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शाबाश बिलासपुर पुलिस….17 लाख की ठगी से खुला 8 करोड़ के साइबर सिंडिकेट का राज, शेयर ट्रेडिंग के नाम पर देशभर में बिछाया था जाल; 4 गिरफ्तार

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर साइबर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, बिहार से छत्तीसगढ़ तक फैला नेटवर्क बेनकाब; कई राज्यों में दर्ज मिलीं शिकायतें, खातों में करोड़ों के लेनदेन के सुराग
बिलासपुर।
मोबाइल स्क्रीन पर शेयर ट्रेडिंग से मोटे मुनाफे का सपना दिखाकर लोगों की गाढ़ी कमाई लूटने वाले एक अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का बड़ा खुलासा बिलासपुर में हुआ है। एक महिला से 17.21 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी की जांच करते-करते पुलिस ऐसे नेटवर्क तक पहुंच गई, जिसके बैंक खातों के तार देशभर में हुए करोड़ों रुपये के साइबर अपराधों से जुड़े मिले हैं।
रेंज साइबर थाना बिलासपुर की जांच में सामने आया कि आरोपी सिर्फ एक-दो लोगों को नहीं, बल्कि ऑनलाइन निवेश और शेयर ट्रेडिंग के नाम पर देश के अलग-अलग राज्यों में लोगों को निशाना बनाने वाले संगठित नेटवर्क का हिस्सा थे। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में मिले बैंकिंग रिकॉर्ड और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) के डेटा ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
17 लाख की ठगी से खुला साइबर नेटवर्क का पूरा खेल
मामला बिलासपुर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र स्थित नर्मदा नगर कॉलोनी का है। यहां रहने वाली एक महिला को शेयर बाजार में निवेश कर कम समय में बड़ा मुनाफा कमाने का झांसा दिया गया। ऑनलाइन संपर्क करने वाले ठगों ने खुद को निवेश विशेषज्ञ बताकर भरोसा जीता और अलग-अलग चरणों में महिला से 17 लाख 21 हजार 100 रुपये ट्रांसफर करा लिए।
जब मुनाफे की रकम वापस नहीं मिली और संपर्क टूट गया तो मामले की शिकायत साइबर पुलिस तक पहुंची। इसके बाद शुरू हुई जांच ने साइबर अपराध की एक बड़ी परत खोल दी।
बिहार, रायगढ़, सक्ती और रायपुर से जुड़े आरोपी गिरफ्तार
साइबर पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजेक्शन की कड़ियां जोड़ते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार आरोपियों में शामिल हैं—
मुकेश कुमार दास (29 वर्ष), मूल निवासी समस्तीपुर (बिहार), वर्तमान निवास रायपुर
केशव साव, निवासी रायगढ़
संदीप कुमार चंद्रा उर्फ विक्की, निवासी सक्ती
शिशिर राठौर (35 वर्ष), निवासी सक्ती, वर्तमान निवास रायपुर
पुलिस जांच में सामने आया कि साइबर ठगी से प्राप्त रकम को विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से प्राप्त कर आगे ट्रांसफर किया जा रहा था।
देश के कई राज्यों में दर्ज मिली शिकायतें
जांच के दौरान आरोपियों के बैंक खातों का डेटा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल से खंगाला गया। यहां जो जानकारी सामने आई उसने जांच एजेंसियों का ध्यान खींच लिया।
आरोपी संदीप कुमार चंद्रा के खाते के खिलाफ गुजरात, तेलंगाना, कर्नाटक और दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों में पांच साइबर शिकायतें दर्ज पाई गईं।
वहीं मुख्य आरोपी मुकेश कुमार दास के तीन अलग-अलग बैंक खातों की जांच में कुल 13 साइबर फ्रॉड शिकायतें सामने आईं।
इनमें—
इंडसइंड बैंक खाते में 3 शिकायतें
एक्सिस बैंक खाते में 6 शिकायतें
इंडियन ओवरसीज बैंक खाते में 4 शिकायतें
दर्ज मिलीं।
8 करोड़ रुपये के संदिग्ध ट्रांजेक्शन के मिले सुराग
साइबर जांच के दौरान सबसे बड़ा खुलासा बैंकिंग ट्रेल से हुआ। पुलिस के अनुसार मुकेश कुमार दास से जुड़े खातों के खिलाफ दर्ज शिकायतों में लगभग 8 करोड़ रुपये की संदिग्ध राशि का लिंक सामने आया है।
जांच में यह भी पता चला कि आरोपी के खातों में साइबर ठगी से संबंधित करीब 10 लाख रुपये सीधे प्राप्त हुए थे। अब एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि रकम किन-किन खातों और लोगों तक पहुंची।
खातों में लाखों रुपये फ्रीज, पुलिस ने रोकी रकम की आवाजाही
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के बैंक खातों पर भी कार्रवाई की।
केशव साव के एक्सिस बैंक खाते में लगभग 99 लाख रुपये होल्ड कराए गए।
शिशिर राठौर के खाते में करीब 1 लाख रुपये की राशि होल्ड कराई गई।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ये खाते साइबर अपराध से प्राप्त रकम के लेनदेन और ट्रांसफर के लिए उपयोग किए जा रहे थे।
शेयर ट्रेडिंग का लालच, डिजिटल ठगी का नया हथियार
साइबर अपराधियों द्वारा हाल के वर्षों में शेयर ट्रेडिंग, ऑनलाइन निवेश, आईपीओ, मल्टीबैगर स्टॉक और हाई-रिटर्न स्कीम के नाम पर लोगों को निशाना बनाने के मामले तेजी से बढ़े हैं। इस मामले में भी निवेश पर भारी मुनाफा दिलाने का झांसा देकर पीड़िता को रकम ट्रांसफर करने के लिए प्रेरित किया गया।
जांच एजेंसियों को आशंका है कि गिरफ्तार आरोपी ऐसे बड़े नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं, जो अलग-अलग राज्यों में बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर साइबर ठगी को अंजाम देता रहा है।
तकनीकी जांच से खुली परत-दर-परत साजिश
रेंज साइबर थाना की टीम ने बैंकिंग ट्रेल, डिजिटल साक्ष्य, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड और एनसीआरपी पोर्टल से प्राप्त सूचनाओं का विश्लेषण कर आरोपियों तक पहुंच बनाई। जांच के दौरान सामने आए दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन ने पूरे नेटवर्क की गतिविधियों पर महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराई।
वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में हुई कार्रवाई
पूरी कार्रवाई पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह, नोडल अधिकारी गगन कुमार और थाना प्रभारी प्रसाद सिन्हा के मार्गदर्शन में संपन्न हुई।
कार्रवाई में निरीक्षक कामिल हक, प्रधान आरक्षक सैयद साजिद, सहायक उपनिरीक्षक जीवन साहू, वरिष्ठ आरक्षक भानु प्रताप, दीपक यादव, दीपक कौशिक, विजेंद्र मरकाम, चिरंजीव और मुकुंद नेताम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

एक नजर में पूरा मामला
शेयर ट्रेडिंग के नाम पर 17.21 लाख की ठगी
बिलासपुर साइबर पुलिस ने 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया
मुख्य आरोपी के खातों से जुड़े मिले 13 साइबर फ्रॉड केस
कई राज्यों में दर्ज शिकायतों का खुलासा
करीब 8 करोड़ रुपये के संदिग्ध ट्रांजेक्शन सामने आए
99 लाख रुपये और 1 लाख रुपये खातों में होल्ड
एनसीआरपी डेटा से मिला अंतरराज्यीय नेटवर्क का सुराग
बैंक खातों के जरिए साइबर ठगी की रकम ट्रांसफर करने का आरोप
क्राइम एंगल
17 लाख की शिकायत से शुरू हुई जांच ने करोड़ों के साइबर नेटवर्क की परतें खोल दीं। बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजेक्शन और एनसीआरपी रिकॉर्ड ने संकेत दिए हैं कि शेयर ट्रेडिंग के नाम पर ऑनलाइन ठगी करने वाला यह नेटवर्क एक राज्य तक सीमित नहीं था, बल्कि उसके तार देश के कई हिस्सों तक फैले हुए थे।

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