मोहम्मद इसराइल, बिलासपुर।
बिलासपुर में अवैध रेत उत्खनन को लेकर सियासी तापमान अचानक उफान पर है। भारतीय जनता पार्टी के जिला ग्रामीण अध्यक्ष मोहित जायसवाल ने सीधे जिला प्रशासन और खनिज विभाग पर गंभीर आरोप जड़ते हुए पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा कर दिया है। आरोप है कि छोटे वाहनों पर कार्रवाई का दिखावा कर बड़े रसूखदार खनिज माफिया को खुली छूट दी जा रही है—और यह सब उसी सरकार में हो रहा है, जिसकी पार्टी खुद सत्ता में है।
कलेक्ट्रेट में खुला मोर्चा, सिस्टम पर सीधा हमला
बुधवार को बिलासपुर कलेक्ट्रेट में मीडिया से चर्चा करते हुए भाजपा जिला ग्रामीण अध्यक्ष मोहित जायसवाल ने तीखे शब्दों में कहा कि कोटा–बेलगहना क्षेत्र में अवैध उत्खनन खुलेआम जारी है, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि:
खनिज विभाग केवल ट्रैक्टरों पर कार्रवाई कर “औपचारिकता” निभा रहा है
जबकि बड़े पैमाने पर पोकलेन मशीनों से अरपा नदी और अन्य स्थानों पर रेत का अवैध उत्खनन जारी है
रसूखदार लोगों को संरक्षण देकर प्रशासन “चयनात्मक कार्रवाई” कर रहा है
“छोटों पर कार्रवाई, बड़े माफिया बेखौफ”
मोहित जायसवाल ने सीधे तौर पर कहा कि:
“छोटे ट्रैक्टर चालकों को पकड़कर खानापूर्ति की जा रही है, जबकि बड़े-बड़े पोकलेन से अवैध उत्खनन करने वाले माफिया पर कोई हाथ नहीं डाल रहा।”
यह बयान प्रशासनिक कार्रवाई की निष्पक्षता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है—क्या वाकई कार्रवाई केवल कमजोर कड़ी तक सीमित है?
अरपा नदी पर अवैध उत्खनन का आरोप
भाजपा नेता ने खास तौर पर अरपा नदी का जिक्र करते हुए कहा कि:
नदी से बड़े स्तर पर रेत निकासी हो रही है
परिवहन भी बिना रोक-टोक जारी है
स्थानीय स्तर पर शिकायतें लगातार मिल रही हैं
यह मामला पर्यावरणीय नुकसान और राजस्व हानि—दोनों दृष्टि से गंभीर माना जा रहा है।
“ऊपर तक शिकायत, मिला सिर्फ आश्वासन”
मोहित जायसवाल ने बताया कि इस पूरे मामले की शिकायत जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से की जा चुकी है।
अधिकारियों ने जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया है
लेकिन जमीनी स्तर पर अब तक कोई ठोस बदलाव नजर नहीं आया
यहां सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या शिकायतों के बाद भी सिस्टम निष्क्रिय बना हुआ है?
अपनी ही सरकार पर BJP नेता का तीखा संदेश
सबसे अहम बात यह रही कि भाजपा नेता ने अपनी ही सरकार के संदर्भ में सख्त लहजा अपनाते हुए कहा:
“भाजपा सरकार में यह सब नहीं चलेगा।”
यह बयान राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि:
यह अंदरूनी असंतोष की ओर इशारा करता है
साथ ही प्रशासनिक कार्यशैली पर पार्टी के भीतर से ही सवाल उठाता है
खनिज विभाग पर “मिलिभगत” के संकेत?
बयान में बार-बार यह बात सामने आई कि:
बड़े स्तर पर अवैध उत्खनन बिना “संरक्षण” के संभव नहीं
कार्रवाई का पैटर्न असंतुलित नजर आ रहा है
इससे विभागीय भूमिका पर संदेह गहराता है
हालांकि, इस संबंध में खनिज विभाग या जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
बड़ा सवाल: कार्रवाई होगी या मामला ठंडा पड़ेगा?
पूरे घटनाक्रम के बाद अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिक गई हैं—
क्या बड़े माफिया के खिलाफ कार्रवाई होगी?
या फिर यह मामला भी सिर्फ बयानबाजी तक सीमित रह जाएगा?
क्या जांच में बड़े नाम सामने आएंगे?
फिलहाल, बिलासपुर में अवैध खनन को लेकर सियासत और प्रशासन आमने-सामने नजर आ रहे हैं—और यह टकराव आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है।

