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सिम्स में 10वाँ एम्बिकॉन राज्य सम्मेलन: महिलाओं में मेटाबॉलिक–हार्मोनल विकारों पर राष्ट्रीय मंथन

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर, 19 फरवरी 2026।
छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) के ऑडिटोरियम में 10वाँ एम्बिकॉन छत्तीसगढ़ राज्य सम्मेलन गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। राष्ट्रीय स्तर के इस सम्मेलन का विषय रहा — “महिलाओं में चयापचय (मेटाबॉलिक) एवं हार्मोनल विकारों के जैव-रासायनिक पहलू”। प्रदेश एवं देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों से आए विशेषज्ञों, चिकित्सकों और विद्यार्थियों ने इसमें सहभागिता की।
विधिवत शुभारंभ


कार्यक्रम की शुरुआत माँ सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्वलन, राष्ट्रगीत एवं राष्ट्रगान के साथ हुई। मंचासीन अतिथियों का पुष्पगुच्छ एवं स्मृति-चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया। एमबीबीएस छात्राओं द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक सुआ नृत्य ने छत्तीसगढ़ी संस्कृति की झलक प्रस्तुत की। सम्मेलन के दौरान आयोजित क्विज प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
मंचासीन अतिथि
मुख्य अतिथि के रूप में आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी.के. पात्रा उपस्थित रहे।
संरक्षक के रूप में अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति की उपस्थिति रही।
आयोजन अध्यक्ष डॉ. पी.के. खोदियार, प्रोफेसर, रिम्स रायपुर ने अध्यक्षता की।
विशिष्ट अतिथि डॉ. बी.पी. सिंह, चिकित्सा अधीक्षक, सुपर स्पेशलिटी सिम्स तथा विशेष अतिथि डॉ. भूपेंद्र कश्यप, नोडल अधिकारी, सिम्स मौजूद रहे।
आयोजन सचिव एवं विभागाध्यक्ष, बायोकेमिस्ट्री डॉ. मनीष साहू ने आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया।
वैज्ञानिक सत्रों में गहन विमर्श
प्रथम सत्र
डॉ. नेहा सर्जल ने “मेटाबॉलिक–हार्मोनल असंतुलन का जैवरासायनिक आधार” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने इंसुलिन रेज़िस्टेंस, एडिपोकाइन्स, थायरॉइड–मेटाबॉलिज़्म संबंध, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस एवं माइटोकॉन्ड्रियल डिसफंक्शन जैसे विषयों को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि हार्मोनल असंतुलन महिलाओं में मोटापा, पीसीओएस एवं मेटाबॉलिक सिंड्रोम जैसी समस्याओं से जुड़ा है।
द्वितीय सत्र
डॉ. विभा साखरे ने “महिलाओं में क्लीनिकल स्पेक्ट्रम: मेडिसिन एवं स्त्रीरोग विभाग का समन्वय” विषय पर प्रस्तुति दी। उन्होंने पीसीओएस के जैवरासायनिक परिवर्तन, एएमएच एवं इंसुलिन रेज़िस्टेंस, गर्भावधि मधुमेह की जांच, थायरॉइड विकारों से उत्पन्न मासिक धर्म असंतुलन तथा रजोनिवृत्ति के पश्चात एस्ट्रोजन की कमी से बढ़ते हृदय-चयापचय जोखिम पर प्रकाश डाला।
तृतीय सत्र
डॉ. योगेश पावडे ने “एंडोक्राइन विकारों में लैबोरेटरी कोरिलेशन” विषय पर केस-आधारित प्रस्तुति दी। उन्होंने जैवरासायनिक परीक्षणों, इमेजिंग तकनीकों एवं क्लीनिकल मूल्यांकन के समन्वित विश्लेषण की आवश्यकता पर चर्चा की।
सभी सत्र चिकित्सकों, स्नातकोत्तर विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक रहे।
मेटाबॉलिक एवं हार्मोनल विकार सार्वजनिक स्वास्थ्य की गंभीर चुनौती बन रहे हैं : अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति

अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि महिलाओं में बढ़ते मेटाबॉलिक एवं हार्मोनल विकार सार्वजनिक स्वास्थ्य की गंभीर चुनौती बन रहे हैं और इनकी जड़ें जैवरासायनिक एवं आणविक स्तर पर निहित हैं।
मुख्य अतिथि डॉ. पी.के. पात्रा ने समय पर जांच, सटीक निदान एवं आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर बल दिया। उन्होंने चिकित्सा शिक्षा में अनुसंधान, नवाचार एवं अंतर्विषयक सहयोग की आवश्यकता बताई।
आयोजन सचिव डॉ. मनीष साहू ने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य बायोकेमिस्ट्री, मेडिसिन, स्त्रीरोग एवं रेडियोलॉजी विभागों के समन्वित प्रयासों को एक मंच प्रदान करना है।
सक्रिय सहभागिता

सम्मेलन में प्रदेश के विभिन्न चिकित्सा महाविद्यालयों से आए चिकित्सकों — डॉ. आरती पांडे, डॉ. अर्चना सिंह, डॉ. रेखा बरापतारे, डॉ. सागरिका प्रधान, डॉ. जे.पी. स्वाइन, डॉ. ए.आर. बेन, डॉ. अमित ठाकुर, डॉ. केशव कश्यप, डॉ. समीर पैकरा सहित विशेषज्ञों, स्नातकोत्तर विद्यार्थियों एवं एमबीबीएस छात्र-छात्राओं ने भागीदारी की।
प्रश्नोत्तर सत्र में प्रतिभागियों ने जिज्ञासापूर्ण प्रश्न रखे, जिससे चर्चा संवादात्मक रही।
10वाँ एम्बिकॉन छत्तीसगढ़ राज्य सम्मेलन में महिला स्वास्थ्य से जुड़े मेटाबॉलिक एवं हार्मोनल विकारों के जैव-रासायनिक, क्लीनिकल एवं प्रयोगशाला आयामों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

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