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सिम्स में फायर सेफ्टी का मेगा अपग्रेड…664 सिलेंडरों की जांच, हर फ्लोर पर प्रभारी, SDRF संग मॉक ड्रिल से सुरक्षा चाक-चौबंद

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर के सिम्स अस्पताल में सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है। 664 अग्निशमन सिलेंडरों की जांच से लेकर हर फ्लोर पर प्रभारी की नियुक्ति, SDRF के साथ मॉक ड्रिल और अधिष्ठाता–अधीक्षक की खुद की भागीदारी तक—पूरे कैंपस में फायर सेफ्टी को नए स्तर पर मजबूत करने की कवायद शुरू हुई है।
बिलासपुर, 06 अप्रैल 2026।


छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) चिकित्सालय, बिलासपुर में मरीजों, परिजनों, चिकित्सकों एवं कर्मचारियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए फायर सेफ्टी व्यवस्था को व्यापक रूप से सुदृढ़ किया गया है। संयुक्त संचालक एवं अधीक्षक कार्यालय के निर्देशानुसार संस्थान में फायर सेफ्टी अभियान, विभागवार जिम्मेदारी निर्धारण, फ्लोर प्रभारी नियुक्ति, फायर व इलेक्ट्रिकल ऑडिट, मासिक मॉक ड्रिल तथा SDRF के साथ संयुक्त आपदा प्रबंधन अभ्यास की शुरुआत की गई है।


664 अग्निशमन सिलेंडरों की जांच, हर उपकरण पर नजर
संस्थान परिसर में स्थापित कुल 664 अग्निशमन सिलेंडरों की विस्तृत जांच, परीक्षण एवं रिफिलिंग समीक्षा की गई। वार्ड, ICU, ऑपरेशन थिएटर, ट्रॉमा, आपातकालीन विभाग, लैब, प्रशासनिक भवन सहित सभी संवेदनशील क्षेत्रों में लगे उपकरणों की कार्यक्षमता, प्रेशर, वैधता और उपयोगिता का सूक्ष्म परीक्षण किया गया। जिन उपकरणों में कमी पाई गई, उन्हें तत्काल दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए।
फायर सेफ्टी ऑफिसर नियुक्त, ऑडिट और सिस्टम की जिम्मेदारी तय
कार्यवाही विवरण पत्र के अनुसार उत्कर्ष शर्मा, सिविल इंजीनियर (CGMSC) को संस्थान का फायर सेफ्टी ऑफिसर नियुक्त किया गया है। उनके नेतृत्व में फायर ऑडिट, इलेक्ट्रिकल सुरक्षा निरीक्षण, इमरजेंसी एग्जिट, अलार्म सिस्टम और विभागीय समन्वय कार्य संपादित किए जाएंगे।
हर मंजिल पर फ्लोर प्रभारी, जिम्मेदारी स्पष्ट
सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अस्पताल की पांचों मंजिलों पर अलग-अलग फ्लोर प्रभारी नियुक्त किए गए हैं—
प्रथम तल: श्रीमती पुष्पलता एवं श्रीमती राजकुमारी चौहान
द्वितीय तल: श्री अजय शर्मा एवं सुश्री राशि पाण्डेय
तृतीय तल: श्री कमलेश देवांगन एवं श्री चंद्रशेखर साहू
चतुर्थ तल: श्री पवन कुमार साहू
पंचम तल: श्री संतोष चंद्रवंशी
इन प्रभारियों को अपने-अपने फ्लोर पर फायर सिलेंडर, अलार्म सिस्टम, इमरजेंसी एग्जिट, विद्युत उपकरणों और सुरक्षा संकेतकों की निगरानी तथा किसी भी कमी की तत्काल सूचना देने की जिम्मेदारी दी गई है।
फायर मॉक ड्रिल में लाइव डेमो, कर्मचारियों को प्रैक्टिकल ट्रेनिंग
आयोजित विशेष फायर मॉक ड्रिल और आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण में फायर इंस्पेक्टर वेद नारायण सेन ने आग लगने की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया, अग्निशमन यंत्रों के सुरक्षित उपयोग, धुएं से बचाव, शॉर्ट सर्किट से उत्पन्न आग पर नियंत्रण और मरीजों की सुरक्षित निकासी के तरीके बताए।
फायरमैन मोहन साहू और उमेश कश्यप ने लाइव डेमो के माध्यम से प्रशिक्षण दिया।
SDRF टीम ने दिखाया रेस्क्यू का रियल एक्शन
प्रशिक्षण में SDRF टीम के राजेश राठौर, प्रदीप राठौर, धनेश्वर सिदार और संजय बघेल ने रेस्क्यू ऑपरेशन, स्ट्रेचर मूवमेंट, बंद स्थानों और ऊंचाई से सुरक्षित निकासी के साथ आपदा के दौरान समन्वित राहत कार्य का प्रदर्शन किया।
अधिष्ठाता और अधीक्षक ने खुद उठाया सिलेंडर, लिया प्रशिक्षण
इस प्रशिक्षण की खास बात यह रही कि अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने स्वयं अग्निशमन सिलेंडर उठाकर आग बुझाने का प्रशिक्षण लिया। उन्होंने कर्मचारियों के साथ मिलकर फायर एक्सटिंग्विशर के संचालन, आग की प्रारंभिक अवस्था में नियंत्रण और आपात स्थिति में त्वरित निर्णय की प्रक्रिया को समझा।
वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ प्रशिक्षण
प्रशिक्षण कार्यक्रम में संजय कुमार, अभिषेक यादव, श्याम कार्तिक सहित कई कर्मचारी शामिल रहे। साथ ही डॉ. अमित ठाकुर, डॉ. सुधांशु भट्ट, डॉ. चंद्रहास ध्रुव, डॉ. अमित कुमार, श्रीमती गरिमा पाण्डेय, उज्जवला दास, पिंकी दास, सरिता बहादुर, मुकेश ठाकरे, संतोष चंद्र सेन सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
मासिक ऑडिट और मॉक ड्रिल की व्यवस्था


अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने सुरक्षा मानकों के कड़ाई से पालन पर जोर दिया।

वहीं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने बताया कि अब प्रत्येक माह नियमित फायर ऑडिट, इलेक्ट्रिकल ऑडिट और मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी, जिससे कर्मचारियों को लगातार प्रशिक्षित किया जा सके।

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