



फाउंडेशन कोर्स में डिजिटल फ्रॉड, फर्जी कॉल-लिंक और OTP से बचाव समझाया; स्थानीय भाषा में बातचीत कर मरीज का भरोसा जीतने के तरीके भी बताए
बिलासपुर, 24 सितंबर। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) में नए एमबीबीएस विद्यार्थियों को सिर्फ मेडिकल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि साइबर सुरक्षा और मरीजों से बेहतर संवाद की भी ट्रेनिंग दी जा रही है। एनएमसी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए चल रहे 14 दिवसीय फाउंडेशन कोर्स के तहत 23 और 24 सितंबर को साइबर अपराध जागरूकता तथा चिकित्सा संदर्भ में छत्तीसगढ़ी भाषा की मूलभूत जानकारी पर विशेष व्याख्यान आयोजित किए गए।
पहले दिन साइबर ठगी के तरीकों से कराया रूबरू
23 सितंबर को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बिलासपुर की मुख्य प्रबंधक श्रीमती ज्योत्सना सिंह ने विद्यार्थियों को साइबर अपराध के विभिन्न तरीकों की जानकारी दी। उन्होंने ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, संदिग्ध लिंक और डिजिटल लेन-देन के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में विस्तार से समझाया।
विद्यार्थियों को मजबूत पासवर्ड रखने, OTP किसी के साथ साझा नहीं करने और अनजान या संदिग्ध लिंक पर क्लिक नहीं करने की सलाह दी गई। साइबर अपराधियों द्वारा अपनाए जाने वाले तरीकों को समझाते हुए डिजिटल लेन-देन में सतर्कता बरतने पर जोर दिया गया।
दूसरे दिन ‘मरीज की भाषा’ समझने की सीख
24 सितंबर को अर्पा रेडियो की संचालिका श्रीमती संज्ञा टंडन ने चिकित्सा संदर्भ में छत्तीसगढ़ी भाषा की मूलभूत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्थानीय भाषा में सहज बातचीत मरीज और डॉक्टर के बीच संवाद को आसान बना सकती है।
उन्होंने विद्यार्थियों को छत्तीसगढ़ी के स्थानीय शब्दों और बोलचाल की शैली के माध्यम से मरीजों से संवाद करने तथा उनका विश्वास जीतने के तरीके बताए। विद्यार्थियों ने इस दौरान छत्तीसगढ़ी भाषा में संवाद का अभ्यास भी किया।
‘डॉक्टर के लिए तकनीकी ज्ञान के साथ संवेदनशील संवाद भी जरूरी’
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि विद्यार्थियों के लिए साइबर अपराध से बचाव की जानकारी हासिल करने के साथ मरीजों से स्थानीय भाषा में संवाद करना भी जरूरी है। इससे विद्यार्थी एक ओर डिजिटल जोखिमों के प्रति सजग रहेंगे, वहीं दूसरी ओर मरीजों की बात को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे।
उन्होंने कहा कि चिकित्सा सेवा में केवल तकनीकी ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है। संवेदनशील व्यवहार और प्रभावी संवाद भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
सामाजिक और व्यवहारिक पहलुओं की भी समझ
सिम्स के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा कि फाउंडेशन कोर्स में ऐसे व्यावहारिक विषयों को शामिल करने से विद्यार्थियों को चिकित्सा शिक्षा के साथ सामाजिक और व्यवहारिक पहलुओं की भी समझ मिलेगी। इससे भविष्य में वे मरीजों और उनके परिजनों के साथ अधिक आत्मीयता से व्यवहार कर सकेंगे।
सवाल-जवाब से लेकर संवाद अभ्यास तक
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने साइबर सुरक्षा से जुड़े सवाल पूछे और विशेषज्ञों से अपनी जिज्ञासाओं का समाधान किया। वहीं छत्तीसगढ़ी भाषा के सत्र में विद्यार्थियों ने स्थानीय भाषा में मरीजों से बातचीत का अभ्यास किया।
आयोजकों के अनुसार फाउंडेशन कोर्स का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल चिकित्सा ज्ञान देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें जिम्मेदार, संवेदनशील और समाज के प्रति जागरूक चिकित्सक के रूप में तैयार करना भी इसका अहम हिस्सा है।
ये रहे मौजूद
कार्यक्रम में मेडिकल एजुकेशन यूनिट के कॉर्डिनेटर डॉ. केशव कश्यप, डॉ. मधुमिता मूर्ति, डॉ. हेमलता ठाकुर, डॉ. सुजीत कुमार नायक, डॉ. शिक्षा जांगड़े, डॉ. भावना रायजादा और डॉ. कमलजीत बाशन सहित अन्य वरिष्ठ चिकित्सक, अधिकारी, कर्मचारी तथा नवप्रवेशित एमबीबीएस छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।



