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“जांघ में धंसी बुलेट, नसों के बीच फंसी मौत… सिम्स के डॉक्टरों ने मिनटों की सर्जरी में बचाया पैर”

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर से बड़ी मेडिकल सफलता, जटिल ऑपरेशन में टीमवर्क और तकनीक का कमाल
छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर।
छत्तीसगढ़ के प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थान सिम्स में एक बार फिर डॉक्टरों की तत्परता और विशेषज्ञता ने गंभीर हालत में पहुंचे मरीज को नई जिंदगी दी। जांघ में धंसी बंदूक की गोली, जो शरीर की महत्वपूर्ण रक्त वाहिकाओं के बेहद करीब फंसी थी, उसे सफलतापूर्वक निकालते हुए डॉक्टरों ने न केवल मरीज की जान बचाई, बल्कि उसका पैर भी सुरक्षित रखा।


खतरे के बेहद करीब थी गोली, हर पल बढ़ रहा था जोखिम
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पंकज कश्यप को 23 मार्च 2026 को जांघ में गोली लगने के बाद गंभीर अवस्था में सिम्स में भर्ती कराया गया।
व्यास नगर, पामगढ़ से रेफर होकर पहुंचे इस मरीज की स्थिति चिंताजनक थी। प्राथमिक जांच में स्पष्ट हुआ कि गोली जांघ की प्रमुख रक्त नसों के बेहद करीब फंसी हुई है, जिससे किसी भी क्षण जानलेवा स्थिति उत्पन्न हो सकती थी।
इमरजेंसी में लिया गया बड़ा निर्णय, तत्काल सर्जरी शुरू
हड्डी रोग विभाग के विशेषज्ञ डॉ. तरुण सिंह ने बताया कि शरीर में गोली का बने रहना संक्रमण और गंभीर जटिलताओं को जन्म दे सकता था।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बिना विलंब किए इमरजेंसी सर्जरी का निर्णय लिया गया।
ऑपरेशन के दौरान सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि गोली महत्वपूर्ण रक्त वाहिकाओं के बेहद पास फंसी हुई थी। मामूली चूक भी मरीज के लिए घातक साबित हो सकती थी। ऐसे में पूरी सावधानी, सटीक योजना और तकनीकी दक्षता के साथ सर्जन टीम ने सफलतापूर्वक बुलेट को बाहर निकाल लिया।
टीमवर्क ने रचा सफलता का इतिहास
इस जटिल सर्जरी को सफल बनाने में विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों का समन्वय निर्णायक साबित हुआ।
सर्जन टीम:
डॉ. तरुण सिंह
डॉ. प्रमोद
डॉ. शशांक
डॉ. रौनक
एनेस्थीसिया टीम:
डॉ. मिल्टन
डॉ. प्रशांत
नर्सिंग स्टाफ:
शोभना
प्रीति
घूरई
सभी ने आपसी तालमेल और तत्परता के साथ ऑपरेशन को सफल बनाया।
सर्जरी के बाद स्थिर हालत, खतरे से बाहर मरीज
सफल ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति स्थिर बताई जा रही है और वह अब पूरी तरह खतरे से बाहर है। डॉक्टरों के अनुसार, समय पर इलाज मिलने से न केवल उसकी जान बची, बल्कि जांघ और पैर को भी सुरक्षित रखा जा सका।
विशेषज्ञों की नजर में केस था बेहद जटिल
विभागाध्यक्ष का बयान
सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. ए.आर. बेन ने बताया कि यह केस अत्यंत जटिल था, क्योंकि गोली का स्थान अत्यधिक संवेदनशील था।
उन्होंने कहा,
“ऐसे मामलों में सटीक योजना, अनुभवी सर्जन और टीमवर्क अत्यंत आवश्यक होता है। सिम्स में उपलब्ध आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ टीम के कारण हम जटिल मामलों को भी सफलतापूर्वक संभाल पा रहे हैं।”
अधिष्ठाता की प्रतिक्रिया
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने इसे संस्थान की बड़ी उपलब्धि बताया।
उन्होंने कहा,
“हमारा उद्देश्य है कि हर गंभीर मरीज को समय पर और उच्च गुणवत्ता का उपचार मिले। यह केस दर्शाता है कि हमारे डॉक्टर और स्टाफ हर चुनौती के लिए तैयार हैं।”
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सिम्स में अत्याधुनिक सुविधाओं और विशेषज्ञों की उपलब्धता के कारण मरीजों को अब बड़े शहरों का रुख कम करना पड़ रहा है।
चिकित्सा अधीक्षक का बयान
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने इस सफलता पर पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा,
“आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित निर्णय और समन्वय ही मरीज की जान बचाता है। इस केस में सभी टीमों ने बेहतरीन तालमेल का परिचय दिया है।”
उन्होंने बताया कि सिम्स में इमरजेंसी सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ किया जा रहा है, ताकि भविष्य में भी ऐसे गंभीर मामलों का त्वरित और प्रभावी उपचार सुनिश्चित किया जा सके।

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