RTE एडमिशन में भारी लापरवाही पर हाईकोर्ट का स्वतः संज्ञान, छुट्टी के दिन भी लगी सुनवाई
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत कक्षा पहली में प्रवेश प्रक्रिया की धीमी रफ्तार को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। गंभीर स्थिति को देखते हुए कोर्ट ने छुट्टी के दिन शनिवार (4 अप्रैल 2026) को विशेष सुनवाई की और मामले में स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) लिया।
दरअसल, एक अखबार में प्रकाशित खबर में खुलासा हुआ था कि राज्य में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत 1 अप्रैल से हो चुकी है, लेकिन RTE के तहत मिलने वाले दाखिलों की प्रक्रिया बेहद धीमी है। इसी को गंभीर मानते हुए कोर्ट ने तत्काल सुनवाई की।
38 हजार आवेदन, 16 हजार अब भी लंबित
कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत जानकारी के अनुसार—
कुल आवेदन: 38,438
सत्यापित आवेदन: 23,766 (62%)
लंबित आवेदन: 16,000 से अधिक
इतना ही नहीं, कई जिलों में तो 10% से भी कम आवेदन की जांच हो पाई है, जिससे पूरी प्रवेश प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
समयसीमा खत्म, फिर भी अधूरी जांच
डायरेक्टोरेट ऑफ पब्लिक इंस्ट्रक्शन (DPI) द्वारा—
रजिस्ट्रेशन और नोडल वेरिफिकेशन की समयसीमा 16 फरवरी से 31 मार्च तय की गई थी
लेकिन तय समय के बाद भी सत्यापन कार्य पूरा नहीं हो सका
कोर्ट ने माना कि नोडल प्रिंसिपल स्तर पर धीमी जांच के कारण पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
लॉटरी प्रक्रिया भी पड़ सकती है प्रभावित
RTE के तहत स्कूल आवंटन के लिए—
13 से 17 अप्रैल के बीच लॉटरी प्रस्तावित है
लेकिन आवेदन सत्यापन अधूरा रहने के कारण इस प्रक्रिया में देरी की आशंका जताई गई है। इससे अभिभावकों को बार-बार स्कूल और कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं।
कोर्ट ने मांगा हलफनामा
कोर्ट ने छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव को निर्देश दिए हैं कि—
प्रकाशित खबरों पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करें
अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी दें
पहले से तय थी सुनवाई, लेकिन पहले बुलाया मामला
यह जनहित याचिका (WPPIL No. 22/2016) पहले से 8 अप्रैल 2026 के लिए सूचीबद्ध थी, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने इसे पहले ही सुन लिया।
अगली सुनवाई 8 अप्रैल को
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने मामले को अगली सुनवाई के लिए 8 अप्रैल 2026 को सूचीबद्ध किया है।
क्या है बड़ा सवाल?
जब सत्र शुरू हो चुका है तो गरीब बच्चों का दाखिला कब होगा?
क्या प्रशासन की लापरवाही से हजारों बच्चों का भविष्य प्रभावित होगा?
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब सबकी नजर सरकार की अगली कार्रवाई पर है।

