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छत्तीसगढ़ के 21 जिलों में सरकारी योजनाओं की पोल खुली: राशन, मिड-डे मील से लेकर छात्रावास तक लापरवाही उजागर, खाद्य आयोग सख्त

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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रायपुर, 1 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। राज्य खाद्य आयोग के निरीक्षण में 21 जिलों में व्यापक स्तर पर खामियां सामने आई हैं, जिसमें उचित मूल्य दुकानों से लेकर आंगनबाड़ी केंद्रों, मध्यान्ह भोजन योजना और आश्रम-छात्रावासों तक की व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है।
नवा रायपुर स्थित कार्यालय में आयोग के अध्यक्ष संदीप शर्मा की अध्यक्षता में हुई अंतरविभागीय समीक्षा बैठक में खाद्य, महिला एवं बाल विकास, स्कूल शिक्षा और आदिम जाति एवं अनुसूचित जनजाति विभाग के अधिकारियों के साथ इन गड़बड़ियों पर गंभीर चर्चा की गई।
निरीक्षण के दौरान सबसे बड़ी चिंता बालक छात्रावासों में सामने आई, जहां भोजन की गुणवत्ता और सामग्री आपूर्ति में स्पष्ट कमी पाई गई। इसके विपरीत कन्या छात्रावासों की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर बताई गई, जिससे व्यवस्थाओं में असंतुलन उजागर हुआ।
21 जिलों से निरीक्षण के बाद मांगे गए पालन प्रतिवेदन समय पर प्रस्तुत नहीं किए जाने पर बैठक में नाराजगी जाहिर की गई। आयोग ने इस लापरवाही को गंभीर मानते हुए संबंधित अधिकारियों को शीघ्र रिपोर्ट देने के निर्देश दिए।
आंगनबाड़ी केंद्रों में भी गड़बड़ियां सामने आईं, जहां बच्चों की उपस्थिति ‘पोषण ट्रैकर’ में सही दर्ज नहीं होने की बात सामने आई। आयोग ने इसे जमीनी हकीकत से जोड़कर जांचने और आकस्मिक निरीक्षण के जरिए मिलान करने को कहा।
उचित मूल्य दुकानों में अनियमितता का मामला भी गंभीर रूप से उभरा। कई दुकानों के नियमित रूप से नहीं खुलने, आवश्यक सूचनाएं प्रदर्शित नहीं करने और स्टॉक में गड़बड़ी पाए जाने जैसी शिकायतें सामने आईं। इन मामलों में संचालकों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
मध्यान्ह भोजन योजना के तहत संचालित दो केंद्रीकृत किचनों की व्यवस्था हालांकि संतोषजनक पाई गई, लेकिन इसके बावजूद आयोग ने इन किचनों से अधिक स्कूलों को जोड़ने की अनुशंसा की है, जिससे मौजूदा व्यवस्थाओं की सीमाएं भी सामने आईं।
छात्रावासों और स्कूलों में भोजन की गुणवत्ता पर निगरानी को लेकर भी सवाल उठे, जिसके बाद आयोग ने किसी छात्र को ‘मेस प्रभारी’ बनाने का सुझाव रखा। साथ ही सभी संस्थानों में चावल, दाल, सब्जी और खाद्य तेल की निर्धारित मात्रा का स्पष्ट प्रदर्शन और उसका पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में आयोग के सदस्य राजेंद्र महिलांग, कुलदीप शर्मा और सदस्य सचिव राजीव कुमार जायसवाल सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे, जहां विभिन्न स्तरों पर सामने आई खामियों ने योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

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