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कलेक्टर जनदर्शन में 10 बार शिकायत, हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी कार्रवाई नहीं! 80 फीट सड़क पर कब्जे को किसका संरक्षण?

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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कांग्रेस नेता ने उठाए सवाल, नगरीय प्रशासन सचिव तक पहुंचा मामला; नापजोख में अतिक्रमण सामने आने का दावा, फिर भी कॉम्प्लेक्स पर कार्रवाई क्यों नहीं?
बिलासपुर। शहर के निराला नगर स्थित पुराने बस स्टैंड मार्ग की 80 फीट चौड़ी सड़क पर कथित अवैध कॉम्प्लेक्स निर्माण का मामला अब प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। कांग्रेस नेता का आरोप है कि इस मामले में कलेक्टर जनदर्शन में 10 बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। नगर निगम आयुक्त से लेकर उच्चाधिकारियों तक दस्तावेज पहुंचाए गए, नगर निगम की नापजोख में अतिक्रमण सामने आने का दावा किया गया और छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भी 30 जून 2026 को जांच के बाद कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बावजूद कथित कब्जा जस का तस बना हुआ है।
मामला अब नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव तक पहुंच गया है। शिकायतकर्ता ने कलेक्टर को पत्र सौंपकर नगर निगम के भवन अधिकारी की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि प्रभावशाली कब्जाधारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने के पीछे विभागीय स्तर पर संरक्षण और मिलीभगत की आशंका है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि तत्काल कार्रवाई कर सड़क को कब्जे से मुक्त नहीं कराया गया, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की जाएगी।
जनदर्शन में 10 बार शिकायत, फिर भी सुनवाई क्यों नहीं?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल कलेक्टर जनदर्शन की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहा है। शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने इस मामले में 10 बार जनदर्शन में शिकायत की, लेकिन इसके बाद भी कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं हुई। आखिर बार-बार शिकायत करने के बाद भी समस्या का समाधान क्यों नहीं हुआ? क्या शिकायतों पर जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया केवल कागजों तक सीमित रह गई, या जिम्मेदार अधिकारियों ने जानबूझकर मामले को लंबित रखा?
शिकायतकर्ता का कहना है कि वे अक्टूबर 2024 से लगातार नगर निगम आयुक्त और अन्य उच्चाधिकारियों को निराला नगर के कुछ निवासियों द्वारा 80 फीट चौड़े मुख्य मार्ग की जमीन पर कथित अवैध कॉम्प्लेक्स निर्माण से संबंधित दस्तावेज सौंपते आ रहे हैं। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं होना प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल खड़े करता है।
यदि शिकायतकर्ता के दावे के अनुसार जनदर्शन में 10 बार शिकायत की गई, तो यह भी जांच का विषय है कि प्रत्येक शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई, किस अधिकारी को जांच की जिम्मेदारी दी गई और अब तक अतिक्रमण हटाने का निर्णय क्यों नहीं लिया गया।
निगम ने राजीनामा आवेदन निरस्त किया, कब्जा फिर भी बरकरार
शिकायत के अनुसार, नगर निगम ने 15 दिसंबर 2025 को संबंधित कब्जाधारियों का राजीनामा आवेदन निरस्त कर दिया था। इसके बावजूद मौके से कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं की गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जब निगम स्तर पर आवेदन निरस्त हो चुका था, तो उसके बाद नियमानुसार कार्रवाई आगे क्यों नहीं बढ़ाई गई?
यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि मामला किसी सामान्य निर्माण विवाद तक सीमित नहीं है। आरोप 80 फीट चौड़े मुख्य मार्ग की जमीन पर कॉम्प्लेक्स निर्माण का है। ऐसे में सड़क की वास्तविक सीमा, जमीन के स्वामित्व संबंधी दस्तावेज और निर्माण की वैधता की जांच कर स्थिति स्पष्ट करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
हाईकोर्ट के निर्देश और नापजोख के बाद भी कार्रवाई का इंतजार
मामले में 30 जून 2026 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जांच के बाद कार्रवाई के निर्देश दिए थे। शिकायतकर्ता के अनुसार, नगर निगम के अमले ने मौके पर नापजोख भी की, जिसमें सड़क की जमीन पर अतिक्रमण सामने आया। इसके बावजूद कथित अवैध निर्माण को हटाने के लिए कार्रवाई नहीं की गई।
अब सवाल यह है कि जब शिकायतकर्ता न्यायालय के निर्देशों का हवाला दे रहा है और निगम की नापजोख में अतिक्रमण सामने आने का दावा कर रहा है, तो कार्रवाई किस स्तर पर अटकी हुई है? क्या संबंधित अधिकारियों ने जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी की? यदि की, तो उसका नतीजा क्या निकला? और यदि कार्रवाई लंबित है, तो इसकी जवाबदेही किसकी है?
इन सवालों का जवाब संबंधित आदेशों, नापजोख रिपोर्ट और विभागीय रिकॉर्ड से ही स्पष्ट हो सकेगा।
न रजिस्ट्री, न बी-1, न डायवर्सन, न स्वीकृत नक्शा होने का आरोप
कांग्रेस नेता ने शिकायत में दावा किया है कि संबंधित पक्षों के पास जमीन की रजिस्ट्री, बी-1, डायवर्सन अथवा कॉम्प्लेक्स निर्माण का स्वीकृत नक्शा नहीं है। इसके बावजूद 80 फीट चौड़े मुख्य मार्ग की जमीन पर निर्माण किए जाने का आरोप लगाया गया है।
यदि संबंधित निर्माण के लिए जरूरी दस्तावेज और स्वीकृतियां उपलब्ध नहीं हैं, तो यह जांच का विषय है कि निर्माण कैसे हुआ और संबंधित विभाग ने समय रहते हस्तक्षेप क्यों नहीं किया। वहीं, दस्तावेजों की वास्तविक स्थिति राजस्व अभिलेखों, निगम के रिकॉर्ड और संबंधित पक्षों के जवाब से ही प्रमाणित होगी।
50 मीटर आगे दूसरे निर्माणों पर कार्रवाई, यहां नरमी क्यों?
शिकायतकर्ता ने शिकायत में कथित दोहरे मापदंड का मुद्दा भी उठाया है। उनका कहना है कि विवादित कॉम्प्लेक्स से करीब 50 मीटर आगे अन्य निर्माणों को तोड़ा गया, लेकिन इस निर्माण के मामले में नगर निगम का अमला कार्रवाई नहीं कर रहा है।
यदि एक ही मार्ग पर अतिक्रमण के दूसरे मामलों में कार्रवाई की गई, तो इस कॉम्प्लेक्स के मामले में अलग रवैया क्यों अपनाया जा रहा है? क्या दोनों मामलों में जमीन की स्थिति और निर्माण की वैधता अलग है, या फिर कार्रवाई के मानदंड समान रूप से लागू नहीं किए जा रहे हैं? इन सवालों का जवाब निगम को रिकॉर्ड के आधार पर देना चाहिए।
भवन अधिकारी पर साठगांठ का आरोप, बैकहो लोडर से कार्रवाई क्यों?
कलेक्टर को दिए गए पत्र में नगर निगम के भवन अधिकारी की भूमिका पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने संबंधित अधिकारी और कथित कब्जाधारियों के बीच साठगांठ की आशंका जताई है। शिकायत में अधिकारी के निलंबन और ईंधन गबन से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया गया है। उनका आरोप है कि इसी कथित मिलीभगत के कारण अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ रही है।
शिकायतकर्ता ने यह भी सवाल उठाया है कि नगर निगम का बैकहो लोडर उपलब्ध होने के बावजूद कथित अवैध निर्माण पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। हालांकि, अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों और कथित साठगांठ की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित अधिकारी और निर्माणकर्ताओं का पक्ष सामने आने के बाद ही इन आरोपों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
नगरीय प्रशासन सचिव तक पहुंचा मामला, अब जवाबदेही तय करने की मांग
लगातार शिकायतों, जनदर्शन में 10 बार गुहार लगाने, निगम की नापजोख और हाईकोर्ट के निर्देशों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप अब प्रशासनिक जवाबदेही का बड़ा सवाल बन गया है। मामला नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव तक पहुंचने के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभाग इस प्रकरण में क्या कदम उठाता है।
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, संबंधित अधिकारियों की भूमिका तय की जाए और यदि सड़क की जमीन पर अवैध कब्जा प्रमाणित होता है, तो नियमानुसार उसे हटाया जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि कार्रवाई नहीं होने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की जाएगी।
अब प्रशासन से सीधे सवाल
कलेक्टर जनदर्शन में 10 बार शिकायत किए जाने के दावे के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
15 दिसंबर 2025 को राजीनामा आवेदन निरस्त होने के बाद अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया क्यों आगे नहीं बढ़ी?
हाईकोर्ट के 30 जून 2026 के निर्देश के बाद जांच और कार्रवाई की वास्तविक स्थिति क्या है?
निगम की नापजोख रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष निकले और उस पर क्या कार्रवाई की गई?
करीब 50 मीटर आगे दूसरे निर्माणों पर कार्रवाई हुई, तो इस कॉम्प्लेक्स के मामले में क्या अलग स्थिति है?
भवन अधिकारी की भूमिका और कथित मिलीभगत के आरोपों की जांच कौन करेगा?
नगरीय प्रशासन सचिव के स्तर पर शिकायत पहुंचने के बाद अब कार्रवाई की समयसीमा क्या होगी?
इन सवालों का जवाब केवल आश्वासन से नहीं, बल्कि जांच रिपोर्ट, राजस्व रिकॉर्ड और मौके पर नियमानुसार कार्रवाई से ही मिलेगा। अब निगाहें जिला प्रशासन, नगर निगम और नगरीय प्रशासन विभाग पर हैं कि वे शिकायतों पर जवाबदेही तय करते हैं या 80 फीट सड़क पर कथित अतिक्रमण का मामला आगे भी लंबित रहता है।

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