बिलासपुर, 2026।
गुरु घासीदास विश्वविद्यालय में ICSSR प्रायोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “डिजिटल पैडागॉजी और शिक्षक शिक्षा: नई शिक्षा नीति 2020 की दृष्टि” का समापन सत्र गरिमामय और सुव्यवस्थित वातावरण में सम्पन्न हुआ। देश के 16 राज्यों से आए प्रतिनिधियों और प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी ने इस आयोजन को राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रभावशाली शैक्षणिक संवाद का मंच बनाया।
समापन सत्र का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसे ज्ञान, चेतना और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। स्वागत उद्बोधन डॉ. राजेश्वरी गर्ग ने प्रस्तुत करते हुए संगोष्ठी की प्रासंगिकता और उद्देश्य पर प्रकाश डाला तथा अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया।
आयोजन सचिव डॉ. राजेश गौर ने दो दिवसीय संगोष्ठी का विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने विभिन्न शैक्षणिक सत्रों, शोधपत्र प्रस्तुतियों और विचार-विमर्श का समग्र विवरण देते हुए कार्यक्रम की शैक्षणिक गहराई और व्यापकता को रेखांकित किया।
फीडबैक में सराहना, प्रतिभागियों ने बताया ज्ञानवर्धक अनुभव
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों से प्राप्त फीडबैक में संगोष्ठी की विषय-वस्तु, आयोजन की गुणवत्ता और शैक्षणिक उपयोगिता की व्यापक सराहना की गई। प्रतिभागियों ने इसे समसामयिक संदर्भों से युक्त, प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक अनुभव बताया।
डिजिटल युग में शिक्षक शिक्षा पर जोर
मुख्य विशिष्ट अतिथि श्री मनीष श्रीवास्तव (महाप्रबंधक, SECL, बिलासपुर) ने अपने उद्बोधन में डिजिटल युग में शिक्षा के बदलते स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप शिक्षक शिक्षा में नवाचार और तकनीकी दक्षता का समन्वय आवश्यक है।
अध्यक्षीय उद्बोधन प्रो. ए. के. सक्सेना (निदेशक, IQAC) ने प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक आयोजन शिक्षक शिक्षा में गुणवत्ता संवर्धन और नवाचार को बढ़ावा देते हैं।
कुलपति के नेतृत्व में सफल आयोजन
इस अवसर पर कुलपति प्रो. आलोक कुमार चक्रवाल के मार्गदर्शन, नेतृत्व और प्रोत्साहन को आयोजन की सफलता का प्रमुख आधार बताया गया। उनके दूरदर्शी निर्देशन में संगोष्ठी सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई।
धन्यवाद ज्ञापन और प्रभावी संचालन
कार्यक्रम के अंत में प्रो. सम्बित कुमार पाढ़ी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, आयोजकों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
संपूर्ण कार्यक्रम का संचालन श्रीमती सुभांकिता रथ (शोधार्थी) ने प्रभावी और सुसंगठित ढंग से किया।
इस प्रकार संगोष्ठी का वैलिडिक्टरी सत्र डिजिटल पैडागॉजी और नई शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में शैक्षणिक विमर्श को नई दिशा देते हुए सम्पन्न हुआ।

NEP-2020 के विज़न पर राष्ट्रीय संगोष्ठी की धमाकेदार शुरुआत: 360 प्रतिभागी, 16 राज्यों से रिसर्च स्कॉलर्स की मौजूदगी
गुरु घासीदास विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग द्वारा ICSSR के प्रायोजन और IQAC के सहयोग से “डिजिटल शिक्षाशास्त्र और शिक्षक शिक्षा: एनईपी-2020 का दृष्टिकोण” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ रजत जयंती सभागार में हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। अतिथियों को पौधे, स्मृति चिन्ह और शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया।
स्वागत भाषण और संगोष्ठी की रूपरेखा
शिक्षा संकाय के डीन एवं सह-संरक्षक प्रो. रत्नेश सिंह ने स्वागत भाषण दिया। आयोजन सचिव डॉ. राजेश गौर ने संगोष्ठी का परिचय प्रस्तुत करते हुए इसके उद्देश्यों की रूपरेखा स्पष्ट की। उन्होंने डिजिटल शिक्षाशास्त्र, शिक्षक शिक्षा और NEP-2020 के संदर्भ में सतत विकास पर जोर दिया।
देशभर के शिक्षाविदों ने साझा किए विचार
उद्घाटन सत्र में प्रो. ए. के. दीक्षित (रजिस्ट्रार, जीजीवी), प्रो. जे. वी. मधुसूदन (हैदराबाद विश्वविद्यालय), तथा प्रो. वी. के. सारस्वत (पं. सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय) ने अपने संबोधनों से कार्यक्रम को समृद्ध किया।
संगोष्ठी की स्मारिका का विमोचन भी इस अवसर पर किया गया।
कुलपति का उद्घाटन भाषण
कुलपति प्रो. आलोक कुमार चक्रवाल ने उद्घाटन भाषण में शिक्षक शिक्षा में डिजिटल शिक्षण की परिवर्तनकारी भूमिका पर प्रकाश डाला और इसे नई शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण बताया।
देशभर से सहभागिता, 360 प्रतिभागी शामिल
उद्घाटन सत्र में देश के लगभग 16 राज्यों से आए रिसोर्स पर्सन और करीब 360 प्रतिभागियों की उपस्थिति रही।
इसमें बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से डॉ. नागेंद्र कुमार, डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय से प्रो. डी.पी. मिश्रा, उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय से प्रो. छत्रसाल सिंह, वेस्ट बंगाल से प्रो. प्रदीप्त कुमार मिश्रा, नेहरू ग्राम भारती विश्वविद्यालय से डॉ. शिवाश्रय यादव सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के शोधार्थियों और छात्रों ने भाग लिया।
शिक्षा विभाग, जीजीवी के शोध छात्र, B.Ed एवं M.Ed के विद्यार्थी, साथ ही शारीरिक शिक्षा विभाग के B.P.Ed एवं M.P.Ed के छात्र भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे, जिससे कार्यक्रम को जीवंतता और व्यापकता मिली।
औपचारिक समापन
कार्यक्रम का समापन प्रो. सम्बित कुमार पाढ़ी द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
दो दिवसीय इस राष्ट्रीय संगोष्ठी की शुरुआत ने डिजिटल शिक्षाशास्त्र और शिक्षक शिक्षा के क्षेत्र में गंभीर शैक्षणिक विमर्श की मजबूत आधारशिला रखी।

