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295 बच्चों से 2500 तक पहुंचा सरकारी स्कूल, अब 3000 की ओर; शिक्षक जय कौशिक को मिलेगा राज्यपाल शिक्षक सम्मान

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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18 साल के शिक्षकीय सफर में तिफरा स्कूल को नई पहचान दिलाने वाले नवाचारी शिक्षक 5 सितंबर को होंगे सम्मानित, स्कूल में प्रवेश के लिए अब परीक्षा तक लेनी पड़ती है
बिलासपुर। एक समय तिफरा का सरकारी स्कूल बस्ती के बीच चार-पांच कमरों तक सीमित था। वर्ष 2008 में यहां महज 295 विद्यार्थी पढ़ते थे। स्कूल का मैदान भी किसी चारागाह से कम नहीं था। घूरवा, जंगलनुमा मैदान और पीछे गोकने नाला—सुविधाओं का अभाव साफ दिखाई देता था। आज इसी स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या बढ़कर 2500 पहुंच चुकी है और अगले दो वर्षों में यह संख्या 3000 तक पहुंचने की संभावना है। स्थिति यह है कि कई कक्षाओं में 150 से 250 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं और प्रवेश के लिए परीक्षा तक लेनी पड़ रही है।


सरकारी स्कूल के इस बदलाव में शिक्षकों, प्राचार्य, जनप्रतिनिधियों और शाला विकास समिति के सामूहिक प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसी बदलाव को शिक्षा के क्षेत्र में अपने समर्पण और नवाचार से गति देने वाले स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय तिफरा के व्याख्याता जय कौशिक को शिक्षक दिवस पर राज्यपाल शिक्षक सम्मान-2026 से सम्मानित किया जाएगा।
रायपुर राजभवन में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रामेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने राज्यपाल शिक्षक सम्मान के लिए जय कौशिक के नाम की घोषणा की। उन्हें 5 सितंबर 2026 को शिक्षक सम्मान समारोह में सम्मानित किया जाएगा।
18 साल में बदली स्कूल की तस्वीर
जय कौशिक बताते हैं कि जब वे वर्ष 2008 में स्कूल में पदस्थ हुए, तब विद्यार्थियों की संख्या केवल 295 थी। लगातार प्रयास, शिक्षकों के मार्गदर्शन, प्राचार्य के सहयोग, जनप्रतिनिधियों की सहभागिता और शाला विकास समिति के सहयोग से स्कूल का स्वरूप लगातार बदलता गया।
चार-पांच कमरों से शुरू हुआ सफर अब 40 कमरों तक पहुंच चुका है। गांव से नगर पंचायत, नगर पालिका और फिर नगर निगम बनने के साथ क्षेत्र का विस्तार हुआ और स्कूल के कार्यक्रमों से स्थानीय जनप्रतिनिधियों को लगातार जोड़ने से भी स्कूल के विकास को गति मिली।
आज स्कूल में बच्चों की संख्या 2500 तक पहुंच गई है। अगले दो वर्षों में 3000 विद्यार्थियों तक पहुंचने की उम्मीद है। पालक अपने बच्चों का दाखिला कराने के लिए विशेष प्रयास करते हैं। यहां तक कि विधायक, सांसद और अधिकारियों की अनुशंसा लेकर भी पालक स्कूल पहुंचते हैं।
सरकारी स्कूल में प्रवेश के लिए परीक्षा, फिर भी बढ़ रही संख्या
बच्चों की बढ़ती संख्या के बावजूद स्कूल की शैक्षणिक गुणवत्ता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। बोर्ड परीक्षाओं में लगातार शत-प्रतिशत परिणाम आ रहा है। वर्ष 2019-20 में छात्रा मानवी कौशिक ने छत्तीसगढ़ बोर्ड परीक्षा की टॉप-10 सूची में स्थान बनाया था।
वर्ष 2024 में 100 विद्यार्थी बारहवीं बोर्ड परीक्षा में प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण हुए। इसी वर्ष तिफरा की छात्रा सुमन कैवर्त का भाभा परमाणु रिसर्च सेंटर, हैदराबाद में जूनियर वैज्ञानिक के रूप में चयन हुआ।
वर्ष 2026 में स्कूल की तीन छात्राओं राधिका, रजनी और हर्षिता का नीट में चयन हुआ। वहीं मलखंभ में कक्षा आठवीं की एक छात्रा का ऑल इंडिया स्तर के लिए चयन स्कूल की उपलब्धियों में शामिल है।
खेल, योग और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी आगे
स्कूल में पढ़ाई के साथ खेल और अन्य गतिविधियों पर भी लगातार जोर दिया जा रहा है। हर वर्ष विद्यार्थी राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। वर्ष 2025 में 6 विद्यार्थियों ने राज्य स्तरीय खेलों में भाग लिया, जबकि 2026 में भी 6 विद्यार्थी राज्य स्कूल गेम्स में उत्कृष्ट प्रदर्शन करेंगे।
स्कूल के विद्यार्थी योग, हैंडबॉल, जिम्नास्टिक और मलखंभ जैसी विधाओं में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। एक छात्रा ने ऑल इंडिया स्तर पर भी स्थान बनाया है।
शनिवार को विशेष पीटी, परेड, जुंबा और योग जैसी गतिविधियां कराई जाती हैं। सांस्कृतिक मंच को भी सक्रिय किया गया है।
समाज और राष्ट्र से जोड़ने की कोशिश
जय कौशिक के मार्गदर्शन में स्कूल में शिक्षा के साथ संस्कार, नैतिक शिक्षा और स्वास्थ्य जागरूकता पर भी काम किया जा रहा है। विद्यार्थियों को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने के लिए बाल चेतना, राष्ट्रीय नशामुक्ति अभियान, पर्यावरण जागरूकता, स्वच्छ भारत अभियान, हर घर तिरंगा अभियान, कारगिल दिवस, ‘एक पेड़ मां के नाम’, ‘सिपाही रक्षा सूत्र सैनिक के नाम’, मानव श्रृंखला बनाकर शत-प्रतिशत मतदान और स्वच्छता संदेश सहित अनेक गतिविधियों का आयोजन किया गया।
योग को घर-घर पहुंचाने के लिए भी अभियान चलाया गया। शिक्षा को केवल कक्षा तक सीमित न रखते हुए बच्चों में सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र के प्रति जागरूकता विकसित करने का प्रयास किया गया।
‘सफर-सफलता की राह’ ने भी दिलाई पहचान
जय कौशिक ने शिक्षक के साथ लेखक के रूप में भी अपनी पहचान बनाई है। उनकी प्रेरणादायक पुस्तक ‘सफर-सफलता की राह’ की रायपुर साहित्य उत्सव में खूब चर्चा हुई। सीवी रमन विश्वविद्यालय में भी पुस्तक को लेकर कार्यक्रम हुआ और शिक्षक साथियों ने इसका भव्य विमोचन किया।
यह पुस्तक केवल शिक्षकों के लिए नहीं, बल्कि समाज के सभी वर्गों के लिए प्रेरणादायक बताई गई है। शिक्षक के लेखन कौशल का यह एक बेहतर उदाहरण माना गया।
कई सम्मान मिल चुके, अब राज्यपाल सम्मान की बारी
जय कौशिक को उनके शिक्षकीय और सामाजिक कार्यों के लिए पहले भी कई सम्मान मिल चुके हैं। इनमें प्रमुख रूप से—
शिक्षक दिवस 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह से उत्कृष्ट शिक्षक गौरव सम्मान।
स्वतंत्रता दिवस 2019 में पुलिस ग्राउंड में संसदीय सचिव, छत्तीसगढ़ शासन से उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान।
शिक्षक कला एवं साहित्य एकादमी से वर्ष 2022 में शिक्षा दूत सम्मान।
योग आयोग से वर्ष 2023 में योगाचार्य सम्मान।
केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू से वर्ष 2024 में उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान।
जिला कलेक्टर की ओर से अलग-अलग अवसरों पर कई उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान।
वर्ष 2026 में नवाचार के लिए श्री हरिमिश्र की स्मृति में राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान
लोक सेवा गौरव सम्मान
योग के माध्यम से स्वास्थ्य जागरूकता के लिए वर्ष 2025 और 2026 में अध्यक्ष संजय अग्रवाल के हाथों योग आयोग छत्तीसगढ़ की ओर से योगाचार्य सम्मान।
अब उनके सम्मान की सूची में राज्यपाल शिक्षक सम्मान-2026 भी जुड़ने जा रहा है।
चार कमरों से 40 कमरों तक का सफर
जय कौशिक के मुताबिक, स्कूल के शुरुआती दौर में संसाधनों का भारी अभाव था। बस्ती के बीच स्थित चार-पांच कमरों का स्कूल था। मैदान में घूरवा और जंगल जैसी स्थिति थी। पीछे गोकने नाला होने के कारण आज भी ज्यादा बारिश होने पर मैदान में पानी भर जाता है। हालांकि नाली के माध्यम से तत्काल पानी निकालने की व्यवस्था की जाती है।
अभाव के बावजूद शिक्षकों ने प्रयास जारी रखा। प्राचार्य, वरिष्ठ शिक्षकों और जनप्रतिनिधियों के सहयोग और मार्गदर्शन से स्कूल धीरे-धीरे आगे बढ़ा। चार-पांच कमरों से 40 कमरों तक का सफर तय हुआ और इसके साथ ही विद्यार्थियों की संख्या भी लगातार बढ़ती गई।
निजी स्कूलों को टक्कर दे रहा सरकारी स्कूल
तिफरा का सरकारी स्कूल अब स्वामी आत्मानंद स्कूल से स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट शाला और पीएम श्री स्कूल की ओर बढ़ रहा है। स्कूल में स्मार्ट क्लास की दिशा में भी काम हुआ है।
जय कौशिक कहते हैं, “सपना है स्मार्ट क्लास में स्मार्ट बच्चों का और अब वह साकार होता दिख रहा है।”
स्कूल के प्रत्येक कक्ष में स्मार्ट बोर्ड, सीसीटीवी कैमरे और साउंड सिस्टम की सुविधा है। स्कूल की अपनी वेबसाइट भी है। उनका कहना है कि शिक्षक बच्चों के चेहरे की मुस्कान और लक्ष्य हासिल करने की भूख देखकर अपनी ओर से शत-प्रतिशत प्रयास करने के लिए प्रेरित होता है।
बच्चों की सफलता ही शिक्षक की सबसे बड़ी उपलब्धि
स्कूल में बड़ी संख्या में विद्यार्थी पढ़ रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद शैक्षणिक गुणवत्ता बेहतर रखने का प्रयास जारी है। शिक्षकों के विशेष मार्गदर्शन से स्कूल के कई विद्यार्थी आगे बढ़कर सरकारी नौकरी में हैं और शासकीय सेवा दे रहे हैं।
जय कौशिक का मानना है कि शिक्षक का काम केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं है। बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कार, नैतिकता, स्वास्थ्य जागरूकता और सामाजिक जिम्मेदारी की दिशा दिखाना भी शिक्षक की जिम्मेदारी है।
वे कहते हैं कि हर पल सकारात्मक दिशा में कुछ न कुछ बेहतर करने का प्रयास जारी रहना चाहिए। सरकारी स्कूल में पढ़कर सरकारी स्कूल के बच्चों को आगे बढ़ाने की कोशिश ही उनके शिक्षकीय सफर की सबसे बड़ी प्रेरणा है।
घोषणा के बाद स्कूल परिवार में खुशी
राज्यपाल शिक्षक सम्मान के लिए जय कौशिक का नाम घोषित होने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी, विकासखंड शिक्षा अधिकारी, संकुल प्राचार्य डा. विश्वनाथ कश्यप, संकुल समन्वयक सुनील पाण्डेय, शाला प्रबंधन समिति अध्यक्ष ईश्वर साहू, सदस्य श्याम कार्तिक वर्मा, कृष्ण कुमार कश्यप, सीमा संजय सिंह, रामू साहू, राजकुमार यादव सहित संकुल के शिक्षकों में खुशी का माहौल है।
व्याख्याता रजनीगंधा बेहार, निलिमा बग्गा, विश्वास शर्मा, हेमलता बघेल, मोहन पटनायक, लिपी वर्मा, विनोद अहिरवार, सरस्वती उपाध्याय, निखिल कौशिक, अजीम, कृष्ण कुमार साहू सहित स्कूल और संकुल के सभी शिक्षक, परिवार, मित्र एवं समाज के लोगों ने भी इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की है।
जनप्रतिनिधियों ने भी किया सम्मान
राज्यपाल शिक्षक सम्मान के लिए चयन की घोषणा के बाद क्षेत्रीय बिल्हा विधायक धरमलाल कौशिक सहित जनप्रतिनिधियों ने मंच पर जय कौशिक का सम्मान किया। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि बिलासपुर में शिक्षक इसी तरह अपने कार्यों से बच्चों और समाज को प्रेरणा देते रहें और आदर्श शिक्षक के रूप में अपनी भूमिका निभाते रहें।
शिक्षक का समर्पण बना स्कूल की पहचान
जय कौशिक की कहानी केवल एक शिक्षक के सम्मान की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस बदलाव की कहानी है जिसमें 295 विद्यार्थियों वाला सरकारी स्कूल 2500 विद्यार्थियों तक पहुंचा और अब 3000 की ओर बढ़ रहा है। जहां कभी चार-पांच कमरे और संसाधनों का अभाव था, वहां आज 40 कमरे, स्मार्ट बोर्ड, सीसीटीवी, साउंड सिस्टम और विविध शैक्षणिक-सामाजिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं।एक शिक्षक का समर्पण, शिक्षकों की सामूहिक मेहनत और समाज-जनप्रतिनिधियों के सहयोग ने तिफरा के सरकारी स्कूल को ऐसी पहचान दी है, जहां निजी स्कूलों के विकल्प के तौर पर पालक अपने बच्चों के दाखिले के लिए प्रयास कर रहे हैं।

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