बिलासपुर। भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा द्वारा रविवार को आयोजित जिला स्तरीय जन आक्रोश महिला सम्मेलन राजनीतिक संदेश देने से ज्यादा संगठन की जमीनी हकीकत उजागर करता नजर आया। नारी शक्ति वंदन अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन के मुद्दे पर बुलाए गए इस सम्मेलन में मंच तो सजा, पदाधिकारी भी पहुंचे, लेकिन कार्यकर्ताओं की गैरमौजूदगी ने पूरे आयोजन की धार को कमजोर कर दिया।

दोपहर 12 बजे भाजपा कार्यालय में शुरू हुए इस सम्मेलन में शुरुआत से ही कुर्सियों की खाली कतारें चर्चा का विषय बनी रहीं। हाल के भीतर आधे से ज्यादा सीटें खाली नजर आईं, जिससे यह सवाल उठने लगे कि जिस मुद्दे पर “जन आक्रोश” दिखाने का दावा किया जा रहा था, क्या वह जमीनी स्तर पर उतना प्रभावी नहीं है? इस दौरान प्रमुख रूप से मेयर पूजा विधानी, स्नेह लता शर्मा, और विभा राव, गायत्री साहू सुमित अन्य पदाधिकारी शामिल थीं।
मंच से ही झलकी असहजता
कार्यक्रम के दौरान स्थिति इतनी स्पष्ट थी कि मंच पर मौजूद नेताओं के लिए इसे नजरअंदाज करना मुश्किल हो गया। संबोधन के दौरान मेयर पूजा विधानी ने भी कम उपस्थिति पर हैरानी जताई। उनके चेहरे और शब्दों में झलकती असहजता ने यह संकेत दे दिया कि संगठन के भीतर भी इस प्रतिक्रिया को लेकर संतोष नहीं है।
आह्वान बड़ा, भीड़ छोटी
महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष स्नेहलता शर्मा ने पहले ही सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से बड़ी संख्या में पहुंचने का आग्रह किया था। लेकिन जमीनी हकीकत इस अपील के उलट दिखी। कार्यक्रम में गिने-चुने कार्यकर्ता ही नजर आए, जबकि अपेक्षा एक बड़े जनसमूह की थी।
राजनीतिक संदेश या संगठनात्मक चुनौती?
इस पूरे आयोजन ने भाजपा महिला मोर्चा की सक्रियता और नेटवर्क पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी मुद्दे पर “आक्रोश” तभी प्रभावी होता है जब जमीनी स्तर पर उसकी गूंज दिखाई दे। यहां स्थिति इसके उलट नजर आई।

