




छत्तीसगढ़ के घने जंगलों से एक ऐसा सनसनीखेज खुलासा सामने आया है, जिसने भारत की वन सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बाघ और तेंदुए जैसे संरक्षित वन्यजीवों के अवैध शिकार में इस बार कोई बाहरी गिरोह नहीं, बल्कि खुद सिस्टम के भीतर का चेहरा शामिल मिला—एक डिप्टी रेंजर। दंतेवाड़ा और बीजापुर के जंगलों में फैले इस संगठित शिकार रैकेट का पर्दाफाश होते ही वन महकमे में हड़कंप मच गया है।
वन विभाग की सबसे बड़ी कार्रवाई: अंदर से ही टूट रही थी सुरक्षा दीवार
रायपुर, 18 मार्च 2026।
वन एवं वन्यजीव संरक्षण के तहत अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक में वन विभाग ने बाघ और तेंदुए के अवैध शिकार में शामिल डिप्टी रेंजर देवी प्रसाद ओयाम सहित 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई दंतेवाड़ा और बीजापुर के घने व संवेदनशील जंगलों में की गई, जहां लंबे समय से शिकार की गतिविधियों की आशंका जताई जा रही थी।
खुफिया सूचना से खुला ‘इनसाइड नेटवर्क’
वन विभाग को इनपुट मिला था कि जंगलों में लोहे के फंदे लगाकर बड़े वन्यजीवों को निशाना बनाया जा रहा है। सूचना के बाद विभाग और राज्य उड़नदस्ता टीम ने संयुक्त ऑपरेशन शुरू किया। लगातार निगरानी और तकनीकी जांच के बाद एक संगठित शिकार गिरोह का पर्दाफाश हुआ, जिसमें विभाग का ही कर्मचारी शामिल पाया गया।
डिप्टी रेंजर की मिलीभगत: जंगल के दरवाजे खुद खोले गए
जांच में सामने आया कि डिप्टी रेंजर देवी प्रसाद ओयाम ने शिकारियों को जंगल में सुरक्षित प्रवेश, मूवमेंट और शिकार के लिए मदद पहुंचाई।
इस मिलीभगत के चलते शिकारियों ने लोहे के तार के फंदों में मांस लगाकर बाघ और तेंदुए को फंसाया, जिससे दोनों की दर्दनाक मौत हो गई।
3 साल के बाघ की मौत, तेंदुए की खाल जब्त
बरामद बाघ की उम्र लगभग 3 वर्ष बताई गई है।
आरोपियों की योजना इन वन्यजीवों की खाल को रायपुर में ऊंचे दामों पर बेचने की थी।
पूछताछ के आधार पर ग्राम केशापुर में दबिश देकर तेंदुए की खाल बरामद की गई।
गिरफ्तार आरोपी: पूरा नेटवर्क बेनकाब
इस शिकार गिरोह में शामिल मुख्य आरोपियों में:
लक्ष्मण तेलाम
देवीराम ओयाम
रमेश कुड़ियाम
फरसोन पोयामी
सेमला रमेश
सुखराम पोडियाम
छत्रू कुड़ियाम
इसके अलावा मासो ओयाम और अर्जुन भोगामी को भी गिरफ्तार किया गया।
कानूनी शिकंजा: सीधे जेल भेजे गए आरोपी
वनमंडलाधिकारी दंतेवाड़ा श्री रामकृष्णा के अनुसार,
बाघ और तेंदुआ दोनों ही अनुसूची-1 के तहत संरक्षित वन्यजीव हैं।
सभी आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की कड़ी धाराओं में मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
टॉप लेवल मॉनिटरिंग में हुआ ऑपरेशन
यह पूरी कार्रवाई वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देश पर की गई।
ऑपरेशन की निगरानी:
प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख व्ही. श्रीनिवास राव
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण कुमार पाण्डेय
के मार्गदर्शन में टीम ने इस पूरे गिरोह का भंडाफोड़ किया।
टीम को सम्मान, जांच तेज
कार्रवाई की सफलता पर वरिष्ठ अधिकारियों ने पूरी टीम को बधाई दी है।
संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों को सम्मानित करने के निर्देश दिए गए हैं।
साथ ही मामले की विस्तृत जांच कर जल्द न्यायालय में चालान पेश करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
वन्यजीव संरक्षण पर सख्त रुख
वन मंत्री केदार कश्यप ने स्पष्ट किया कि
राज्य में वन और वन्यजीवों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उन्होंने दो टूक कहा कि
शिकार जैसे गंभीर अपराध में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा—चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हो।
(यह खबर राष्ट्रीय स्तर पर वन्यजीव संरक्षण तंत्र में सेंध और सिस्टम के भीतर की मिलीभगत का बड़ा खुलासा मानी जा रही है।)

