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लिंगियाडीह बस्ती पर बुलडोजर पर ब्रेक… हाईकोर्ट ने 36 मकानों के तोड़फोड़ पर लगाई अंतरिम रोक

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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पट्टा देने के पुराने फैसले में बदलाव पर सवाल; निगम की व्यावसायिक योजना पर भी उठे प्रश्न
बिलासपुर, 17 अप्रैल। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने लिंगियाडीह बस्ती के 36 रहवासियों को बड़ी राहत देते हुए उनके घरों और कब्जों को तोड़ने पर अंतरिम रोक लगा दी है। जस्टिस एन.के. चंद्रवंशी की एकल पीठ ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद मामले को विस्तृत सुनवाई योग्य मानते हुए यह आदेश दिया।
2019-20 सर्वे में पात्र, 2022 में जमा कर चुके प्रीमियम
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, वे वर्ष 2019-20 के सर्वे में राजीव गांधी आश्रय योजना के तहत पात्र पाए गए थे। योजना के अनुसार कब्जे वाली जमीन पर ही पट्टा देने का निर्णय लिया गया था। इसके तहत वर्ष 2022 में संबंधित रहवासियों ने प्रीमियम राशि भी जमा कर दी थी।
2024 में बदली स्थिति, निगम ने बनाई नई योजना
मामले में बताया गया कि वर्ष 2024 में राज्य सरकार ने पूर्व निर्णय को लागू नहीं किया। इसके बाद नगर निगम बिलासपुर ने उस जमीन पर व्यावसायिक परिसर और गार्डन विकसित करने की योजना प्रस्तावित की।
कोर्ट में उठे सवाल: पैसा लेने के बाद पट्टा क्यों नहीं
सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रवंशी ने राज्य सरकार की ओर से उपस्थित अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रवीण दास और निगम के अधिवक्ता रणवीर सिंह मरहास से पूछा कि योजना के तहत राशि लेने के बाद भी पट्टा क्यों नहीं दिया गया।
सरकारी पक्ष ने जवाब में बताया कि वर्ष 2023 में शासकीय जमीन पर पट्टा देने के नियम बदल गए हैं, जिसके चलते अब इन व्यक्तियों को उसी स्थान पर पट्टा नहीं दिया जा सकता। इसके बदले प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत खमतराई क्षेत्र में फ्लैट देने का प्रस्ताव है। साथ ही यह भी कहा गया कि राजीव गांधी आश्रय योजना को समाप्त कर दिया गया है।
सरकारी वकीलों ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित भूमि पर कुछ लोगों द्वारा बाजार व दुकानें संचालित की जा रही हैं।
याचिकाकर्ताओं का पक्ष: नियम बदलने से अधिकार प्रभावित नहीं
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव, अनिमेष वर्मा और आशीष बैक ने दलील दी कि वे 2019-20 की योजना में पहले ही पात्र घोषित हो चुके थे और 2022 में प्रीमियम जमा कर चुके हैं। ऐसे में 2023 के नियमों में बदलाव से उनके अधिकार प्रभावित नहीं होते।
उन्होंने यह भी कहा कि कई दशकों से निवास, योजना में चयन और राशि जमा करने के आधार पर राज्य सरकार और निगम अपने पूर्व वादे से पीछे नहीं हट सकते।
मास्टर प्लान का मुद्दा भी उठा
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि संबंधित क्षेत्र मास्टर प्लान में रिहायशी क्षेत्र के रूप में दर्ज है। ऐसे में वहां व्यावसायिक परिसर विकसित करने का प्रस्ताव नियमों के विपरीत बताया गया।
503 में से 113 जगहों पर प्रस्तावित परियोजना
गौरतलब है कि राजीव गांधी आश्रय योजना में कुल 503 लाभार्थी चयनित हुए थे। इनमें से 113 स्थानों को खाली कराकर वहां व्यावसायिक परिसर और गार्डन विकसित करने की योजना निगम द्वारा बनाई गई है।
अगली सुनवाई जून में संभावित
कोर्ट ने दोनों याचिकाओं में पक्षकारों को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। एक याचिका में नगर निगम का जवाब आ चुका है, जबकि राज्य सरकार का जवाब लंबित है। दूसरी याचिका में सभी पक्षों के जवाब अपेक्षित हैं।
प्रारंभिक सुनवाई के बाद कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद जून माह में संभावित है।

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