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एवरेस्ट फतह कर लौटीं अमिता श्रीवास का बिलासपुर में ऐतिहासिक स्वागत, स्टेशन पर उमड़ा जनसैलाब

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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विश्व की सबसे ऊंची चोटी पर फहराया तिरंगा; बीमारी और रेस्क्यू के बाद सकुशल लौटीं, समाज ने शाल-श्रीफल और पुष्पवर्षा से किया सम्मान

बिलासपुर। विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (8848.86 मीटर) पर तिरंगा फहराकर देश और छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करने वाली अंतर्राष्ट्रीय पर्वतारोही अमिता श्रीवास के बिलासपुर आगमन पर रेलवे स्टेशन में भव्य स्वागत किया गया। जैसे ही विशाखापट्टनम-कोरबा लिंक एक्सप्रेस प्लेटफॉर्म पर पहुंची, बड़ी संख्या में मौजूद सामाजिक जनों और शुभचिंतकों ने फूल-मालाओं, पुष्पगुच्छ, शाल और श्रीफल से उनका अभिनंदन किया।

स्टेशन परिसर में उत्साह का माहौल देखने को मिला। ढोल-नगाड़ों और जयघोष के बीच लोगों ने अमिता श्रीवास की ऐतिहासिक उपलब्धि पर गर्व जताया। समाज के लोगों ने इसे केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ और देश के सम्मान से जुड़ी उपलब्धि बताया।

8 साल की तपस्या के बाद मिला एवरेस्ट विजय का गौरव

अमिता श्रीवास पिछले आठ वर्षों से माउंट एवरेस्ट फतह करने के लक्ष्य को लेकर लगातार तैयारी कर रही थीं। कठिन प्रशिक्षण, चुनौतियों और संघर्षों के बाद उन्होंने 22 मई 2026 को विश्व की सबसे ऊंची चोटी पर पहुंचकर तिरंगा फहराया और अपने सपने को साकार किया।

पर्वतारोहण के क्षेत्र में यह उनकी पहली बड़ी उपलब्धि नहीं है। इससे पहले भी वे विश्व की कई प्रमुख चोटियों पर सफलता हासिल कर चुकी हैं। इनमें अफ्रीका महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी Mount Kilimanjaro भी शामिल है, जिसकी ऊंचाई 5895 मीटर है।

एवरेस्ट फतह के बाद बिगड़ी थी तबीयत, अस्पताल में कराया गया था भर्ती

एवरेस्ट अभियान के दौरान सफलता हासिल करने के बाद अमिता श्रीवास की तबीयत अचानक खराब हो गई थी। पर्वतारोहण दल ने तत्काल रेस्क्यू अभियान चलाते हुए उन्हें सुरक्षित नीचे उतारा और नेपाल के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया।

परिवार और शुभचिंतकों की चिंता के बीच उपचार के बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ और वे पूरी तरह स्वस्थ होकर भारत लौटीं। यही कारण रहा कि बिलासपुर आगमन पर उनके स्वागत को लेकर समाज के लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिला।

स्टेशन पर सम्मान समारोह का माहौल

बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर आयोजित स्वागत कार्यक्रम में समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में युवाओं ने हिस्सा लिया। अमिता श्रीवास को फूल-मालाएं पहनाई गईं, शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया और उनकी उपलब्धि पर शुभकामनाएं दी गईं।

कार्यक्रम में संभागीय अध्यक्ष सुरेंद्र श्रीवास, संभागीय सचिव चंद्रमणि श्रीवास, संभागीय कोषाध्यक्ष संतोष श्रीवास, पूर्व लोको पायलट रामकुमार श्रीवास, पूर्व प्रधान पाठक राजेंद्र श्रीवास, सलाहकार मनोहर श्रीवास, व्याख्याता प्रमोद श्रीवास, युवा प्रकोष्ठ अध्यक्ष नरेंद्र श्रीवास, जिला अध्यक्ष नारायण श्रीवास, अनिल श्रीवास, शुभम श्रीवास, निखिल श्रीवास, राजेश श्रीवास, राकेश श्रीवास, कमलेश श्रीवास, संतोष श्रीवास, रमेश श्रीवास, आभाष श्रीवास, प्रकाश श्रीवास सहित बड़ी संख्या में सामाजिक जन उपस्थित रहे।

युवाओं के लिए बनीं प्रेरणा

अमिता श्रीवास की उपलब्धि को समाज के लोगों ने नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक बताया। उनका कहना था कि सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद लक्ष्य के प्रति समर्पण, आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास से विश्व स्तर पर सफलता प्राप्त की जा सकती है।

बिलासपुर में उनके स्वागत के दौरान बार-बार यही संदेश सुनाई दिया कि अमिता श्रीवास ने न केवल एवरेस्ट की ऊंचाइयों को छुआ है, बल्कि छत्तीसगढ़ की बेटियों के सपनों को भी नई उड़ान दी है।

एक नजर में

  • 22 मई 2026 को माउंट एवरेस्ट पर फहराया तिरंगा।
  • 8 वर्षों की तैयारी के बाद हासिल की ऐतिहासिक सफलता।
  • एवरेस्ट विजय के बाद तबीयत बिगड़ने पर नेपाल में कराया गया था उपचार।
  • स्वस्थ होकर लौटीं भारत, बिलासपुर स्टेशन पर हुआ भव्य स्वागत।
  • समाज के लोगों ने शाल, श्रीफल और पुष्पगुच्छ भेंट कर किया सम्मान।
  • इससे पहले अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी किलिमंजारो भी कर चुकी हैं फतह।
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