Latest news

बच्चों में ‘साइलेंट खतरा’: मधुमेह, सिकल सेल और दिल की बीमारियां—छत्तीसगढ़ में बढ़ती चुनौती, जानी है क्या है पूरा मामला…

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
5 Min Read

बिलासपुर, रायपुर, 25 मार्च 2026।
छत्तीसगढ़ की राजधानी में आयोजित राज्य स्तरीय परामर्श ने बच्चों में तेजी से बढ़ रहे गैर-संचारी रोगों (NCD) को लेकर गंभीर तस्वीर सामने रखी। UNICEF छत्तीसगढ़ के तकनीकी सहयोग और राज्य स्वास्थ्य विभाग की पहल पर आयोजित इस बैठक में बाल मधुमेह, Sickle Cell Disease तथा जन्मजात हृदय रोग को प्रमुख स्वास्थ्य चुनौती के रूप में चिन्हित किया गया।
बैठक की अध्यक्षता स्वास्थ्य सेवाओं के संचालक Sanjeev Kumar Jha ने की, जिसमें राज्य में बाल स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने, रेफरल सिस्टम मजबूत करने और बहु-विभागीय समन्वय बढ़ाने पर फोकस रहा।
बढ़ते एनसीडी: बचपन में ही दस्तक
देशभर में अब वे बीमारियां, जिन्हें कभी वयस्कों तक सीमित माना जाता था, बच्चों में भी तेजी से सामने आ रही हैं।
बाल मधुमेह (Type-1 और Type-2 दोनों) के मामलों में वृद्धि
सिकल सेल रोग, विशेषकर आदिवासी क्षेत्रों में
जन्मजात हृदय रोग (Congenital Heart Disease) के मामलों में लगातार वृद्धि
विशेषज्ञों ने कहा कि इन बीमारियों की शीघ्र पहचान, निरंतर उपचार और सामाजिक जागरूकता अब स्वास्थ्य व्यवस्था की प्राथमिक आवश्यकता बन चुकी है।
जशपुर मॉडल: सिकल सेल प्रबंधन का उदाहरण
परामर्श में Jashpur जिले में लागू सिकल सेल प्रबंधन मॉडल को प्रभावी पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया।
इस मॉडल में—
व्यापक स्क्रीनिंग
समय पर निदान
दवा उपलब्धता
समुदाय आधारित फॉलोअप
जैसे उपायों के जरिए रोग नियंत्रण में बेहतर परिणाम देखने को मिले हैं।
पैनल चर्चा में उभरे प्रमुख मुद्दे
बैठक के दौरान विशेषज्ञों और विभिन्न संस्थाओं ने कई अहम बिंदुओं पर चर्चा की—
बाल मधुमेह और सिकल सेल का समग्र प्रबंधन
निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता
सामाजिक कलंक (Stigma) कम करने की चुनौती
ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाओं की पहुंच
रेफरल तंत्र को मजबूत बनाने की जरूरत
समूह कार्य में प्रतिभागियों ने स्क्रीनिंग बढ़ाने, उपचार अनुपालन सुधारने और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए व्यावहारिक सुझाव साझा किए।
राष्ट्रीय संस्थानों और विशेषज्ञों की भागीदारी
कार्यक्रम में देश के प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों और संगठनों की सक्रिय भागीदारी रही—
All India Institute of Medical Sciences Raipur
Indian Medical Association
Indian Academy of Pediatrics
World Health Organization
क्लिंटन फाउंडेशन, पिरामल फाउंडेशन, NASCO, संगवारी, जुवेनाइल डायबिटीज प्रतिनिधि
यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ Dr. Gajendra Singh के नेतृत्व में कार्यक्रम का संचालन हुआ, जिसमें एकम फाउंडेशन का सहयोग रहा।
8 जिलों से जमीनी अनुभव
राज्य के उच्च प्राथमिकता वाले 8 जिलों—
Raipur, Kanker, Bilaspur, Durg, Korba, Mahasamund, Raigarh और Rajnandgaon—
से आए अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा किए।
इनमें जिला एनसीडी नोडल अधिकारी, सिकल सेल नोडल अधिकारी और एनसीडी सलाहकार शामिल रहे, जिन्होंने जमीनी चुनौतियों और समाधान पर विस्तृत प्रस्तुति दी।
बहु-विभागीय समन्वय पर जोर
परामर्श में स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ—
ट्राइबल वेलफेयर
स्कूल शिक्षा
समाज कल्याण
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग
की सहभागिता ने यह संकेत दिया कि बच्चों में एनसीडी से लड़ाई अब केवल चिकित्सा क्षेत्र तक सीमित नहीं रही।
तकनीकी सत्र: विशेषज्ञों की अहम भूमिका
तकनीकी सत्रों में—
डॉ. खेमराज सोनवानी (सिकल सेल)
डॉ. वी.आर. भगत (शिशु स्वास्थ्य)
सुबोध धर शर्मा (NP-NCD)
सहित विभिन्न विशेषज्ञों ने रोग प्रबंधन, उपचार रणनीति और स्वास्थ्य ढांचे पर विस्तार से चर्चा की।
बच्चों में NCD की राष्ट्रीय तस्वीर
भारत में अनुमानित 10 लाख से अधिक बच्चे Type 1 Diabetes से प्रभावित
हर साल करीब 2 लाख बच्चे जन्मजात हृदय रोग के साथ जन्म लेते हैं
Sickle Cell Disease भारत में विश्व के सबसे बड़े प्रभावित देशों में शामिल
आदिवासी क्षेत्रों में सिकल सेल की प्रचलन दर 10–40% तक
WHO के अनुसार, कुल वैश्विक मौतों में लगभग 74% मौतें NCD से (हालांकि बच्चों में अनुपात अलग)
भारत में NCD का बोझ लगातार बढ़ता हुआ, जिसमें अब बच्चों की हिस्सेदारी भी दर्ज
जमीनी स्तर पर उभरती चुनौतियां
ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में स्क्रीनिंग की कमी
विशेषज्ञ डॉक्टरों की सीमित उपलब्धता
उपचार में निरंतरता (compliance) की समस्या
सामाजिक मिथक और कलंक
आर्थिक बोझ और लंबी अवधि का इलाज
अंतिम सहमति: सेवाओं के विस्तार पर जोर
परामर्श में शामिल लगभग 50 प्रतिभागियों ने बच्चों के लिए एनसीडी सेवाओं को मजबूत करने, रेफरल नेटवर्क को बेहतर बनाने और विभागों के बीच समन्वय को और प्रभावी बनाने पर सहमति व्यक्त की।
कार्यक्रम में सहयोग के लिए UNICEF की सराहना की गई और भविष्य में ऐसे और व्यापक कार्यक्रम आयोजित करने की आवश्यकता जताई गई।

खबर को शेयर करने के लिए क्लिक करे।।