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नवरात्र…. 48 गांव, सात दिन और आस्था का एक संकल्प, विधायक सुशांत शुक्ला के नेतृत्व में निकलेगी भव्य ध्वजा यात्रा, ग्राम देवस्थलों के संरक्षण का होगा अभियान

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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11 से 17 अक्टूबर तक बेलतरा विधानसभा के गांव-गांव पहुंचेगी यात्रा, ग्राम देवताओं की पूजा-अर्चना के साथ चढ़ाए जाएंगे ध्वज; शक्तिपीठों को जोड़ने, देवस्थलों को स्वच्छ-सुंदर बनाने और लोक संस्कृति को सहेजने की पहल

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की ग्रामीण आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देने के संकल्प के साथ बेलतरा विधानसभा में 11 अक्टूबर से सात दिवसीय ध्वजा यात्रा का शुभारंभ होगा। विधायक सुशांत शुक्ला के नेतृत्व में निकलने वाली यह यात्रा 17 अक्टूबर तक क्षेत्र के 48 गांवों से होकर गुजरेगी। इसका उद्देश्य केवल ग्राम देवताओं के स्थलों पर ध्वज चढ़ाना और पूजा-अर्चना करना नहीं, बल्कि पीढ़ियों से ग्रामीण जनजीवन की आस्था के केंद्र रहे देवस्थलों को संरक्षित, स्वच्छ, सुंदर और विकसित करने के लिए जनभागीदारी का व्यापक अभियान खड़ा करना है।

गांवों के पारंपरिक देवस्थल ग्रामीण समाज की सांस्कृतिक पहचान, सामुदायिक एकजुटता और लोक आस्था के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। ध्वजा यात्रा के माध्यम से इन स्थलों के संरक्षण के साथ ग्राम शक्तिपीठों को एक सूत्र में जोड़ने, लोगों को अपनी धार्मिक विरासत के प्रति जागरूक करने और देवस्थलों की नियमित साफ-सफाई के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया जाएगा। यात्रा के प्रत्येक पड़ाव पर ग्राम देवताओं की पूजा-अर्चना और ध्वज प्रतिष्ठा होगी। वहीं, निर्धारित विश्राम स्थलों पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से स्थानीय परंपराओं और लोक संस्कृति को भी मंच मिलेगा।

गिरजाबंद हनुमान मंदिर से होगा शुभारंभ, रतनपुर महामाया मंदिर में समापन

ध्वजा यात्रा की शुरुआत रविवार, 11 अक्टूबर को गिरजाबंद हनुमान मंदिर में विधिवत ध्वज पूजन के साथ होगी। इसके बाद विधायक सुशांत शुक्ला के नेतृत्व में यात्रा निर्धारित मार्ग से आगे बढ़ेगी। सात दिनों तक गांवों, चौक-चौराहों और प्रमुख देवी-देवता स्थलों से गुजरती हुई यह यात्रा 17 अक्टूबर को रतनपुर स्थित महामाया मंदिर परिसर पहुंचेगी। अंतिम दिन यहां देवी दर्शन के साथ ध्वज प्रतिष्ठा और पूजा-अर्चना के कार्यक्रम के साथ यात्रा का समापन होगा।

इस सात दिवसीय आयोजन में प्रतिदिन सुबह 9 बजे पदयात्रा प्रारंभ होगी। यात्रा के दौरान संबंधित गांवों के ग्राम देवताओं की पूजा की जाएगी और ध्वज अर्पित किए जाएंगे। ग्रामीणों से देवस्थलों को नियमित रूप से स्वच्छ रखने तथा उनकी सुंदरता और गरिमा बनाए रखने की अपील भी की जाएगी।

सात दिन में आस्था के सात पड़ाव, गांव-गांव पहुंचेगा संरक्षण का संदेश

पहला दिन, 11 अक्टूबर रविवार: गिरजाबंद हनुमान मंदिर में ध्वज पूजन के बाद यात्रा प्रारंभ होगी। नवागांव-रतनपुर रेस्ट हाउस, ओछिनपारा चौक, खैरखुंडी, सरवनदेवरी, लखराम, अकलतरी, गढ़वट और बाम्हू नहर रोड होते हुए यात्रा टेकर पहुंचेगी। पहले दिन रात्रि विश्राम अकलतरी में प्रस्तावित है। दोपहर के भोजन की व्यवस्था ग्राम लखराम में श्री सचिन तिवारी के सहयोग से निर्धारित है।

दूसरा दिन, 12 अक्टूबर सोमवार: यात्रा टेकर से प्रारंभ होकर गिधौरी, नेवसा, उसराभांठा, जाली, बेलतरा, बेलपारा, सलखा, बरपाली, धौरामुड़ा, करमा, बसहा और टेकर चौक होते हुए आगे बढ़ेगी। दूसरे दिन रात्रि विश्राम ग्राम सलखा में होगा। भाड़ी में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। भोजन व्यवस्था के लिए श्री हिलेन्द्र ठाकुर का नाम निर्धारित कार्यक्रम में उल्लेखित है।

तीसरा दिन, 13 अक्टूबर मंगलवार: यात्रा खैरा (ड) से प्रारंभ होकर डगनिया, सेलर, गुड़ी चौक, मोहरा, उरतुम, परसाही, डबहीपारा और उरैहापारा होते हुए मां वैष्णो देवी मंदिर, नगोई पहुंचेगी। यहां रात्रि विश्राम तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। दोपहर के भोजन की व्यवस्था सेलर/मोहरा में निर्धारित है, जिसके लिए श्री हिलेन्द्र ठाकुर का नाम दिया गया है।

चौथा दिन, 14 अक्टूबर बुधवार: मां वैष्णो देवी मंदिर, नगोई से यात्रा प्रारंभ होगी। इसके बाद मां महामाया मंदिर, मां कोसगाई दाई मंदिर, बैमा नगोई, धूरीपारा, पौंसरा, परसदा-परसौड़ी, सेमरा, सेमरी, भरारी, नहरीभांठा, जलसो चौक और सेमरताल होते हुए यात्रा आगे बढ़ेगी। रात्रि विश्राम सेमरताल में निर्धारित है। दोपहर के भोजन की व्यवस्था ग्राम परसदा में श्री चंदन यादव के सहयोग से प्रस्तावित है। सेमरताल में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होगा।

पांचवां दिन, 15 अक्टूबर गुरुवार: यात्रा सेमरताल से प्रारंभ होकर गतौरी, भदौरियाखार, रमतला, सेंदरी, कछार और लोफंदी पहुंचेगी। पांचवें दिन रात्रि विश्राम लोफंदी में प्रस्तावित है। दोपहर के भोजन की व्यवस्था ग्राम रमतला में श्री चंदन यादव के सहयोग से निर्धारित है। लोफंदी में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा।

छठवां दिन, 16 अक्टूबर शुक्रवार: यात्रा लोफंदी से प्रारंभ होकर लछनपुर, गोंदईया, ओकलाहीपारा, पेंडरवा उ और झेंझराडीह होते हुए रानीगांव पहुंचेगी। छठवें दिन रात्रि विश्राम रानीगांव में निर्धारित है। दोपहर के भोजन की व्यवस्था ग्राम गोंदईया में श्री सचिन तिवारी के सहयोग से प्रस्तावित है। रानीगांव में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होगा।

सातवां दिन, 17 अक्टूबर शनिवार: अंतिम दिन यात्रा रानीगांव से प्रारंभ होकर मदनपुर, सिंघरी चौक, भरवीडीह, भैरवबाबा मंदिर और सिद्धि विनायक मंदिर होते हुए रतनपुर स्थित महामाया मंदिर परिसर पहुंचेगी। यहां मां महामाया के दर्शन, ध्वज प्रतिष्ठा और पूजा-अर्चना के साथ सात दिवसीय यात्रा का समापन होगा। दोपहर के भोजन की व्यवस्था सिद्धि विनायक मंदिर, रतनपुर में निर्धारित है।

ग्राम देवस्थलों को स्वच्छ और सुंदर बनाने का आह्वान

विधायक सुशांत शुक्ला के अनुसार, यात्रा का महत्वपूर्ण उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित ग्राम देवताओं के स्थानों को संरक्षित करना और उनके विकास के लिए सामूहिक संकल्प तैयार करना है। गांवों में स्थापित देवस्थल केवल पूजा-अर्चना के स्थान नहीं, बल्कि स्थानीय इतिहास, परंपराओं और सामाजिक जीवन से जुड़े केंद्र हैं। इनकी स्वच्छता, सुंदरता और सुव्यवस्थित विकास के लिए ग्रामीणों की भागीदारी आवश्यक है।

यात्रा के दौरान प्रत्येक ग्राम पंचायत में ग्राम देवताओं की पूजा-अर्चना की जाएगी। देवस्थलों पर ध्वज अर्पित करने के साथ लोगों से अपील की जाएगी कि वे इन स्थानों को नियमित रूप से स्वच्छ रखें और उनकी गरिमा बनाए रखने में योगदान दें। इस पहल का उद्देश्य धार्मिक आयोजन को जनजागरूकता और सामाजिक सहभागिता से जोड़ना है।

ग्राम शक्तिपीठों को एक सूत्र में जोड़ने का संकल्प

विधायक सुशांत शुक्ला ने कहा कि पदयात्रा के माध्यम से बेलतरा विधानसभा के गांवों में स्थित ग्राम शक्तिपीठों और देवस्थलों को एक सूत्र में जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही प्रत्येक स्थल के संरक्षण और उन्नयन के लिए सामूहिक संकल्प लिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष निकाली गई यात्रा के बाद कई गांवों में ग्राम देवताओं के स्थलों के उन्नयन का काम प्रारंभ हुआ है। इस अनुभव के आधार पर इस वर्ष भी ग्रामीणों को अपने पारंपरिक देवस्थलों की देखरेख और विकास के लिए प्रेरित किया जाएगा। उद्देश्य यह है कि धार्मिक आस्था के ये केंद्र स्वच्छ, सुव्यवस्थित और आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित रहें।

विश्राम स्थलों पर लोक संस्कृति की छटा

ध्वजा यात्रा के दौरान निर्धारित पड़ावों पर रात्रि विश्राम के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के जरिए ग्रामीण परिवेश की सांस्कृतिक परंपराओं, सामाजिक सहभागिता और लोक जीवन को प्रोत्साहन देने की योजना है। गांवों में यात्रा के पहुंचने पर पूजा-अर्चना, ध्वज अर्पण और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से धार्मिक वातावरण निर्मित होगा।

इस प्रकार ध्वजा यात्रा को केवल एक धार्मिक पदयात्रा तक सीमित न रखते हुए ग्राम देवस्थलों के संरक्षण, स्वच्छता, विकास और ग्रामीण सांस्कृतिक विरासत के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी से जोड़ने की पहल की जा रही है।

आयोजन में ये रहे उपस्थित

ध्वजा यात्रा की तैयारियों और आयोजन से जुड़े अवसर पर विधायक सुशांत शुक्ला, धौरामुड़ा के सरपंच नीलेश राव, जिला पंचायत सभापति जागेंद्र कश्यप, उत्तर मंडल मंत्री छत्रपाल सिंह ठाकुर, किशोर सिंह राजपूत, पीसी जायसवाल, सरपंच प्रतिनिधि अनिल राव सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

ध्वजा यात्रा 2026 एक नजर में

  • अवधि: 11 से 17 अक्टूबर 2026
  • नेतृत्व: बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला
  • प्रारंभ: गिरजाबंद हनुमान मंदिर में ध्वज पूजन
  • कार्यक्रम: ग्राम देवताओं की पूजा, ध्वज अर्पण, स्वच्छता के प्रति जागरूकता और देवस्थलों के उन्नयन का संकल्प
  • सांस्कृतिक आयोजन: निर्धारित पड़ावों पर कार्यक्रम
  • समापन: रतनपुर स्थित मां महामाया मंदिर परिसर में दर्शन, ध्वज प्रतिष्ठा और पूजा-अर्चना

आस्था से संरक्षण तक … बेलतरा की यह सात दिवसीय ध्वजा यात्रा ग्राम देवस्थलों की परंपरा को सहेजने, गांवों की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने और धार्मिक स्थलों के विकास में जनभागीदारी बढ़ाने की पहल के रूप में आयोजित की जा रही है।

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