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पैसे दो, जमानत लो? बिलासपुर में जमानत के नाम पर 5 हजार की मांग का आरोप

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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अधिवक्ता संघ ने डिप्टी कलेक्टर कार्यालय पर उठाए सवाल, कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश
बिलासपुर। शहर में न्याय व्यवस्था को लेकर एक गंभीर आरोप सामने आया है। जिला अधिवक्ता संघ बिलासपुर के पदाधिकारियों ने डिप्टी कलेक्टर कार्यालय से जुड़े एक मामले में जमानत के नाम पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाया है। संघ का दावा है कि धारा 151 के एक आरोपी से जमानत दिलाने के एवज में 5 हजार रुपए की मांग की गई। रकम नहीं देने पर आरोपी को जेल भेज दिया गया, जबकि अगले ही दिन कथित तौर पर पैसे देने के बाद उसे रिहा कर दिया गया।
मामला थाना सिविल लाइन क्षेत्र का बताया जा रहा है। आरोप है कि आरोपी रोहित कश्यप की जमानत के लिए एक जूनियर अधिवक्ता डिप्टी कलेक्टर कार्यालय पहुंचे थे। वहीं पर स्टेनो के माध्यम से 5 हजार रुपए की मांग की गई।


क्या है पूरा मामला?
अधिवक्ता संघ के सचिव रवि पांडे ने बताया कि धारा 151 के तहत गिरफ्तार आरोपी रोहित कश्यप की जमानत प्रक्रिया पूरी करने के लिए अधिवक्ता कार्यालय पहुंचे थे। इसी दौरान कथित रूप से स्टेनो जूही सोम के माध्यम से 5 हजार रुपए की मांग की गई।
संघ का आरोप है कि जब रकम नहीं दी गई तो आरोपी को जेल भेज दिया गया। अगले दिन पैसे देने के बाद उसी व्यक्ति को रिहा कर दिया गया।
रवि पांडे का कहना है कि यदि यह आरोप सही है तो यह न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिन्ह है। उन्होंने कहा कि जमानत जैसी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का पैसों का लेन-देन पूरी तरह से गैरकानूनी और अनैतिक है।
अधिवक्ता संघ ने की पारदर्शी जांच की मांग


जिला अधिवक्ता संघ ने पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है। संघ का कहना है कि यदि इस प्रकार की घटनाएं होती हैं तो आम नागरिकों का न्याय व्यवस्था पर से विश्वास उठ जाएगा।
संघ ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
डिप्टी कलेक्टर का पक्ष
जब इस संबंध में डिप्टी कलेक्टर रजनी भगत से प्रतिक्रिया ली गई तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस प्रकार की किसी शिकायत की जानकारी नहीं है। उनके अनुसार अब तक उनके पास कोई औपचारिक शिकायत नहीं पहुंची है।
कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश
इधर, बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कहा कि शिकायत प्राप्त हुई है और मामले की जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अब प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी निगाहें
इस पूरे प्रकरण ने शहर में चर्चा का विषय बना दिया है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या जमानत जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में वाकई पैसों का लेन-देन हो रहा है? यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल प्रशासनिक बल्कि न्यायिक व्यवस्था की साख पर भी बड़ा आघात होगा।
फिलहाल, सभी की नजरें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं। यह देखना होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या इस मामले में सख्त कदम उठाए जाते हैं या आरोप महज आरोप बनकर रह जाते हैं।

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