
रायपुर/दुर्ग, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में खतरनाक पशु रोग African Swine Fever (ASF) का बड़ा प्रकोप सामने आया है। दुर्ग जिले के नारधा-मुडपार गांव स्थित एक बड़े सूअर फार्म में इस जानलेवा वायरस की पुष्टि होने के बाद 300 से अधिक सूअरों की मौत हो गई, जबकि संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए प्रशासन ने करीब 150 अन्य सूअरों को भी मारने का फैसला लिया। इस घटना ने न केवल स्थानीय स्तर पर हड़कंप मचा दिया है, बल्कि राज्य के पशुपालन तंत्र और पोर्क सप्लाई चेन पर भी गंभीर असर की आशंका पैदा कर दी है।
अचानक बिगड़ी हालत, तेजी से हुई मौतें
जानकारी के मुताबिक, फार्म में बीते कुछ दिनों से सूअरों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी थी। शुरू में सामान्य बीमारी समझकर उपचार किया गया, लेकिन कुछ ही घंटों में कई सूअर मरने लगे। मौतों की संख्या तेजी से बढ़ने पर पशुपालन विभाग को सूचना दी गई।
विशेषज्ञ टीम ने मौके पर पहुंचकर सैंपल जांच किए, जिसमें African Swine Fever की पुष्टि हुई। यह एक अत्यंत संक्रामक वायरल बीमारी है, जिसमें सूअरों की मृत्यु दर 90-100% तक हो सकती है।
संक्रमण रोकने के लिए ‘कुलिंग ऑपरेशन’
संक्रमण के तेजी से फैलने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने तत्काल ‘कुलिंग ऑपरेशन’ शुरू किया।
फार्म में बचे हुए लगभग 150 सूअरों को भी खत्म किया गया
मेडिकल टीम ने पीपीई किट पहनकर प्रोटोकॉल के तहत जहरीले इंजेक्शन दिए
सभी मृत सूअरों को वैज्ञानिक तरीके से गड्ढे खोदकर दफनाया गया
इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी पशुपालन विभाग और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने की।
1.20 करोड़ का आर्थिक झटका
प्रारंभिक आकलन के अनुसार इस प्रकोप से करीब 1 करोड़ 20 लाख रुपए का नुकसान हुआ है।
मृत सूअरों की संख्या 300+
जबरन मारे गए सूअर: ~150
फार्म पूरी तरह प्रभावित
यह नुकसान न केवल एक फार्म तक सीमित है, बल्कि इससे जुड़े सप्लाई नेटवर्क, व्यापारियों और स्थानीय रोजगार पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
फार्म सील, आसपास के इलाकों में हाई अलर्ट
संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं:
पूरे फार्म को सील करने की प्रक्रिया शुरू
आसपास के गांवों और फार्मों में सर्वे और निगरानी बढ़ाई गई
अन्य सूअर फार्मों की जांच के निर्देश
पशु परिवहन और बिक्री पर निगरानी
पशुपालन विभाग ने क्षेत्र को संवेदनशील घोषित करते हुए विशेष निगरानी टीमों को तैनात किया है।
मुडपार: राज्य का प्रमुख पोर्क हब प्रभावित
दुर्ग का मुडपार गांव लंबे समय से सूअर पालन का प्रमुख केंद्र रहा है।
यहां बड़े पैमाने पर सूअर उत्पादन होता है
दुर्ग-भिलाई सहित अन्य जिलों और राज्यों तक सप्लाई
स्थानीय अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा इसी व्यवसाय पर निर्भर
ऐसे में इस प्रकोप का असर राज्य से बाहर तक पोर्क सप्लाई चेन पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
क्या है African Swine Fever (ASF)?
यह सूअरों में फैलने वाला एक घातक वायरल रोग है
इसका कोई वैक्सीन या प्रभावी इलाज उपलब्ध नहीं
संक्रमित जानवरों के संपर्क, संक्रमित चारा या उपकरण से फैलता है
इंसानों में संक्रमण का खतरा नहीं, लेकिन पशुधन के लिए बेहद विनाशकारी
देश में पहले भी सामने आ चुके हैं मामले
भारत के कई राज्यों—विशेष रूप से पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत—में पहले भी African Swine Fever के मामले सामने आ चुके हैं, जहां हजारों सूअरों को मारना पड़ा था। केंद्र और राज्य सरकारें समय-समय पर एडवाइजरी जारी करती रही हैं, लेकिन इस तरह के नए प्रकोप पशुपालन क्षेत्र के लिए चुनौती बने हुए हैं।
बर्ड फ्लू के बीच नई चुनौती
हाल के दिनों में Bird Flu (एवियन इन्फ्लुएंजा) के मामलों के बीच ASF का यह प्रकोप सामने आना पशुजनित बीमारियों के बढ़ते खतरे की ओर संकेत करता है।
पोल्ट्री सेक्टर पहले से दबाव में
अब पोर्क इंडस्ट्री पर भी संकट
पशुपालन आधारित अर्थव्यवस्था पर दोहरा असर
निगरानी, सैंपलिंग और कंटेनमेंट पर फोकस
वर्तमान स्थिति में प्रशासन और विभाग की प्राथमिकता:
संक्रमण को सीमित क्षेत्र तक रोकना
सैंपलिंग और ट्रेसिंग
अन्य संभावित हॉटस्पॉट की पहचान
पशुपालकों को सतर्क करना
यह पूरा घटनाक्रम छत्तीसगढ़ में पशुपालन क्षेत्र के लिए एक बड़ी चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है, जहां एक ही फार्म से शुरू हुआ संक्रमण व्यापक असर डालने की क्षमता रखता है।
बिलासपुर में स्वाइन फ्लू को लेकर राहत की खबर, स्वास्थ्य विभाग सतर्क
बिलासपुर, छत्तीसगढ़। जिले में स्वाइन फ्लू को लेकर फिलहाल कोई मामला सामने नहीं आया है। जिला संक्रामक रोग निवारण अधिकारी डॉ. प्रमोद तिवारी ने स्पष्ट किया है कि अभी तक बिलासपुर जिले में स्वाइन फ्लू से संबंधित किसी भी प्रकार की पुष्टि या संदिग्ध रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है।
उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क है और लगातार निगरानी रखी जा रही है। किसी भी संभावित संक्रमण की स्थिति से निपटने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पहले से ही सुनिश्चित की गई हैं। अस्पतालों को अलर्ट मोड पर रखा गया है और चिकित्सकीय स्टाफ को दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
डॉ. तिवारी ने नागरिकों से अपील की है कि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्कता बरतना जरूरी है। सर्दी-खांसी या बुखार जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं और डॉक्टर की सलाह का पालन करें।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और किसी भी तरह की अफवाहों से बचने की आवश्यकता है।

