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धान खरीदी में गड़बड़ी पर कार्रवाई तेज, कहीं FIR तो कहीं देरी… मस्तूरी क्षेत्र की तीन समितियों से जुड़ा पूरा मामला

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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गतोरा-एरमशाही में FIR और गिरफ्तारी, बहतरा में आदेश के बाद भी कार्रवाई नहीं; आंकड़ों, जांच और आरोपों के बीच घिरी व्यवस्था
बिलासपुर, 17 अप्रैल 2026। मस्तूरी विकासखंड की धान खरीदी समितियों में अनियमितताओं को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई, जांच और सवालों का सिलसिला एक साथ सामने आया है। एक ओर गतोरा और इरमशाही समितियों में शिकायतों के बाद एफआईआर दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी की गई है, वहीं बहतरा समिति में फर्जी खरीदी के मामले में आदेश के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं होने से प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। पूरे घटनाक्रम में धान खरीदी के आंकड़े, नियम, जांच रिपोर्ट और कार्रवाई—सभी पहलू एक साथ चर्चा में हैं।
जिले का आंकड़ा: 6.76 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी, सिर्फ 215 क्विंटल का अंतर
जिला खाद्य कार्यालय के अनुसार खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में बिलासपुर जिले में कुल 6,76,325 मीट्रिक टन धान उपार्जन किया गया। इनमें से 6,76,110 मीट्रिक टन धान का उठाव हो चुका है। इस प्रकार कुल अंतर मात्र 215 क्विंटल का बताया गया है।
प्रशासन ने 2100 क्विंटल धान उठाव लंबित होने की खबरों को भ्रामक बताया है। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि लेखा-मिलान की प्रक्रिया जारी है और यदि किसी प्रकार की कमी पाई जाती है तो उसकी वसूली संबंधित समिति की कमीशन राशि से की जाएगी।
केस-1: गतोरा और इरमशाही समितियां—जांच के बाद FIR, कार्रवाई शुरू
मस्तूरी क्षेत्र के गतोरा एवं इरमशाही समितियों में प्राप्त शिकायतों की जांच के बाद दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। प्रशासन के अनुसार कार्रवाई पूरी तरह नियमानुसार की जा रही है और जिले स्तर पर किसी बड़े फर्जीवाड़े की पुष्टि नहीं हुई है।
गतोरा धान खरीदी केंद्र: 28.51 लाख का गबन, 3 आरोपी गिरफ्तार
थाना मस्तूरी में दर्ज अपराध क्रमांक 213/2025 के तहत सेवा सहकारी समिति मर्यादित गतोरा में धान खरीदी में हेरफेर का मामला सामने आया।
संयुक्त जांच दल की भौतिक सत्यापन रिपोर्ट में 919.96 क्विंटल धान कम पाया गया, जिसकी कीमत 28 लाख 51 हजार रुपए आंकी गई।
इस मामले में समिति प्रबंधक, प्राधिकृत अध्यक्ष, धान खरीदी प्रभारी और कंप्यूटर ऑपरेटर पर धान गबन का आरोप लगाया गया। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है:
कोमल प्रसाद चंद्रकार (संस्था प्रबंधक)
राजेन्द्र राठौर (प्राधिकृत अध्यक्ष)
हुलेश्वर धीरही (कंप्यूटर ऑपरेटर)
जांच के दौरान आरोपियों द्वारा हेरफेर स्वीकार करने की बात भी सामने आई है।
केस-2: इरमशाही समिति—शिकायत के बाद FIR, लेखा मिलान जारी
इरमशाही समिति में भी धान खरीदी को लेकर शिकायतें मिली थीं। जांच के बाद संबंधित दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। वर्तमान में समिति में लेखा-मिलान का कार्य जारी है और प्रशासन द्वारा आगे की कार्रवाई प्रक्रिया में बताई गई है।
केस-3: बहतरा समिति—फर्जी खरीदी का आरोप, FIR नहीं होने से सवाल
सेवा सहकारी समिति मर्यादित बहतरा में फर्जी धान खरीदी के मामले में अब तक एफआईआर दर्ज नहीं होने से मामला अलग दिशा में चर्चा में है।
सूत्रों के अनुसार जांच दल की रिपोर्ट में कंप्यूटर ऑपरेटर नरेंद्र कुमार पटेल द्वारा फर्जी एंट्री कर गबन करने का मामला सामने आया। रिपोर्ट में बताया गया कि वास्तविक खरीदी 40,135 क्विंटल थी, जिसे बढ़ाकर 40,454 क्विंटल दर्ज किया गया।
जांच में किसानों के नाम पर फर्जी एंट्री कर राशि निजी खाते में ट्रांसफर करने की बात भी सामने आई है।
उप आयुक्त सहकारिता द्वारा 9 अप्रैल 2026 को आदेश जारी कर आरोपी को पद से पृथक करने, राशि की वसूली करने और तत्काल एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद अब तक न तो प्राथमिकी दर्ज हुई है और न ही कोई ठोस कार्रवाई सामने आई है।
इस देरी को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं और लोगों व किसानों में नाराजगी की स्थिति बताई जा रही है।
तीन अलग-अलग स्थिति, एक ही सिस्टम पर नजर
मस्तूरी क्षेत्र की इन तीन समितियों—गतोरा, इरमशाही और बहतरा—के मामलों में अलग-अलग स्थिति सामने आई है। कहीं तत्काल एफआईआर और गिरफ्तारी, कहीं जांच जारी, तो कहीं आदेश के बाद भी कार्रवाई लंबित है।
इसी के साथ धान खरीदी के आंकड़े, नियमों में बदलाव, जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक कदम—सभी पहलुओं पर निगाह बनी हुई है।

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