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मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात करें, तनाव को न बनने दें बीमारी की वजह

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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सिम्स में जागरूकता रैली और कार्यक्रम आयोजित, एक महीने तक चलेगा विशेष अभियान; विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों से सलाह लेने की दी गई सीख

बिलासपुर। मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए समस्याओं को मन में दबाने के बजाय अपनों से संवाद करना जरूरी है। समय पर अपनी परेशानी साझा करने और विशेषज्ञों की मदद लेने से मानसिक समस्याओं से निपटने में मदद मिल सकती है। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर शनिवार को छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने यह संदेश दिया। इस दौरान जागरूकता रैली निकाली गई और विद्यार्थियों को तनाव प्रबंधन, नशामुक्त जीवनशैली तथा मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील रहने के लिए प्रेरित किया गया।

रैली निकालकर दिया जागरूकता का संदेश

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर सिम्स महाविद्यालय में सुबह मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता रैली निकाली गई। इसमें सिम्स महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं के साथ नर्सिंग महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने भी भाग लिया। सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने रैली को संबोधित करने के बाद हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रैली के माध्यम से लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने और मानसिक समस्याओं को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करने का संदेश दिया गया।

इसके बाद सिम्स ऑडिटोरियम में मुख्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें मुख्य अतिथि अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति और विशिष्ट अतिथि सिम्स चिकित्सालय के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह उपस्थित रहे।

संवाद से दूर हो सकती हैं मानसिक समस्याएं

कार्यक्रम में डॉ. रमणेश मूर्ति ने संगीत और खेल के उदाहरणों के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि मानसिक परेशानी का सामना कर रहे व्यक्ति को अपने आसपास के लोगों से संवाद स्थापित करना चाहिए और अपनी समस्याओं को साझा करने में संकोच नहीं करना चाहिए। समय पर बातचीत और सहयोग मिलने से व्यक्ति को मानसिक तनाव से उबरने में मदद मिल सकती है।

वहीं, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक स्वास्थ्य के बीच संबंध पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि तनाव और खराब मानसिक स्थिति का असर शरीर पर भी पड़ सकता है। इसलिए तनावमुक्त रहने, तनाव को नियंत्रित करने के उपाय अपनाने और स्वस्थ जीवनशैली बनाए रखने की जरूरत है।

मानसिक रोग से उबर चुके लोगों के अनुभव भी महत्वपूर्ण

मनोरोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सुजीत कुमार नायक ने विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 2026 की थीम “जीने के अनुभवों को सुना जाए: सच्ची आवाज़ें, सच्चा बदलाव” पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का सामना कर चुके लोगों के अनुभवों को सुनना और समझना जरूरी है। ऐसे अनुभव मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने, उपचार के प्रति दृष्टिकोण बदलने और समाज में व्याप्त भ्रांतियों को दूर करने में सहायक हो सकते हैं।

उन्होंने तनावमुक्त जीवनशैली अपनाने के लिए लोगों को जागरूक और प्रेरित किया। साथ ही मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण विकसित करने और जरूरतमंद लोगों को सहयोग देने पर जोर दिया।

पढ़ाई के तनाव से निपटने के बताए तरीके

मनोरोग विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. राकेश कुमार जांगड़े ने अपने व्याख्यान में मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान होने वाले तनाव, दबाव और अन्य समस्याओं से सामंजस्य स्थापित करने के उपाय बताए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी समस्याओं को पहचानना चाहिए और जरूरत पड़ने पर उचित मार्गदर्शन लेना चाहिए।

कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थियों को नशामुक्त जीवनशैली अपनाने, मानसिक समस्याओं को नजरअंदाज नहीं करने तथा आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श लेने के लिए प्रेरित किया गया। मानसिक स्वास्थ्य से प्रभावित व्यक्तियों को उचित चिकित्सकीय सलाह और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की जानकारी भी दी गई।

एक महीने तक चलेगा जागरूकता अभियान

भारत सरकार के सेवा संकल्प अभियान 2026 और राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता अभियान 10 अक्टूबर से 10 नवंबर 2026 तक चलाया जाएगा। इस अवधि में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने, मानसिक समस्याओं को लेकर समाज में फैली गलत धारणाओं को दूर करने और जरूरतमंद लोगों को उचित सहायता लेने के लिए प्रेरित करने पर जोर रहेगा।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दिया संदेश

कार्यक्रम में शासकीय नर्सिंग महाविद्यालय, लगरा बिलासपुर, बिलासा नर्सिंग महाविद्यालय, बिलासपुर तथा संदीपनी नर्सिंग महाविद्यालय, मस्तूरी के छात्र-छात्राओं और शिक्षकों का सहयोग रहा। नर्सिंग विद्यार्थियों ने विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से समाज में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर प्रचलित भ्रांतियों को उजागर किया। प्रस्तुतियों के जरिए लोगों को मानसिक समस्याओं को समझने, प्रभावित व्यक्तियों के प्रति संवेदनशील व्यवहार करने और जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम में डॉ. जेपी स्वाई, डॉ. शिक्षा जांगड़े, डॉ. सागरिका प्रधान, डॉ. अमित ठाकुर, डॉ. गौरीशंकर सिंह, डॉ. मोनिका साहू, डॉ. राकेश जांगड़े और डॉ. रचना चंदेकर उपस्थित रहे। मनोरोग विभाग से डॉ. अंकिता खरे, डॉ. अंशुल गुप्ता, डॉ. प्रियांश दुबे, डॉ. सत्यस्मिता जेना, डॉ. तुलेश्वर, डॉ. आयुष, डॉ. यश और डॉ. कनिष्क ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई।

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