बिलासपुर। जिले के स्कूल शिक्षा विभाग में शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण (रैशनलाइजेशन) की प्रक्रिया को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। एससी-एसटी, ओबीसी और माइनॉरिटी महासंघ ने तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. अनिल तिवारी पर गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए उनके तत्काल निलंबन और विभागीय जांच की मांग की है। महासंघ का आरोप है कि शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण की पूरी प्रक्रिया में नियमों को दरकिनार किया गया, जिससे सैकड़ों शिक्षक प्रभावित हुए और बड़ी संख्या में मामला न्यायालय तक पहुंच गया।
महासंघ की ओर से प्रदेश मुख्यालय उस्लापुर ओवरब्रिज के पास साईं नगर, अम्बेडकर विहार बिलासपुर से जारी ज्ञापन 13 मार्च 2026 को मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, कलेक्टर बिलासपुर और संयुक्त संचालक शिक्षा विभाग के नाम प्रेषित किया गया है। ज्ञापन कलेक्टर बिलासपुर के माध्यम से भेजा गया है।
महासंघ प्रमुख सुरेश कुमार दिवाकर ने आरोप लगाया है कि स्कूल शिक्षा विभाग की योजना का उद्देश्य दूरस्थ स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित कर शालाओं का सुचारू संचालन करना था, लेकिन बिलासपुर जिले में युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियां की गईं, जिसका खामियाजा आज भी शिक्षकों को भुगतना पड़ रहा है।
वरिष्ठता सूची पर उठे सवाल
ज्ञापन में कहा गया है कि युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के दौरान शिक्षकों की वरिष्ठता सूची का सही मिलान नहीं कराया गया। इसके कारण कई शिक्षकों की वरिष्ठता का क्रम स्पष्ट नहीं हो सका और पूरी प्रक्रिया में अव्यवस्था की स्थिति बन गई। महासंघ का कहना है कि वरिष्ठता सूची में सुधार के लिए भी पर्याप्त समय नहीं दिया गया, जिससे शिक्षक अपने संबंध में जानकारी नहीं जुटा सके।
काउंसलिंग प्रक्रिया पर भी आरोप
महासंघ ने आरोप लगाया है कि युक्तियुक्तकरण के दौरान काउंसलिंग की सूचना देने में भी पर्याप्त समय नहीं दिया गया। देर रात तक काउंसलिंग प्रक्रिया चलाते हुए मनमाने तरीके से आदेश जारी किए गए। आरोप है कि पूरी प्रक्रिया में शासन के निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया और निर्णय मनमाने ढंग से लिए गए।
489 शिक्षकों की प्रक्रिया विवादों में, 165 पहुंचे हाईकोर्ट
ज्ञापन के अनुसार जिले में 489 शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया सही तरीके से नहीं होने के कारण 165 से अधिक शिक्षकों को उच्च न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। महासंघ का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में मामले अदालत तक पहुंचना अपने आप में प्रक्रिया की खामियों को दर्शाता है। इससे शासन और शिक्षकों दोनों का समय तथा धन खर्च हुआ।
260 से ज्यादा शिक्षकों ने दर्ज कराई दावा-आपत्ति
महासंघ ने कहा है कि 260 से अधिक शिक्षकों ने दावा-आपत्ति दर्ज कराई, लेकिन उन पर समुचित संज्ञान नहीं लिया गया। आरोप है कि कई मामलों में दावा-आपत्तियों को मनमाने ढंग से मान्य और अमान्य किया गया। इसके कारण कई शिक्षक आज भी न्याय के लिए भटक रहे हैं।
निष्पक्ष प्रक्रिया दोबारा कराने की मांग
महासंघ ने ज्ञापन में कहा है कि तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. अनिल तिवारी इस पूरी प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार हैं। इसलिए उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करते हुए युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया को दोबारा निष्पक्ष तरीके से कराने की मांग की गई है।
निलंबन और विभागीय जांच की मांग
महासंघ ने मांग की है कि शिक्षकों के साथ कथित अन्याय को देखते हुए डॉ. अनिल तिवारी को तत्काल निलंबित किया जाए और उनके खिलाफ विभागीय जांच कराकर सेवा से बर्खास्त करने तक की कार्रवाई की जाए।
महासंघ पदाधिकारियों का उल्लेख
ज्ञापन एससी-एसटी, ओबीसी एवं माइनॉरिटी महासंघ छत्तीसगढ़ की ओर से भेजा गया है।
महासंघ प्रमुख सुरेश कुमार दिवाकर ने हस्ताक्षर कर कार्रवाई की मांग की है।
महासंघ संरक्षकों में
सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश टी.आर. बर्मन
सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश एन.डी. एक्का
सह संरक्षक के रूप में प्रभाकर ग्वाल (सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश) का नाम शामिल है।
महासंघ के अन्य पदाधिकारियों में
प्रदेशाध्यक्ष राजीव ध्रुव (एम.टी. प्रकोष्ठ)
प्रदेश प्रवक्ता व संयोजक डॉ. सी.डी. जांगड़े
महिला प्रकोष्ठ प्रदेशाध्यक्ष डॉ. श्यामलता साहू
प्रदेश संयोजक वृजेश साहू
महिला प्रकोष्ठ से जमुनावनी वंजने
का भी उल्लेख किया गया है।

