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बिलासपुर ने फिर दिया एकता का संदेश, शांति मार्च में दिखा शहर का साझा संकल्प

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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नेहरू चौक से गांधी चौक तक कदम-कदम पर नजर आई सामाजिक एकजुटता, कलेक्टर-एसएसपी के नेतृत्व में सभी वर्गों ने कहा—अफवाह नहीं, आपसी विश्वास को देंगे ताकत
बिलासपुर।
किसी शहर की असली पहचान उसकी इमारतों से नहीं, बल्कि मुश्किल वक्त में उसके लोगों के एक साथ खड़े होने से होती है। बिलासपुर ने गुरुवार को ऐसा ही एक सकारात्मक संदेश दिया। हालिया घटनाक्रम के बीच शहर की शांति, सामाजिक सद्भाव और भाईचारे को मजबूत करने के उद्देश्य से निकले शांति मार्च में बिलासपुर की साझा ताकत दिखाई दी। प्रशासन, पुलिस, विभिन्न समाजों और समुदायों के प्रतिनिधि, शांति समिति के सदस्य, गणमान्य नागरिक, मीडिया प्रतिनिधि और आम नागरिक एक साथ कदम से कदम मिलाकर चले।
कलेक्टर संजय अग्रवाल और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के नेतृत्व में निकला यह मार्च केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि शहर की सामाजिक चेतना और आपसी भरोसे का सार्वजनिक प्रदर्शन बन गया। नेहरू चौक से शुरू हुआ मार्च शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए गांधी चौक पहुंचकर संपन्न हुआ।
जब शहर एक सुर में बोला—शांति सबसे बड़ी ताकत
मार्च में शामिल अलग-अलग वर्गों के लोगों की मौजूदगी ने यह संदेश दिया कि परिस्थितियां चाहे जैसी हों, बिलासपुर अपनी सामाजिक एकता को कमजोर नहीं होने देगा। लोगों ने आपसी भाईचारा बनाए रखने और शहर के शांतिपूर्ण वातावरण को और मजबूत करने का संकल्प व्यक्त किया।
इस दौरान प्रशासन और पुलिस की अपील भी स्पष्ट रही—अफवाहों पर भरोसा न करें, भ्रामक सूचनाओं को आगे न बढ़ाएं और किसी भी विवाद की स्थिति में कानून अपने हाथ में लेने के बजाय पुलिस-प्रशासन को सूचना दें।
कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कहा कि बिलासपुर की पहचान शांति, सौहार्द और आपसी भाईचारे से रही है। उन्होंने नागरिकों से अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं से सावधान रहने की अपील करते हुए कहा कि प्रशासन नागरिकों की सुरक्षा और शहर में शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखने के लिए पूरी तरह सजग है।
पुलिस ने कहा—सहयोग ही सबसे मजबूत सुरक्षा कवच
एसएसपी रजनेश सिंह ने शांति व्यवस्था बनाए रखने में नागरिकों, समाजों और मीडिया की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी अफवाह अथवा विवाद की स्थिति में तत्काल पुलिस और प्रशासन को सूचना देना चाहिए। नागरिकों की जिम्मेदारी और प्रशासन-पुलिस के बीच बेहतर समन्वय ही शहर की शांति को मजबूत बनाता है।
सभी समाजों ने दिया साथ, संदेश गया दूर तक
शांति मार्च की सबसे बड़ी खासियत इसकी व्यापक सहभागिता रही। विभिन्न समाजों और समुदायों के प्रतिनिधियों ने एक साथ शामिल होकर स्पष्ट किया कि बिलासपुर सभी वर्गों का साझा शहर है। प्रतिनिधियों ने प्रशासन और पुलिस को हरसंभव सहयोग देने की प्रतिबद्धता जताई।
यह सहभागिता उस विश्वास को भी सामने लाती है कि शहर की शांति केवल प्रशासन या पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है।
शांति समिति के फैसले से सड़क तक पहुंचा संदेश
हालिया घटनाक्रम के बाद आयोजित शांति समिति की बैठक में 3 सितंबर को शांति मार्च निकालने का निर्णय लिया गया था। बैठक में सदस्यों ने शहर की शांति व्यवस्था और सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने में प्रशासन एवं पुलिस को सहयोग देने की बात कही थी। गुरुवार को उसी निर्णय का असर शहर की सड़कों पर दिखाई दिया।
गांधी चौक पर पहुंचकर खत्म हुआ मार्च, लेकिन संदेश आगे बढ़ा
नेहरू चौक से गांधी चौक तक चला यह मार्च अपने पीछे एक बड़ा सकारात्मक संदेश छोड़ गया—बिलासपुर की ताकत उसकी विविधता में है और उसकी पहचान आपसी भाईचारे में।
मार्च में नगर निगम आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संदीप अग्रवाल, विभिन्न समाजों एवं समुदायों के प्रमुख, शांति समिति के सदस्य, मीडिया प्रतिनिधि, प्रशासन एवं पुलिस के अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में नागरिक शामिल हुए।यह मार्च खत्म जरूर हुआ, लेकिन बिलासपुर की एकजुटता का संदेश शहर की गलियों से निकलकर समाज के हर वर्ग तक पहुंच गया—अफवाहों के बजाय विश्वास, विवाद के बजाय संवाद और तनाव के बजाय भाईचारा ही बिलासपुर की असली पहचान है।

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