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धन्यवाद डिप्टी सीएम साहब साव जी…..?

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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रायपुर को 360 करोड़ के 4 फ्लाईओवर, बिलासपुर को सिर्फ एक—क्या दूसरे बड़े शहर की अनदेखी?

बिलासपुर, रायपुर।



छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में जहां 360 करोड़ से 4 बड़े फ्लाईओवर बनाकर ट्रैफिक सुधारने की तैयारी है, वहीं प्रदेश के दूसरे प्रमुख शहर बिलासपुर को महज एक फ्लाईओवर की सौगात दी गई है—वो भी सीमित बजट में। सवाल उठ रहा है कि क्या विकास अब सिर्फ राजधानी तक सिमट गया है? बिलासपुर जैसे तेजी से बढ़ते शहर के साथ यह असंतुलन क्यों?
रायपुर में मेगा प्लान: 4 फ्लाईओवर, 360 करोड़ का बजट
राजधानी रायपुर में इस साल 4 फ्लाईओवर्स के निर्माण कार्य शुरू होंगे। उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री अरुण साव के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग (PWD) ने कुल 360 करोड़ 35 लाख 93 हजार रुपए की मंजूरी दी है।
इन परियोजनाओं का मकसद शहर के बढ़ते ट्रैफिक को नियंत्रित करना, जाम कम करना और यातायात को तेज व सुव्यवस्थित बनाना है।
किन-किन जगहों पर बनेंगे फ्लाईओवर:
जी.ई. रोड: गुरु तेग बहादुर उद्यान से तेलीबांधा नेताजी सुभाष चौक तक
➤ बजट: 172.86 करोड़
रिंग रोड-2, सोनडोंगरी चौक: ओवरपास
➤ बजट: 43.89 करोड़
वीआईपी रोड, फुंडहर चौक: ओवरपास
➤ बजट: 56.07 करोड़
अटल पथ एक्सप्रेस-वे, फुंडहर: ग्रेड सेपरेटर
➤ बजट: 87.53 करोड़
सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं से राजधानी में ट्रैफिक जाम की समस्या काफी हद तक खत्म होगी।


मंत्री का बयान: “सुगम यातायात हमारी प्राथमिकता”
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा—
“राज्य शासन रायपुर में यातायात को तेज, सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के लिए गंभीरता से काम कर रही है। फ्लाईओवर और सड़कों के चौड़ीकरण से लोगों की आवाजाही आसान होगी।”
लेकिन बड़ा सवाल: बिलासपुर क्यों पीछे?
जहां रायपुर को 4 फ्लाईओवर का बड़ा पैकेज मिला, वहीं बिलासपुर को सिर्फ एक फ्लाईओवर की मंजूरी दी गई है—वह भी राजीव गांधी चौक से महामाया चौक तक।
क्यों उठ रहे हैं सवाल:
बिलासपुर प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा और तेजी से विकसित होता शहर
न्यायधानी होने के कारण वीआईपी मूवमेंट और ट्रैफिक दबाव ज्यादा
औद्योगिक और शैक्षणिक हब के रूप में तेजी से विस्तार
रोजाना हजारों वाहनों का दबाव
इसके बावजूद बजट आवंटन में भारी अंतर ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
एक्सपर्ट नजरिया: “ट्रैफिक लोड के हिसाब से असंतुलन”
शहरी विकास से जुड़े जानकारों का मानना है कि
बिलासपुर में भी कई प्रमुख जंक्शन (तारबाहर, सरकंडा, तेलीपारा) पर फ्लाईओवर की जरूरत
वर्तमान ट्रैफिक लोड को देखते हुए एक फ्लाईओवर पर्याप्त नहीं
भविष्य की प्लानिंग में संतुलन जरूरी
राजनीतिक और जनचर्चा तेज
स्थानीय लोगों और व्यापारिक संगठनों में नाराजगी
सवाल: क्या राजधानी को प्राथमिकता देना विकास का नया पैटर्न बन गया है?
क्या बिलासपुर को “न्यायधानी” का दर्जा सिर्फ नाम तक सीमित?
संतुलित विकास या क्षेत्रीय असमानता?
रायपुर में बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर विकास निश्चित तौर पर स्वागत योग्य है, लेकिन बिलासपुर की तुलना में यह अंतर “संतुलित विकास” की अवधारणा पर सवाल खड़ा करता है।
अब देखना होगा कि सरकार आने वाले समय में बिलासपुर के लिए भी इसी तरह के बड़े प्रोजेक्ट्स की घोषणा करती है या नहीं—क्योंकि सवाल सिर्फ फ्लाईओवर का नहीं, बल्कि क्षेत्रीय संतुलन और न्याय का है।

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