
बिल्हा विधानसभा में बैठकों का दौर तेज, भीड़ जुटाने पर पूरा फोकस
बिलासपुर।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर 17 मार्च को प्रस्तावित विधानसभा घेराव को लेकर बिलासपुर जिले में सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। मनरेगा बचाओ संग्राम और अवैध अफीम खेती के विरोध में होने वाले इस बड़े प्रदर्शन के लिए अब ब्लॉक स्तर से लेकर गांवों तक तैयारियां तेज कर दी गई हैं।
बिल्हा विधानसभा क्षेत्र में प्रभारी शिबली मेराज खान की मौजूदगी में तीनों ब्लॉकों की संयुक्त बैठक के बाद अब क्षेत्रवार बैठकों का सिलसिला शुरू हो गया है। इन बैठकों में साफ निर्देश दिए जा रहे हैं कि अधिक से अधिक संख्या में कार्यकर्ता घेराव में शामिल हों, ताकि प्रदर्शन को प्रभावी बनाया जा सके।
रणनीति का फोकस—भीड़ ही ताकत
बैठकों में कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि जनशक्ति का प्रदर्शन होगा। इसके लिए हर पंचायत, हर बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंपी जा रही है।
गांवों से बसों और निजी वाहनों की व्यवस्था
युवा और महिला कार्यकर्ताओं की अलग-अलग टीम
सोशल मीडिया और स्थानीय नेटवर्क के जरिए संपर्क अभियान
हर ब्लॉक से निर्धारित संख्या में कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की योजना
नेताओं का कहना है कि जितनी बड़ी संख्या होगी, उतना ही सरकार पर दबाव बनेगा।
मुद्दों को लेकर आक्रामक रुख
इस घेराव के जरिए कांग्रेस मनरेगा में कथित कटौती और गड़बड़ी के मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाने की तैयारी में है। साथ ही अवैध अफीम खेती के खिलाफ कार्रवाई को लेकर भी सरकार को घेरने की रणनीति बनाई गई है।
बैठक में कहा गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा काम की कमी से मजदूरों को परेशानी हो रही है, वहीं अफीम की अवैध खेती कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बनी हुई है।
गांव-गांव में बैठक, कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी
बिल्हा विधानसभा में अब सेक्टर और ग्राम स्तर पर बैठकों का दौर शुरू हो गया है। हर स्तर पर कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी जा रही है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों से लोगों को लामबंद करें।
नेताओं ने साफ कहा कि यह आंदोलन सिर्फ पार्टी का नहीं, बल्कि आम जनता के हक की लड़ाई है—इसलिए हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है।
घेराव को लेकर माहौल गरम
लगातार हो रही बैठकों और तैयारियों से साफ है कि कांग्रेस इस बार विधानसभा घेराव को बड़े शक्ति प्रदर्शन में बदलने की रणनीति पर काम कर रही है।
अब देखना यह होगा कि 17 मार्च को होने वाला यह घेराव कितना असरदार साबित होता है और सरकार पर कितना दबाव बना पाता है।

