
बिलासपुर। पुलिस की कार्यशैली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। चकरभाठा थाना प्रभारी पर एक ढाबा संचालक ने मारपीट, अपमान और झूठे केस में फंसाने की धमकी देने जैसे सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है।
पूरा मामला क्या है
बोदरी निवासी कुशाल माढणीजा, जो गुरुनानक फैमिली ढाबा के संचालक हैं, ने आरोप लगाया है कि चकरभाठा थाने के थाना प्रभारी उमेश साहू और स्टाफ ने उनके साथ गंभीर अभद्रता की।
पीड़ित के अनुसार, उनके ढाबे के सामने खड़ी गाड़ी को पुलिस स्टाफ बिना सूचना के उठा ले गई। जब वह जानकारी लेने थाने पहुंचे तो उन्हें संतोषजनक जवाब देने के बजाय उल्टा प्रताड़ित किया गया।
थाने के अंदर क्या हुआ?
शिकायत में आरोप है कि थाना प्रभारी ने:
कॉलर पकड़कर जबरन अंदर खींचा
मोबाइल फोन छीन लिया
रीडर रूम में ले जाकर दाढ़ी पकड़कर मारपीट की
गाली-गलौज और अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया
झूठे केस में फंसाने की धमकी दी
पीड़ित ने कहा कि इस घटना से उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है और उन्हें शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
स्वास्थ्य पर भी असर
कुशाल माढणीजा ने बताया कि उनकी तबीयत पहले से ठीक नहीं रहती, ऐसे में इस तरह की मारपीट और दुर्व्यवहार से उनकी हालत और बिगड़ गई है।
उच्च अधिकारियों से शिकायत
पीड़ित ने इस मामले की शिकायत पुलिस अधीक्षक बिलासपुर को सौंपते हुए थाना प्रभारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही इस शिकायत की प्रतिलिपि पुलिस महानिरीक्षक, नगर पुलिस अधीक्षक चकरभाठा और सिख समाज रायपुर को भी भेजी गई है।
बड़ा सवाल
थानों में कानून के रखवालों पर ही इस तरह के आरोप लगना पुलिस व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। क्या आम नागरिक थाने में सुरक्षित हैं? या फिर न्याय मांगना ही उनके लिए जोखिम बनता जा रहा है?
अब नजर कार्रवाई पर
मामला सामने आने के बाद अब सभी की नजर पुलिस प्रशासन पर है कि क्या इस शिकायत पर निष्पक्ष जांच होगी या फिर मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा।
(अपडेट जारी…)

