


बिलासपुर। ऐतिहासिक धार्मिक नगरी रतनपुर मे विराजमान माँ महामाया दाई की पूजा सेवा अर्जी करने हेतु सर्व आदिवासी समाज रतनपुर इकाई एवं स्थानीय समाजजनों के सामूहिक नेतृत्व मे पुरातन लोकसंस्कृति के साथ प्रदेश की सुख समृद्धि के कामना के की पंचमी भेंट आयोजन हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ जिसमे रतनपुर परिक्षेत्र, ब्लॉक, जिला बिलासपुर सहित अन्य जिलों के भी सामजिक जन एवं पदाधिकारीगण हजारों की संख्या म में शामिल हुवे यह आयोजन रतनपुर ग्राम जूना शहर के पौराणिक स्थल बादल महल से पारम्परिक पूजा अर्चना करने के बाद आरम्भ होकर पारम्परिक बाना, ध्वजा बाजे गाजे, सेवा गान करते, आतिशबाजी के साथ माँ लखनी देवी मुख्यमार्ग होते हुये 🙏माँ महामाया दाई मंदिर प्रांगण पहुंचा जहाँ पर समाज के बैगा / भूमका सहित आयोजनकर्ता समाज प्रमुखो द्वारा अपने कुल देवी माँ महामाया दाई की पारम्परिक रूढ़ि प्रथा परम्परा अनुसार पूजा अर्चना करके मातारानी महामाया दाई को चुनरी, माला,श्रृंगार सहित नया अन्न भोग अर्पण करके मातारानी से समाज की आपसी एकता, प्रेम, भाईचारा सुःख – शांति, समृद्धि सहित प्रदेश एवं क्षेत्रवासियों के खुशहाली के लिये मंगल कामना की गईं कार्यक्रम के आयोजनकर्ता के प्रमुख रूप मे प्रदेश अध्यक्ष सुभाष सिंह परते, आयुष सिंह राज, युवराज प्रधान, शिव नारायण चेचाम, धर्माचार्य के पी प्रधान,राजेंद्र जगत, ध्रुवा सिंह ध्रुव, हीरा सिंह मरावी, गीताराम जगत, बसंत मरावी, भगत सिंह पोर्ते, सालिक मरकाम, अनिल मरावी, जयसिंह खुसरों, धनसिंह राजवाड़े, ईश्वर प्रधान, सूरज मरकाम, डॉ पंकज सिंह परते,राजेन्द्र जगत,भागीरथी ध्रुव, चरण सिंह राज, विवेक ध्रुव, मनोज मरावी, राजेश नेताम, जनक मरकाम, धन सिंह आर्मो, गोलू सिंह, शिव धुर्व,अविनाश धुर्व ,अभिषेक प्रधान,माखनलाल नेताम, चिंता राम ध्रुव, प्रेम सागर मरकाम, धर्मेद्र श्याम, लाल सिंह मरावी, सहदेव राज,विजय धुर्व इत्यादि समाजिकगण महिला, पुरुष, युवक युवतियाँ पम्परिक वेशभूषा, परिधान के साथ हजारों की संख्या मे सम्मिलित रहें ।
रतनपुर में पंचमी भेंट संपन्न,
इस अवसर पर सर्व आदिवासी समाज के प्रदेश अध्यक्ष युवा सुभाष सिंह परते ने कहा कि हमें अपनी रूढ़िजन परंपरा को कायम रखते हुए माँ महामाया के प्रति आस्था बनाए रखना चाहिए। प्रदेश के सुख समृद्धि की कामना के साथ उन्होंने कहा कि अपनी संस्कृति, अपनी परंपरा और अपने रीति-रिवाजों को हमें हमेशा याद रखना चाहिए और नई पीढ़ी को भी सिखाना चाहिए, तभी समाज की पहचान बनी रहेगी।
उक्त साय जानकारी प्रदेश सचिव आयुष सिंह राज ने दी।
