनका आरोप है कि कांग्रेस विचारधारा से जुड़े अन्य सरपंचों और पंचायत प्रतिनिधियों पर भी कथित रूप से प्रशासनिक दबाव बनाया जा रहा है।
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि जो पंचायत प्रतिनिधि कथित राजनीतिक दबाव के अनुरूप काम नहीं करते, उनके क्षेत्र के विकास कार्यों पर असर पड़ता है अथवा पंचायत सचिवों के स्थानांतरण जैसी कार्रवाई सामने आती है।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि प्रशासनिक जांच के बिना नहीं की जा सकती है।
विकास कार्यों में ‘राजनीतिक भेदभाव’ का आरोप
ज्ञापन में बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के विकास कार्यों में राजनीतिक पसंद-नापसंद के कथित प्रभाव का आरोप भी लगाया गया है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि विकास कार्य किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि जनता के लिए सार्वजनिक धन से संचालित योजनाएं हैं। इसलिए विकास कार्यों में राजनीतिक भेदभाव की शिकायतों की समीक्षा जिला प्रशासन को करनी चाहिए।
अवैध रेत-मुरुम उत्खनन और धन वसूली का मुद्दा भी उठाया
बेलतरा क्षेत्र में कथित अवैध रेत और मुरुम उत्खनन का मुद्दा भी ज्ञापन में उठाया गया है।
शिकायतकर्ताओं ने अवैध उत्खनन, परिवहन, निर्माण कार्यों से जुड़े कथित दबाव और अनुचित धन वसूली की शिकायतों की जांच कराने की मांग की है।
हालांकि इन आरोपों पर प्रशासनिक जांच अथवा सक्षम एजेंसी की पुष्टि सामने आना बाकी है।
12 सूत्रीय मांगों से प्रशासन पर बढ़ेगा दबाव
आंदोलनकारियों ने जिला प्रशासन के सामने मुख्य रूप से ये मांगें रखी हैं—
1. विधायक द्वारा कथित राजनीतिक बदले की भावना से जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों को परेशान किए जाने की शिकायतों की जांच।
2. सरपंचों पर कथित रूप से पसंदीदा ठेकेदारों से कार्य कराने के दबाव की जांच।
3. कार्य शुरू होने से पहले किए गए कथित अग्रिम भुगतानों की जांच।
4. दबाव का विरोध करने वाले पंचायतों में प्रभावित विकास कार्यों एवं सचिवों के स्थानांतरण की जांच।
5. धनंजय सिंह के सीमांकन, नोटिस और पंचायत सचिव के स्थानांतरण से जुड़े मामले की स्वतंत्र जांच।
6. कांग्रेस विचारधारा से जुड़े अन्य पंचायत प्रतिनिधियों की शिकायतों की जांच।
7. पंचायत विकास कार्यों में कथित राजनीतिक भेदभाव की समीक्षा।
8. पंचायतों में कार्य करने वाले ठेकेदारों और उन्हें किए गए भुगतानों की जांच।
9. रेत एवं मुरुम के कथित अवैध उत्खनन की जांच।
10. कथित अनुचित धन वसूली एवं प्रशासनिक दबाव की जांच।
11. अधिकारियों पर कथित राजनीतिक दबाव की जांच।
12. सभी शिकायतों की समयबद्ध एवं निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई।
13 अक्टूबर को कलेक्टोरेट में शक्ति प्रदर्शन
अब निगाहें 13 अक्टूबर पर टिक गई हैं। कांग्रेस नेताओं, सरपंचों, पंचायत प्रतिनिधियों और नागरिकों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर विरोध दर्ज कराने का ऐलान किया है।
ज्ञापन में कहा गया है कि आंदोलन लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से किया जाएगा। माननीय कलेक्टर की अनुपस्थिति में शिकायतों से संबंधित ज्ञापन व्हाट्सऐप के माध्यम से भेजे जाने की बात कही गई है, जबकि मूल प्रति सोमवार को प्रस्तुत करने की जानकारी दी गई है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य टकराव पैदा करना नहीं, बल्कि संविधान और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत शिकायतों की निष्पक्ष जांच की मांग करना है।
विजय केशरवानी का तीखा संदेश—‘सत्ता बदलती है, रिकॉर्ड कायम रहता है’
बैठक में विजय केशरवानी ने प्रशासनिक अधिकारियों को लेकर कहा कि सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन संविधान और कानून कायम रहते हैं।
उन्होंने कहा कि यदि कोई अधिकारी राजनीतिक प्रभाव में आकर बदले की कार्रवाई अथवा नियम-विरुद्ध काम में सहभागी बनता है तो हर कार्रवाई का रिकॉर्ड रहता है। उन्होंने अधिकारियों से किसी व्यक्ति के दबाव में नहीं बल्कि संविधान और कानून के अनुसार काम करने की अपील की।
अब प्रशासन की बारी
बेलतरा का यह विवाद अब महज राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं दिख रहा। एक तरफ कांग्रेस नेताओं ने पंचायतों से लेकर प्रशासनिक कार्रवाई और कथित अवैध उत्खनन तक कई गंभीर शिकायतें एक साथ उठाई हैं, वहीं धनंजय सिंह से जुड़े सीमांकन विवाद में विधायक की ओर से मानहानि नोटिस भेजे जाने की बात भी सामने आ चुकी है।
अब असली सवाल जिला प्रशासन के सामने है—क्या इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी? क्या पंचायतों में हुए कार्यों और भुगतानों का रिकॉर्ड खंगाला जाएगा? क्या कथित राजनीतिक हस्तक्षेप की शिकायतों की जांच होगी? और क्या 13 अक्टूबर के घेराव से पहले प्रशासन इन शिकायतों पर कोई ठोस कदम उठाएगा?
13 अक्टूबर का कलेक्टर कार्यालय घेराव इस पूरे सियासी टकराव का अगला बड़ा पड़ाव होगा।



