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ट्रिपल इंजन पर भारी पड़ा गफ्फार फैमिली का भरोसा, तारबाहर में कांग्रेस के शेख आजम 1062 वोट से जीते, भाजपा की करारी हार

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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भाजपा की पूरी ताकत भी नहीं बदल सकी वार्ड-29 संजय गांधी नगर का मिजाज; तीसरी बार हारे मधुसूदन राव, जीत के बाद कांग्रेस में जश्न

बिलासपुर। नगर निगम के वार्ड क्रमांक-29 संजय गांधी नगर तारबाहर उपचुनाव में कांग्रेस ने एक बार फिर अपना राजनीतिक वर्चस्व साबित कर दिया। कांग्रेस प्रत्याशी शेख आजम ने भाजपा उम्मीदवार वी. मधुसूदन राव को 1062 वोटों के बड़े अंतर से पराजित कर जीत दर्ज की। परिणाम के साथ ही यह स्पष्ट हो गया कि संजय गांधी नगर में कांग्रेस की पकड़ अब भी मजबूत बनी हुई है और स्वर्गीय शेख गफ्फार की राजनीतिक विरासत का असर मतदाताओं के बीच कायम है।

चुनाव को भाजपा और कांग्रेस दोनों ने प्रतिष्ठा का विषय बनाया था। भाजपा की ओर से नगर सरकार, प्रदेश सरकार और संगठन के कई बड़े चेहरे मैदान में उतरे थे, जबकि कांग्रेस ने स्थानीय जनसंपर्क, गफ्फार परिवार की छवि और पुराने संगठनात्मक नेटवर्क के भरोसे चुनाव लड़ा। मतगणना पूरी होते ही कांग्रेस खेमे में उत्सव का माहौल बन गया।

नतीजा आते ही ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न, सड़कों पर उतरे कार्यकर्ता

परिणाम घोषित होते ही संजय गांधी नगर और तारबाहर क्षेत्र में कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए। ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाचते-गाते समर्थकों ने मिठाइयां बांटी और आतिशबाजी कर जीत का जश्न मनाया। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इसे जनता के विश्वास की जीत बताया।

शेख आजम को बधाई देने के लिए समर्थकों का तांता लगा रहा। वार्ड के कई इलाकों में विजय जुलूस भी निकाला गया। जीत के बाद कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए इसे जनता के आशीर्वाद और कांग्रेस की विचारधारा की जीत बताया।

गफ्फार की विरासत बनी सबसे बड़ा फैक्टर

उपचुनाव में स्वर्गीय शेख गफ्फार का नाम लगातार चर्चा में रहा। क्षेत्र में लंबे समय तक सक्रिय राजनीति और जनसंपर्क रखने वाले गफ्फार की छवि का असर चुनाव में दिखाई दिया। कांग्रेस ने प्रचार के दौरान गफ्फार परिवार और जनता के बीच वर्षों पुराने रिश्तों को प्रमुखता से सामने रखा।

स्थानीय स्तर पर यह धारणा भी देखने को मिली कि मतदाताओं ने परिवार के साथ अपने पुराने जुड़ाव और विश्वास को वोट में तब्दील किया। राजनीतिक जानकार भी मानते हैं कि इस चुनाव में गफ्फार फैक्टर कांग्रेस के पक्ष में अहम साबित हुआ।

शेख आजम बोले- यह जीत जनता और पिता के कार्यों का सम्मान

जीत के बाद नवनिर्वाचित पार्षद शेख आजम ने वार्ड की जनता का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह जीत उनकी व्यक्तिगत जीत नहीं बल्कि क्षेत्र के लोगों के विश्वास और उनके पिता द्वारा वर्षों तक किए गए जनसेवा कार्यों का सम्मान है।

उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान लोगों ने जिस तरह समर्थन दिया, वह उनके लिए बड़ी जिम्मेदारी है और वे जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का प्रयास करेंगे।

भाजपा ने झोंकी पूरी ताकत, फिर भी नहीं बचा सकी सीट

वार्ड-29 का उपचुनाव भाजपा के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा था। नगर निगम में भाजपा की सत्ता होने के साथ प्रदेश में भी भाजपा सरकार है। ऐसे में पार्टी ने इस सीट को जीतने के लिए पूरी ताकत लगा दी थी।

महापौर, संगठन के पदाधिकारी और कई वरिष्ठ नेता लगातार प्रचार में सक्रिय रहे। भाजपा ने विकास कार्यों और सरकार की योजनाओं को चुनावी मुद्दा बनाया, लेकिन इसके बावजूद पार्टी मतदाताओं को अपने पक्ष में नहीं कर सकी।

चुनाव परिणाम आने के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी शुरू हो गई कि तमाम संसाधनों और व्यापक प्रचार अभियान के बावजूद भाजपा वार्ड की पारंपरिक राजनीतिक धारा को बदलने में सफल नहीं हो सकी।

मधुसूदन राव की लगातार तीसरी हार चर्चा में

इस चुनाव परिणाम का एक बड़ा राजनीतिक पहलू भाजपा उम्मीदवार वी. मधुसूदन राव की लगातार तीसरी हार भी रही। इससे पहले भी वे चुनावी मैदान में हार का सामना कर चुके हैं।

राजनीतिक हलकों में अब इस बात पर चर्चा शुरू हो गई है कि लगातार हार के बावजूद एक ही चेहरे पर भरोसा करने की रणनीति कितनी प्रभावी रही। हालांकि भाजपा की ओर से अभी तक परिणाम को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

कांग्रेस अध्यक्ष बोले- यह सेवा, संघर्ष और समर्पण की जीत

कांग्रेस शहर अध्यक्ष सुधांशु मिश्रा ने जीत को संगठन और कार्यकर्ताओं की मेहनत का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं ने लगातार वार्ड में काम किया और लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को उठाया।

उन्होंने कहा कि मतदाताओं ने जनसरोकारों और स्थानीय मुद्दों को प्राथमिकता देते हुए कांग्रेस के पक्ष में मतदान किया है। यह जीत कार्यकर्ताओं के समर्पण और जनता के विश्वास का परिणाम है।

सिर्फ एक सीट नहीं, राजनीतिक संदेश भी

वार्ड-29 का परिणाम केवल एक पार्षद सीट का नतीजा नहीं माना जा रहा। राजनीतिक विश्लेषक इसे शहर की राजनीति के व्यापक संदर्भ में भी देख रहे हैं। भाजपा की सत्ता के बावजूद कांग्रेस का यह प्रदर्शन विपक्ष के लिए उत्साहजनक माना जा रहा है।

संजय गांधी नगर ने एक बार फिर यह दिखाया कि स्थानीय राजनीति में व्यक्तिगत संपर्क, सामाजिक रिश्ते, क्षेत्रीय उपस्थिति और वर्षों की राजनीतिक विरासत अब भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

उपचुनाव के नतीजे ने कांग्रेस को जहां नई ऊर्जा दी है, वहीं भाजपा के सामने संगठनात्मक और राजनीतिक स्तर पर कई सवाल भी छोड़ दिए हैं।

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