Latest news

पत्रवार्ता में अकेली गरजीं हेमा , मंच पर खामोशी…महिला कांग्रेस की मौजूदगी पर आवाज़ गायब

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
4 Min Read


“प्रधानमंत्री से मुख्यमंत्री तक झूठ बोल रहे” — महिला आरक्षण पर भाजपा पर तीखा हमला
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवालों की बौछार, लेकिन अपने ही खेमे में सन्नाटा चर्चा में
बिलासपुर। राजनांदगांव की पूर्व महापौर हेमा देशमुख की जिलास्तरीय पत्रकारवार्ता में जहां भाजपा पर तीखे राजनीतिक हमले केंद्र में रहे, वहीं मंच और हॉल के भीतर का एक अलग ही दृश्य चर्चा का विषय बन गया। महिला कांग्रेस की पदाधिकारी तो बड़ी संख्या में मौजूद रहीं, लेकिन कॉन्फ्रेंस प्रभारी को छोड़ अधिकांश पदाधिकारी पूरे समय खामोश नजर आईं। सवालों और आरोपों के बीच यह सन्नाटा खुद कांग्रेस की आंतरिक स्थिति पर भी सवाल खड़े करता रहा।
भाजपा पर सीधा आरोप—‘महिला आरक्षण पर फैलाया जा रहा भ्रम’
पत्रवार्ता में हेमा देशमुख ने भाजपा पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि
“प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक झूठ बोल रहे हैं। महिला आरक्षण को लेकर देश में जानबूझकर भ्रम फैलाया जा रहा है।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि
नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 (128वां संविधान संशोधन) संसद के दोनों सदनों से पारित होकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद कानून बन चुका है।
इसके बावजूद इसे लागू नहीं किया जाना भाजपा की मंशा पर सवाल खड़ा करता है।
“लागू क्यों नहीं कर रही सरकार?”—कांग्रेस का बड़ा सवाल
देशमुख ने सवाल उठाया कि जब कानून बन चुका है तो
👉 तुरंत 33% आरक्षण लागू क्यों नहीं किया जा रहा?
👉 परिसीमन का इंतजार क्यों?
उन्होंने कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल बिना परिसीमन के भी मौजूदा सीटों में आरक्षण लागू करने के पक्ष में हैं।
131वां संशोधन बिल पर भी घेरा
16 अप्रैल 2026 को पेश किए गए 131वें संविधान संशोधन विधेयक पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि
यह महिला आरक्षण से ज्यादा परिसीमन का एजेंडा था
लोकसभा सीटें 850 करने का प्रस्ताव था
राज्यों में 815 और केंद्र शासित प्रदेशों में 35 सीटों का प्रावधान रखा गया था
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा महिला आरक्षण को “मुखौटा” बनाकर राजनीतिक गणित साधना चाहती थी, जिसे विपक्ष की एकजुटता ने विफल कर दिया।
जनगणना और परिसीमन पर भी उठाए सवाल
देशमुख ने कहा कि जब
नई जनगणना शुरू हो रही है
जाति जनगणना की भी बात हो रही है
तो फिर 2011 के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन कराने की जल्दबाजी क्यों?
कांग्रेस का दावा—महिला आरक्षण की असली पहल हमारी
पत्रवार्ता में कांग्रेस की भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा—
राजीव गांधी ने 1989 में पंचायतों में महिला आरक्षण की पहल की
पीवी नरसिम्हा राव सरकार में 1993 में यह कानून बना
डॉ. मनमोहन सिंह ने संसद और विधानसभाओं में आरक्षण का विधेयक पेश किया
आज देशभर में 15 लाख से ज्यादा महिला जनप्रतिनिधि कांग्रेस की नीतियों का परिणाम हैं।
राजनीतिक हमले के बीच ‘खामोशी’ भी बनी खबर
जहां एक ओर मंच से भाजपा पर तीखे आरोप लगाए जा रहे थे, वहीं दूसरी ओर
महिला कांग्रेस की कई पदाधिकारी पूरे समय चुप रहीं
किसी ने सक्रिय हस्तक्षेप या समर्थन में आवाज़ नहीं उठाई
इस स्थिति ने कार्यक्रम के राजनीतिक प्रभाव को सीमित कर दिया और यह सवाल छोड़ गया कि
क्या कांग्रेस के भीतर ही समन्वय और सक्रियता की कमी है
सवाल भाजपा पर, लेकिन तस्वीर कांग्रेस की भी
इस पत्रकारवार्ता में भाजपा की नीतियों पर तीखा हमला जरूर हुआ, लेकिन
मंच के बाहर और भीतर का विरोधाभास
नेताओं की आक्रामकता बनाम कार्यकर्ताओं की खामोशी
पूरे आयोजन की सबसे बड़ी राजनीतिक कहानी बनकर उभरी।
महिला आरक्षण जैसे बड़े मुद्दे पर सियासत गरम है, लेकिन जमीनी सक्रियता और संगठनात्मक ऊर्जा—दोनों ही पक्षों के लिए अब बड़ी चुनौती बनती दिख रही है।

खबर को शेयर करने के लिए क्लिक करे।।