बिलासपुर। इंसान की सबसे बड़ी पहचान उसका किया हुआ अच्छा काम होता है। सरकंडा निवासी लक्ष्मण दास कारड़ा ने अपने जीवन के बाद भी मानवता की ऐसी मिसाल पेश की, जिससे दो लोगों की जिंदगी में रोशनी लौट आई। उनके निधन के बाद परिजनों ने आगे बढ़कर नेत्रदान का निर्णय लिया और इस प्रेरणादायक पहल से दो जरूरतमंदों को नई नेत्रज्योति मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ।
बताया गया कि बुधवार को लक्ष्मण दास कारड़ा का निधन हो गया। इस दुख की घड़ी में भी परिवार ने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए नेत्रदान का फैसला किया। उनके भाई हरगुन कारड़ा, संतोष कारड़ा, सुनील कारड़ा तथा पुत्र अशोक कारड़ा, चेतन कारड़ा और राहुल कारड़ा ने इस मानवीय कार्य के लिए तुरंत हैंड्स ग्रुप से संपर्क किया।
सूचना मिलते ही हैंड्स ग्रुप के अध्यक्ष अविनाश आहूजा अपने साथियों के साथ सक्रिय हुए। इसके बाद सिम्स (CIMS) से जुड़े नेत्रदान सलाहकार धर्मेंद्र देवांगन तथा डॉक्टरों की टीम मौके पर पहुंची। टीम में डॉ. अनिकेत कांबले और डॉ. राकेश मसीह भी शामिल थे।
डॉक्टरों की टीम ने सरकंडा स्थित उनके निवास पर पहुंचकर विधिवत प्रक्रिया के तहत नेत्रदान कराया। इस प्रक्रिया के माध्यम से लक्ष्मण दास कारड़ा के दोनों नेत्र सुरक्षित रूप से प्राप्त किए गए, जिन्हें आगे जरूरतमंद मरीजों को प्रत्यारोपित किया जाएगा।
समाज के लिए प्रेरणा बनी पहल
लक्ष्मण दास कारड़ा का यह नेत्रदान केवल एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणादायक संदेश भी है। अक्सर लोग नेत्रदान के महत्व को समझते तो हैं, लेकिन निर्णय लेने में संकोच करते हैं। ऐसे में कारड़ा परिवार ने दुख की घड़ी में भी मानवता को प्राथमिकता देकर समाज के सामने एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत किया है।
नेत्रदान से बदलती है किसी की दुनिया
चिकित्सकों के अनुसार एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो नेत्रहीन लोगों को रोशनी मिल सकती है। इसी उद्देश्य से विभिन्न सामाजिक संगठन और चिकित्सक लगातार लोगों को नेत्रदान के लिए जागरूक करते रहते हैं।
लक्ष्मण दास कारड़ा की यह अंतिम देन दो लोगों के जीवन में उजाला लेकर आएगी और उनका यह मानवीय कार्य लंबे समय तक लोगों को प्रेरित करता रहेगा।

