






खपरगंज हिंसा में दो FIR, 50 से ज्यादा लोगों पर केस; सिटी कोतवाली के सामने पथराव, पुलिसकर्मी समेत कई घायल, गाड़ियों और दुकानों में तोड़फोड़
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में 28-29 अगस्त की दरमियानी रात खपरगंज में भड़के बवाल के बाद पुलिस ने अब कार्रवाई तेज कर दी है। दो पक्षों के बीच शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते हिंसक झड़प, पथराव और तोड़फोड़ में बदल गया था। सिटी कोतवाली थाना परिसर तक पत्थर पहुंचे, पुलिस पर हमला हुआ, पुलिसकर्मी घायल हुए और सरकारी वाहनों के साथ आसपास की दुकानों व घरों को भी नुकसान पहुंचा।
अब इस मामले में पुलिस ने दो अलग-अलग अपराधों में कुल 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें अपराध क्रमांक 488/2026 में 8 आरोपी और अपराध क्रमांक 489/2026 में 3 आरोपी शामिल हैं। पुलिस CCTV फुटेज, घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो और अन्य उपलब्ध जानकारी के आधार पर बाकी आरोपियों की पहचान में जुटी है।
वहीं, आपके उपलब्ध पुलिस कार्रवाई संबंधी इनपुट के अनुसार राम सिंह और सुहैल की तलाश तेज कर दी गई है। पुलिस की जांच अब इस बात पर केंद्रित है कि रात के बवाल में कौन-कौन लोग सीधे तौर पर शामिल थे और किसने भीड़ को उकसाने या हिंसा को बढ़ाने में भूमिका निभाई।
पहले विवाद, फिर भीड़, फिर पत्थरबाजी… देखते ही देखते बिगड़ गया शहर का माहौल
मामले की शुरुआत व्यक्तिगत विवाद और सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी/पोस्ट से जुड़े विवाद से हुई। शुरुआती घटनाक्रम में दो पक्ष आमने-सामने आए। मारपीट और गाली-गलौज के बाद दोनों पक्षों के लोग एक-दूसरे के सामने जुटते गए।
शुरुआत में भीड़ सीमित थी, लेकिन कुछ ही देर में संख्या बढ़ती चली गई। शहर के अलग-अलग इलाकों से बड़ी संख्या में युवक खपरगंज और सिटी कोतवाली क्षेत्र में पहुंच गए। देखते ही देखते स्थिति पुलिस के नियंत्रण से बाहर होती नजर आई और दोनों ओर से पथराव शुरू हो गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए आसपास के थानों से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालने की कोशिश की।
सिटी कोतवाली भी बना निशाना, पुलिस पर बरसे पत्थर
सबसे गंभीर स्थिति सिटी कोतवाली चौक और थाना परिसर के आसपास बनी। भीड़ को समझाकर शांत कराने का प्रयास किया गया, लेकिन पथराव शुरू होने के बाद हालात और बिगड़ गए।
पुलिस ने भीड़ को पीछे हटाने के लिए बल प्रयोग किया। इसके बाद आंसू गैस के गोले छोड़े गए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार करीब पांच से छह आंसू गैस के गोले इस्तेमाल किए गए। कुछ गोले तकनीकी कारणों से नहीं चल पाए तो उन्हें हाथ से फेंककर भीड़ को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया।
इसके बावजूद काफी देर तक तनाव बना रहा।
पुलिसकर्मियों को भी नहीं बख्शा, टीआई का सिर फटा
पथराव के दौरान तारबाहर थाना प्रभारी रवि तिवारी घायल हो गए। उनके सिर में पत्थर लगने से चोट आई और सिर फट गया। आरक्षक सोनू पाल के होंठ पर चोट लगी।
पुलिस के अलावा दोनों पक्षों के कई लोगों के घायल होने की जानकारी भी सामने आई। शुरुआती रिपोर्टों में घायलों की संख्या दो दर्जन से अधिक बताए जाने की बात सामने आई थी।
कलेक्टर की गाड़ी का मिरर टूटा, डायल-112 भी क्षतिग्रस्त
उपद्रव के दौरान पथराव का असर सरकारी वाहनों तक पहुंचा। कलेक्टर की गाड़ी का मिरर क्षतिग्रस्त हुआ। डायल-112 वाहन को भी नुकसान पहुंचा। थाना परिसर में खड़ी अन्य गाड़ियों के शीशे टूटने की जानकारी सामने आई।
यह घटना इस लिहाज से भी गंभीर है कि पथराव करने वाली भीड़ ने पुलिस थाने और सरकारी वाहनों को भी निशाना बनाया।
गोल बाजार और सदर बाजार तक पहुंचा असर
बवाल सिर्फ खपरगंज और सिटी कोतवाली चौक तक सीमित नहीं रहा। देर रात गोल बाजार और सदर बाजार क्षेत्र में भी उपद्रव और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं। कुछ दुकानों को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई।
देर रात बड़ी संख्या में लोग सिटी कोतवाली के सामने सड़क पर बैठ गए थे। मल्टी लेवल पार्किंग से चौक तक का इलाका तनाव की चपेट में रहा।
11 गिरफ्तारियां… दो FIR में बंटी पुलिस की कार्रवाई
पुलिस ने मामले में दो अलग-अलग अपराध दर्ज किए हैं।
अपराध क्रमांक 488/2026 — 8 आरोपी गिरफ्तार
इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों के नाम:
मौला बक्स उर्फ जूब्बू, पिता इलाही बक्स, उम्र 37 वर्ष, निवासी खपरगंज, थाना सिटी कोतवाली, बिलासपुर।
शेख अजरूद्धीन उर्फ अज्जू, पिता शेख नसीरूद्दीन, उम्र 25 वर्ष, निवासी तैबा चौक, तालापारा, थाना सिटी कोतवाली।
मोहम्मद जाहिद खान, पिता अब्दुल हनीफ खान, उम्र 45 वर्ष, निवासी खपरगंज, थाना सिटी कोतवाली, बिलासपुर।
सफीक अहमद उर्फ राजा खान, पिता शेख मोहम्मद, उम्र 31 वर्ष, निवासी खपरगंज, थाना सिटी कोतवाली, बिलासपुर।
शकीर उर्फ सोनू, पिता मोहम्मद साबीर, उम्र 24 वर्ष, निवासी जूनी लाइन, संतोष भवन के पास, बिलासपुर।
मोहम्मद लाईक, पिता मोहम्मद सफीक, उम्र 37 वर्ष, निवासी खपरगंज, थाना सिटी कोतवाली, बिलासपुर।
रेहान अली उर्फ ईरानी, पिता जहोर अली, उम्र 19 वर्ष, निवासी जबड़ापारा, सरकंडा, बिलासपुर।
मो. जुनैद, पिता मो. जावेद, उम्र 21 वर्ष, निवासी खपरगंज मेन चौक, कोतवाली, बिलासपुर।
अपराध क्रमांक 489/2026 — 3 आरोपी गिरफ्तार
इस मामले में गिरफ्तार आरोपी हैं:
राजू यादव उर्फ नान, पिता मुन्नी लाल यादव, उम्र 30 वर्ष, निवासी कुंदरापारा, दुर्गा मंदिर के पास मेन रोड, थाना सिरगिट्टी, बिलासपुर।
राकेश यादव उर्फ रिंकु, पिता रमेश यादव, उम्र 24 वर्ष, निवासी कुंदरापारा, दुर्गा मंदिर के पास मेन रोड, थाना सिरगिट्टी, बिलासपुर।
छत्रपाल साहू, पिता संत राम साहू, उम्र 25 वर्ष, निवासी साईंस कॉलेज के सामने, डबरीपारा, सरकंडा, बिलासपुर।
इस तरह दोनों मामलों में कुल 11 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। ताजा रिपोर्टों में भी दोनों पक्षों से 11 आरोपियों की गिरफ्तारी की पुष्टि की गई है।
50 से ज्यादा लोगों पर FIR, अब चेहरों की पहचान का ऑपरेशन
पुलिस ने बवाल के मामले में 50 से अधिक लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज किया है। इसके बाद संदिग्धों की धरपकड़ शुरू की गई। 30 अगस्त की रिपोर्टों में पुलिस द्वारा बड़ी संख्या में संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी।
अब पुलिस का फोकस सिर्फ गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और घटनास्थल से मिले डिजिटल साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है। इससे यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि भीड़ में कौन-कौन सक्रिय था और किसने पुलिस तथा सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया।
राम सिंह और सुहैल की तलाश क्यों अहम?
पुलिस की मौजूदा कार्रवाई में राम सिंह और सुहैल की तलाश को भी अहम माना जा रहा है। उपलब्ध इनपुट के मुताबिक दोनों की तलाश तेज की गई है।
हालांकि उनकी कथित भूमिका और उनके खिलाफ लगाए गए सटीक आरोपों की पुष्टि जांच के अंतिम निष्कर्ष के बाद ही होगी। इसलिए पुलिस अब उनके संबंध में उपलब्ध CCTV फुटेज, वीडियो और अन्य साक्ष्यों को जोड़ रही है।
जांच का बड़ा सवाल यही है कि—
क्या पूरी हिंसा अचानक भड़की भीड़ का परिणाम थी या इसके पीछे लोगों को जुटाने और माहौल को उग्र करने की कोई सुनियोजित कोशिश थी?
पुलिस इसी एंगल से भी जांच आगे बढ़ा रही है।
कलेक्टर-एसएसपी ने संभाली कमान, आईजी और कमिश्नर भी मौके पर
घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने खुद मोर्चा संभाला। कलेक्टर संजय अग्रवाल और एसएसपी रजनेश सिंह देर रात सिटी कोतवाली में मौजूद रहे। कमिश्नर सुनील जैन और आईजी ने भी स्थिति की निगरानी की।
एसएसपी के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच व्यक्तिगत विवाद के बाद स्थिति बिगड़ी और दोनों ओर से पथराव हुआ। स्थिति नियंत्रित करने के लिए करीब ढाई से तीन सौ पुलिस जवान मौके पर लगाए गए। पड़ोसी जिलों से भी अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया।
एसएसपी ने स्पष्ट किया कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
शनिवार सुबह फ्लैग मार्च, अब भी चप्पे-चप्पे पर पुलिस
शुक्रवार रात के बवाल के बाद शनिवार सुबह खपरगंज समिति और आसपास के संवेदनशील इलाकों में पुलिस और प्रशासन ने फ्लैग मार्च किया। इसका उद्देश्य लोगों में सुरक्षा का भरोसा कायम करना और किसी भी तरह की दोबारा भीड़ जुटने की स्थिति को रोकना था।
घटना के बाद सिटी कोतवाली क्षेत्र में प्रतिबंधात्मक कार्रवाई भी की गई। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भीड़ जुटने, जुलूस और बिना अनुमति प्रदर्शन जैसी गतिविधियों पर रोक लगाई है।
अब पुलिस के सामने पांच बड़े सवाल
पहला— सोशल मीडिया पर विवादित सामग्री किसने पोस्ट या प्रसारित की?
दूसरा— शुरुआती मारपीट के बाद दोनों पक्षों के लोगों को मौके पर किसने बुलाया?
तीसरा— सिटी कोतवाली और पुलिसकर्मियों पर पथराव करने वाले लोग कौन थे?
चौथा— कलेक्टर की गाड़ी, डायल-112 और अन्य वाहनों को नुकसान पहुंचाने वालों की पहचान CCTV से कैसे होगी?
पांचवां— राम सिंह और सुहैल समेत बाकी संदिग्धों की घटना में वास्तविक भूमिका क्या थी?
इन सवालों के जवाब पुलिस की जांच और CCTV फुटेज से सामने आने की उम्मीद है।
अफवाहों से बचने की अपील, सोशल मीडिया पर भी पुलिस की नजर
घटना के बाद पुलिस और प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने तथा सोशल मीडिया पर भ्रामक, आपत्तिजनक या विवाद बढ़ाने वाली सामग्री साझा नहीं करने की अपील की है। पुलिस सोशल मीडिया पर वायरल सामग्री की भी निगरानी कर रही है और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
बड़ी तस्वीर: व्यक्तिगत विवाद से शहर के संवेदनशील हिस्से तक पहुंचा बवाल
इस पूरे घटनाक्रम की सबसे अहम बात यह है कि विवाद की शुरुआत सीमित स्तर पर हुई, लेकिन कुछ ही समय में वह बड़ी भीड़ के टकराव में बदल गया। इसके बाद पुलिस पर पथराव, सरकारी वाहनों को नुकसान, दुकानों और घरों में तोड़फोड़ तथा बाजार क्षेत्रों तक तनाव फैलने जैसी स्थिति बनी।
अब पुलिस के सामने चुनौती सिर्फ गिरफ्तारियां करने की नहीं, बल्कि पूरे घटनाक्रम की कड़ी जोड़ने, हिंसा में शामिल हर व्यक्ति की पहचान करने और यह तय करने की है कि किसकी क्या भूमिका थी।
31 अगस्त 2026 तक पुलिस कार्रवाई में कुल 11 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। 50 से अधिक लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज है और अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है। राम सिंह और सुहैल की तलाश भी तेज की गई है। CCTV और सोशल मीडिया फुटेज इस जांच में सबसे अहम कड़ी बनकर सामने आ रहे हैं।




