

बिलासपुर | 23 अप्रैल 2026
जिले के बिल्हा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मोहतरा में मारपीट और धमकी के मामले ने तूल पकड़ लिया है। पीड़ित आयुष बरगाह ने पुलिस अधीक्षक से शिकायत करते हुए आरोप लगाया है कि सरपंच के परिवार से जुड़े आरोपियों द्वारा उनके परिवार पर हमला किया गया, लेकिन पुलिस ने निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की।
पिता अस्पताल में भर्ती, गंभीर चोटें
आवेदन के अनुसार, आरोपियों दीपक मेहर, रूपेश मेहर, अन्नु ध्रुव और चन्द्रराज ध्रुव ने आयुष के पिता राजेश बरगाह के साथ बेरहमी से मारपीट की, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं और वे अभी अस्पताल में भर्ती हैं।
एफआईआर में देरी, उल्टा पीड़ित पर ही केस दर्ज
पीड़ित ने बताया कि घटना के बाद जब वे रिपोर्ट दर्ज कराने बिल्हा थाने पहुंचे, तो पुलिस ने पहले इलाज कराने की बात कहकर उन्हें लौटा दिया। इस बीच आरोपियों ने पहले ही उनके खिलाफ झूठी एफआईआर दर्ज करा दी। बाद में पुलिस ने पीड़ित पक्ष की शिकायत दर्ज की, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
राजनीतिक दबाव का आरोप
आयुष बरगाह का कहना है कि आरोपी रूपेश मेहर की माता ग्राम की सरपंच हैं, और उनके राजनीतिक प्रभाव के चलते पुलिस कार्रवाई प्रभावित हो रही है। आरोप है कि आरोपी खुलेआम घूमकर धमकी दे रहे हैं और गांव में भय का माहौल बना हुआ है।
झूठे केस में फंसाने और एट्रोसिटी एक्ट की धमकी
पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपियों द्वारा लगातार झूठे मामलों में फंसाने और अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (एट्रोसिटी एक्ट) के तहत केस दर्ज कराने की धमकी दी जा रही है।
पुलिस पर दबाव बनाने का आरोप
आवेदन में यह भी उल्लेख है कि पुलिस द्वारा पीड़ित परिवार को बार-बार थाने बुलाने के लिए दबाव बनाया जा रहा है, जिससे परिवार मानसिक रूप से परेशान है।
SP से की ये मांगें
पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक से निम्न मांगें की हैं:
मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच
आरोपियों पर हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धाराएं जोड़कर तत्काल गिरफ्तारी
महामाया चौक के सीसीटीवी फुटेज की जांच
पीड़ित परिवार के खिलाफ दर्ज कथित झूठे मामलों को रद्द करना
पीड़ित परिवार को सुरक्षा प्रदान करना
गांव में कानून व्यवस्था सुनिश्चित करना
गांव में आक्रोश और दहशत
घटना के बाद गांव में आक्रोश और भय का माहौल बताया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि आरोपियों के खिलाफ पहले भी शिकायतें हो चुकी हैं, लेकिन हर बार वे बच निकलते हैं।
अब देखना होगा कि पुलिस प्रशासन इस संवेदनशील मामले में क्या कार्रवाई करता है और पीड़ित परिवार को न्याय कब तक मिल पाता है।

