Latest news

‘वनवासी’ शब्द पर भड़का आदिवासी समाज, कलेक्ट्रेट घेरा; अमित शाह के खिलाफ जमकर नारेबाजी

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
4 Min Read

बिलासपुर में आदिवासी संगठनों का उग्र प्रदर्शन, कलेक्ट्रेट पहुंचकर सौंपा ज्ञापन; ‘आदिवासी पहचान से समझौता नहीं’
बिलासपुर। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा आदिवासी समाज के लिए “वनवासी” शब्द के इस्तेमाल के विरोध में मंगलवार को बिलासपुर में आदिवासी समाज का आक्रोश खुलकर सामने आया।

बड़ी संख्या में समाज के लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां उन्होंने जोरदार प्रदर्शन करते हुए कलेक्ट्रेट का घेराव किया और जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने गृह मंत्री के बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए जिला प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति और केंद्र सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा।
दोपहर के समय विभिन्न आदिवासी संगठनों से जुड़े लोग शहर में एकत्रित हुए और रैली के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान “आदिवासी हमारी पहचान है”, “वनवासी शब्द वापस लो” और “आदिवासी समाज का अपमान बंद करो” जैसे नारे पूरे परिसर में गूंजते रहे। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि आदिवासी समाज की ऐतिहासिक, सामाजिक और संवैधानिक पहचान को किसी भी स्थिति में कमजोर नहीं होने दिया जाएगा।


कलेक्ट्रेट परिसर में दिखा भारी आक्रोश
प्रदर्शन के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर काफी देर तक नारेबाजी होती रही। समाज के पदाधिकारियों और वक्ताओं ने कहा कि 24 मई 2026 को दिल्ली के लाल किला मैदान में आयोजित जनजातीय सांस्कृतिक समागम कार्यक्रम में गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संबोधन में आदिवासी समाज को बार-बार “वनवासी” कहकर संबोधित किया, जिससे पूरे समाज की भावनाएं आहत हुई हैं।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि “आदिवासी” शब्द केवल एक संबोधन नहीं बल्कि समुदाय की पहचान, इतिहास और अस्तित्व का प्रतीक है। ऐसे में “वनवासी” शब्द का प्रयोग स्वीकार्य नहीं है और इसे तत्काल वापस लिया जाना चाहिए।


ज्ञापन में दर्ज कराई आपत्ति
कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में गृह मंत्री द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्द पर आपत्ति दर्ज कराते हुए इसे वापस लेने की मांग की गई। साथ ही आदिवासी समाज की पहचान और अधिकारों का सम्मान सुनिश्चित करने की बात कही गई।


मुखर विरोध
हालांकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन प्रदर्शनकारियों का आक्रोश साफ दिखाई दिया। बड़ी संख्या में मौजूद लोगों ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर विरोध जताया। कई वक्ताओं ने कहा कि देश के सर्वोच्च पदों पर बैठे लोगों को आदिवासी समाज की संवेदनाओं और पहचान का सम्मान करना चाहिए।
राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज
इस प्रदर्शन के बाद बिलासपुर में “आदिवासी” और “वनवासी” शब्दों को लेकर बहस और तेज हो गई है। आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने साफ किया कि यह केवल शब्दों का विवाद नहीं, बल्कि उनकी पहचान और सम्मान से जुड़ा विषय है। इसी कारण समाज ने कलेक्ट्रेट घेराव कर अपनी नाराजगी सार्वजनिक रूप से दर्ज कराई है।
कलेक्ट्रेट में हुए इस प्रदर्शन के बाद अब सभी की नजर इस बात पर है कि केंद्र सरकार और संबंधित पक्षों की ओर से इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।

खबर को शेयर करने के लिए क्लिक करे।।