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घरेलू हिंसा में बुरी तरह क्षतिग्रस्त चेहरा, सिम्स के दंत रोग विभाग ने जटिल सर्जरी कर बचाई महिला की जान और सूरत

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर। घरेलू हिंसा की शिकार एक 26 वर्षीय महिला (निवासी अनूपपुर, म.प्र.) का चेहरा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाने के बाद छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) के दंत रोग विभाग ने जटिल सर्जरी कर न केवल उसकी जान बचाई, बल्कि विकृत हो चुके चेहरे को भी सफलतापूर्वक पुनर्स्थापित किया।
बताया गया कि बीते दिनों पति द्वारा मारपीट में महिला के चेहरे की हड्डियां बुरी तरह टूट गई थीं। ऊपरी और निचले जबड़े की हड्डियां, बाईं आंख के आसपास की हड्डियां 15-20 टुकड़ों में बिखर गई थीं। चोट इतनी गंभीर थी कि चेहरा पूरी तरह विकृत हो गया था और महिला की जान बचाना भी चुनौती बन गया था।
दंत रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. संदीप प्रकाश के नेतृत्व में टीम ने जांच के बाद ऑपरेशन का निर्णय लिया। आवश्यक रक्त जांच और 3D CT स्कैन के बाद महिला में Panfacial Fracture (B/L NOE Comminuted, Left ZMC Comminuted, B/L Left LF Comminuted, P.S Comminuted) जैसी गंभीर स्थिति पाई गई।
19 मार्च 2026 को करीब 6-7 घंटे चले ऑपरेशन में डॉक्टरों ने चेहरे की बिखरी हड्डियों को पुनः जोड़कर स्थिर किया। सर्जरी के दौरान टूटी हड्डियों को व्यवस्थित करने के लिए चेहरे के अंदरूनी हिस्से में चीरा लगाया गया, ताकि बाहरी हिस्से पर निशान न पड़े।
सिम्स में पहली बार इतनी जटिल सर्जरी “BICORONAL INCISION” तकनीक से की गई, जिसमें सिर के अंदर बालों की रेखा में चीरा लगाकर चेहरे की हड्डियों तक पहुंच बनाई जाती है। इस तकनीक की खासियत यह रही कि चेहरे पर कोई बाहरी टांका या चीरा नहीं लगाया गया, जिससे महिला के चेहरे की सुंदरता बरकरार रखी जा सकी।
डॉक्टरों के अनुसार, इस तरह के मामलों में अक्सर जान बचाना भी मुश्किल होता है, लेकिन समय पर सर्जरी और विशेषज्ञ टीम के प्रयास से महिला को नया जीवन मिला।
इस जटिल ऑपरेशन में दंत चिकित्सा विभाग के डॉ. भूपेंद्र कश्यप के मार्गदर्शन में विभागाध्यक्ष एवं ओरल एंड मैक्सिलो-फेशियल सर्जन डॉ. संदीप प्रकाश के साथ डॉ. जंडेल सिंह ठाकुर, डॉ. केके किन्नर, डॉ. सैमिल राजगामी, डॉ. प्रकाश खरे, डॉ. संजीव पटेल, वार्ड बॉय ओमकार यादव, लैब अटेंडेंट अशेष साहू शामिल रहे।
इसके अलावा एनेस्थीसिया विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल सिंह, स्त्री एवं प्रसूति विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति एवं उनकी टीम तथा नर्सिंग स्टाफ का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।
अस्पताल अधीक्षक डॉ. एमपी सिंह एवं संचालक प्रशासन डॉ. लखन सिंह के निर्देशन तथा डीन डॉ. भूपेंद्र कश्यप के मार्गदर्शन में सिम्स में इस तरह के गंभीर मरीजों का निरंतर नि:शुल्क इलाज किया जा रहा है।
इस सफल सर्जरी ने न केवल एक महिला की जिंदगी बचाई, बल्कि गंभीर घरेलू हिंसा के मामलों में चिकित्सा विशेषज्ञता और तत्परता का उदाहरण भी प्रस्तुत किया है।

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