Latest news

डीईओ बिलासपुर रामेश्वर जायसवाल का किया स्वागत

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
5 Min Read

प्राचार्य है प्रशासनिक पद- डीईओ बिलासपुर नही बन पाने की खीझ में विरोध

आज तक सबसे वरिष्ठ प्राचार्य नही बने बिलासपुर डीईओ

2500 बने है नए प्राचार्य, अब यही सम्हालेंगे विभाग में अहं जिम्मा

कार्यभार किया ग्रहण- मिठाई खिलाकर खुशियां बाटें

बिलासपुर।स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा रामेश्वर जायसवाल को जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) बिलासपुर का प्रभार सौंपे जाने के बाद छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष व प्राचार्य मंच के संयोजक संजय शर्मा के साथ डीईओ बिलासपुर रामेश्वर जायसवाल का स्वागत किया गया।

जहां एक ओर विरोध के स्वर उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विभाग के एक बड़े वर्ग और समर्थकों ने इस फैसले को पूरी तरह नियमानुसार और न्यायसंगत ठहराया है, उनका साफ कहना है कि रामेश्वर जायसवाल जी की योग्यता और उनके 1995 से लंबे सेवाकाल को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता,
एलबी संवर्ग में 31 वर्षों का लंबा प्रशासनिक व शैक्षणिक अनुभव
रामेश्वर जायसवाल के पक्ष में उतरे शिक्षाविदों और विभागीय सहयोगियों का तर्क है कि उन्हें एलबी संवर्ग के व्याख्याता के रूप में 30 वर्षों का एक लंबा और बेदाग अनुभव है।

यह तर्क बेमानी है कि 6 माह के कनिष्ठ प्राचार्य को विभाग ने चूक में जिम्मेदारी दी है, दरअसल अब तक सबसे वरिष्ठ प्राचार्य बिलासपुर में कभी डीईओ नही बने, विभाग ने जिन्हें उचित व योग्य पाया वे ही डीईओ बनते रहे और अब बेहद ऊर्जावान तथा कोरबा व बिलासपुर में अहम जिम्मेदारी निभा चुके रामेश्वर जायसवाल जी को विभाग ने उनकी कार्यदक्षता पर जिम्मेदारी दी है।

रामेश्वर जायसवाल जी एल बी संवर्ग के व्याख्याता से प्राचार्य बने है, जो बिलासपुर डीईओ बनने से चुके उनके द्वारा ही विरोध प्रायोजित किया गया है, प्रदेश में करीब 2500 नए प्राचार्य बने है अब उन्हें कई जगह जिम्मेदारी दी जा रही है, क्योकि वरिष्ठ प्रचार्य अधिकारी रिटायर हुए है।

अभी भी नए प्राचार्य में 4 डीईओ व कई जिले में डीईओ, डीएमसी, बीईओ, सहायक संचालक बनाये गए है, केवल बिलासपुर में विरोध प्रायोजित व शिक्षा के क्षेत्र में अव्यवस्था का प्रयास है।

एल बी संवर्ग वर्षो से दशकों तक शिक्षा व्यवस्था को जमीनी स्तर पर संभालने वाले अधिकारी को सिर्फ इसलिए ‘कनिष्ठ’ या ‘अयोग्य’ कहना पूरी तरह गलत है क्योंकि वे छह माह पूर्व ही नियमित प्राचार्य बने हैं, उनके पास प्रशासनिक कार्यों और स्कूली व्यवस्था को संभालने का व्यापक अनुभव है, जो डीईओ जैसे महत्वपूर्ण पद के लिए सबसे जरूरी योग्यता है। बिलासपुर में पदस्थ अन्य प्राचार्य विरोध की गुटबाजी से आहत है। कई ऐसे प्राचार्य भी है जो सहायक शिक्षक से 2009 में विभागीय परीक्षा देकर सीधे व्याख्याता बने, वे इससे पहले हाई स्कूल में नही थे, अभी पदोन्नत प्राचार्य तो 1995 से हाई स्कूल में पदस्थ है, दरअसल प्रायोजित विरोध गलत है, नियुक्ति का समर्थन करने वाले का आरोप है कि कुछ वरिष्ठ प्राचार्य केवल अपनी व्यक्तिगत वरिष्ठता का हवाला देकर विभाग में गुटबाजी को बढ़ावा दे रहे हैं।

कार्यक्षमता सर्वोपरि: सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग ने केवल कागजी वरिष्ठता को न देखकर अधिकारी की कार्यक्षमता, सत्यनिष्ठा और प्रशासनिक सूझबूझ के आधार पर यह प्रभार सौंपा है।

नियमानुसार प्रभार: प्रभारी डीईओ की नियुक्ति विभाग का प्रशासनिक विशेषाधिकार है, जिसमें योग्यता और वरिष्ठता के बीच संतुलन बनाया जाता है। रामेश्वर जायसवाल का 31 साल का अनुभव उन्हें इस पद के लिए पूरी तरह पात्र बनाता है।

31 साल तक शिक्षा विभाग को सींचने वाले और जमीनी स्तर पर काम करने वाले अधिकारी को अयोग्य ठहराना अनुचित है। प्राचार्य पद की अवधि भले कम हो, लेकिन उनका कुल सेवाकाल और अनुभव किसी भी मायने में कम नहीं है। संजय शर्मा, मनोज सनाड्य, अनिल साहू, तोषनगुप्ता, रामेश्वर गुप्ता, रामगोपाल साहू, शैलेष चौबे, संगीता पांडैय, विनीता सिंहा, चिंता राम कश्यप, आर के डहरिया, प्रीति श्रीवास्तव, निवेदिता सरकार, पवन पटैल आदि प्राचार्यो ने बुके देकर स्वागत किया और मिठाई खिलाकर खुशी का इजहार किया।

खबर को शेयर करने के लिए क्लिक करे।।