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24 लाख के रावण दहन पर कांग्रेस का हमला, विजय केशरवानी बोले- अरपांचल को अलग नगर निगम कब देंगे?

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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एक ही निगम में दो शासकीय रावण दहन पर उठाए सवाल, सीएसआर राशि से लेकर टेंडर तक का हिसाब मांगा; 24 वार्डों वाले अरपांचल की बदहाली गिनाकर भाजपा को चुनावी वादा याद दिलाया, बोले- सरकार बताए कब बनेगा अलग नगर निगम
बिलासपुर। एक तरफ अरपांचल में करीब 24 लाख रुपए के शासकीय दशहरा आयोजन पर सवाल उठ रहे हैं, दूसरी तरफ 24 वार्डों वाले अरपांचल को अलग नगर निगम बनाने का वादा अब तक अधूरा होने का मुद्दा फिर गरमा गया है। पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं बेलतरा विधानसभा के पूर्व विधायक प्रत्याशी विजय केशरवानी ने रावण दहन के आयोजन से लेकर भाजपा सरकार के चुनावी वादे तक पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने पूछा कि जब पुलिस ग्राउंड में 60 फीट और साइंस कॉलेज मैदान में 80 फीट के रावण का दहन होना है, तो एक ही नगर निगम क्षेत्र में दो-दो शासकीय आयोजनों की जरूरत क्यों पड़ी? साइंस कॉलेज मैदान में अरपांचल लोक मंच वर्षों से अपने खर्च पर रावण दहन कराता आ रहा है, फिर उसी जगह सरकारी आयोजन कराने का औचित्य क्या है? केशरवानी ने आयोजन के लिए बताई जा रही सीएसआर राशि का स्रोत, टेंडर, स्वीकृति और भुगतान की प्रक्रिया सार्वजनिक करने की मांग की है। साथ ही भाजपा को उसके चुनावी वादे की याद दिलाते हुए पूछा है कि एसईसीएल मुख्यालय, अपोलो हॉस्पिटल, केंद्रीय विश्वविद्यालय और बहतराई के अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेल स्टेडियम जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों वाले अरपांचल को अलग नगर निगम का दर्जा आखिर कब मिलेगा? उन्होंने कहा कि क्षेत्र की जनता को केवल उत्सव नहीं, बेहतर प्रशासन, बुनियादी सुविधाएं और विकास की ठोस गारंटी चाहिए।
एक निगम में दो शासकीय रावण दहन, 24 लाख के खर्च पर सवाल
बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र में इस बार दो अलग-अलग स्थानों पर शासकीय रावण दहन को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। पुलिस ग्राउंड में 60 फीट और साइंस कॉलेज मैदान में 80 फीट के रावण दहन के आयोजन के बीच विजय केशरवानी ने भाजपा के जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एक ही नगर निगम क्षेत्र में दो शासकीय आयोजन होने के पीछे जनहित के बजाय राजनीतिक वर्चस्व और श्रेय लेने की प्रतिस्पर्धा की आशंका को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
केशरवानी ने कहा कि जनता जानना चाहती है कि जब एक ही नगर निगम क्षेत्र में दो-दो शासकीय रावण दहन आयोजित किए जा रहे हैं, तो इसके पीछे प्रशासनिक और जनहित का आधार क्या है? क्या दोनों आयोजनों की आवश्यकता का आकलन किया गया था? क्या इनके लिए अलग-अलग प्रशासनिक स्वीकृति और वित्तीय व्यवस्था की गई है? यदि दोनों आयोजन जरूरी हैं, तो नगर निगम को उनका उद्देश्य और खर्च सार्वजनिक करना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी धार्मिक या सांस्कृतिक आयोजन से नहीं है। दशहरा और रावण दहन सामाजिक एकता, सांस्कृतिक परंपरा और जनभागीदारी के प्रतीक हैं। सवाल यह है कि एक ही नगर निगम में दो शासकीय आयोजन क्यों किए जा रहे हैं और अरपांचल के आयोजन पर करीब 24 लाख रुपए खर्च होने की बात सामने आने के बाद इसकी वित्तीय व्यवस्था की पूरी जानकारी जनता से क्यों साझा नहीं की जा रही है।
सीएसआर के 24 लाख रुपए कहां से आए, नगर निगम सार्वजनिक करे हिसाब
अरपांचल में शासकीय दशहरा उत्सव पर करीब 24 लाख रुपए खर्च होने की बात उठाते हुए केशरवानी ने नगर निगम प्रशासन से राशि के स्रोत और उपयोग की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है।
उन्होंने पूछा कि यदि आयोजन के लिए कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) की राशि का उपयोग किया जा रहा है, तो यह पैसा किस कंपनी या संस्था से प्राप्त हुआ है? क्या राशि नगर निगम को मिल चुकी है? यदि राशि प्राप्त हो गई है, तो उसकी तारीख, स्वीकृति आदेश और संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक किए जाने चाहिए। यदि राशि अभी प्राप्त नहीं हुई है, तो टेंडर जारी करने और आयोजन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का वित्तीय आधार क्या है?
केशरवानी ने कहा कि नगर निगम को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि आयोजन का टेंडर किस विभाग या संस्था ने जारी किया, निविदा में कितनी एजेंसियों ने भाग लिया, चयनित एजेंसी कौन है और भुगतान किस प्रक्रिया के तहत किया जाएगा।
उन्होंने आयोजन की अनुमानित लागत, प्रशासनिक स्वीकृति, कार्यादेश, भुगतान की शर्तें और आयोजन के बाद उपयोगिता प्रमाण-पत्र से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है।
उनका कहना है कि करीब 24 लाख रुपए के आयोजन में पारदर्शिता जरूरी है। जनता को यह जानने का अधिकार है कि पैसा किस स्रोत से आया, किस प्रक्रिया के तहत खर्च किया जा रहा है और खर्च का हिसाब कैसे रखा जाएगा।
महापौर और आयुक्त के बयानों में अंतर है तो दूर करे भ्रम
केशरवानी ने कहा कि यदि आयोजन की राशि को लेकर महापौर और नगर निगम आयुक्त के बयानों में कोई अंतर है, तो प्रशासन को तत्काल स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। राशि सीएसआर मद से मिली है या जिला खनिज न्यास निधि (डीएमएफ), जिला प्रशासन अथवा किसी अन्य मद से इसकी व्यवस्था की गई है, यह स्पष्ट होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सीएसआर और डीएमएफ अलग-अलग वित्तीय व्यवस्थाएं हैं। इसलिए दोनों के नाम और स्रोत को लेकर किसी प्रकार का भ्रम नहीं रहना चाहिए। नगर निगम को संबंधित दस्तावेजों के साथ पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि आयोजन की वित्तीय प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों का जवाब मिल सके।
अरपांचल लोक मंच वर्षों से करा रहा रावण दहन, फिर सरकारी आयोजन क्यों?
विजय केशरवानी ने साइंस कॉलेज मैदान में अरपांचल लोक मंच द्वारा वर्षों से कराए जा रहे रावण दहन का उल्लेख करते हुए कहा कि स्थानीय समिति नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के सहयोग से अपने खर्च पर इस परंपरा को आगे बढ़ाती रही है। यह आयोजन अरपांचल की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बन चुका है।
ऐसे में उसी मैदान पर नगर निगम द्वारा शासकीय आयोजन कराए जाने की आवश्यकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि सरकारी आयोजन का निर्णय लेने से पहले स्थानीय समिति के योगदान, पुरानी परंपरा और क्षेत्र की जरूरतों पर विचार किया जाना चाहिए था।
केशरवानी ने कहा कि उनका उद्देश्य धार्मिक आयोजन का विरोध करना नहीं है, बल्कि यह जानना है कि जब स्थानीय स्तर पर वर्षों से रावण दहन कराया जा रहा है, तो उसी स्थान पर अलग शासकीय आयोजन की जरूरत क्यों पड़ी? क्या नगर निगम ने अरपांचल लोक मंच से समन्वय किया था? यदि किया गया, तो उसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि शासकीय और सामाजिक आयोजनों के बीच समन्वय होना चाहिए, ताकि किसी तरह का विवाद या भ्रम पैदा न हो। प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि आयोजन की जरूरत का आकलन किस आधार पर किया गया।
दूसरे विधानसभा क्षेत्रों में भी शासकीय रावण दहन हो रहे हैं या नहीं?
केशरवानी ने नगर निगम से यह भी पूछा कि क्या बिलासपुर नगर निगम के अंतर्गत आने वाले अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी इसी तरह शासकीय रावण दहन आयोजित किए जा रहे हैं?
यदि अन्य क्षेत्रों में भी ऐसे आयोजन हो रहे हैं, तो सभी आयोजनों की लागत, वित्तीय स्रोत और प्रशासनिक प्रक्रिया की जानकारी सार्वजनिक की जाए। यदि केवल अरपांचल में आयोजन किया जा रहा है, तो इसके चयन का आधार और संबंधित प्रशासनिक निर्णय भी जनता के सामने रखा जाए।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक आयोजनों में पारदर्शिता और समान प्रक्रिया जरूरी है। नगर निगम को यह बताना चाहिए कि आयोजन कहां-कहां कराए जा रहे हैं और उनके लिए कितनी राशि खर्च की जा रही है।
24 वार्डों वाले अरपांचल को अलग नगर निगम कब मिलेगा?
रावण दहन के आयोजन पर सवाल उठाने के साथ केशरवानी ने अरपांचल के लिए अलग नगर निगम बनाने की वर्षों पुरानी मांग को भी प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने कहा कि अरपांचल में 24 वार्ड हैं और यह क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है। यहां एसईसीएल का मुख्यालय, अपोलो हॉस्पिटल सहित प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान, केंद्रीय विश्वविद्यालय, अन्य विश्वविद्यालय और बहतराई का अंतरराष्ट्रीय स्तर का खेल स्टेडियम जैसे महत्वपूर्ण संस्थान मौजूद हैं।
इसके बावजूद क्षेत्र के कई हिस्सों में सड़क, नाली, जलभराव, साफ-सफाई, पेयजल और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं बनी हुई हैं। क्षेत्र का भौगोलिक विस्तार और आबादी बढ़ने के साथ प्रशासनिक जरूरतें भी बढ़ रही हैं। ऐसे में अलग नगर निगम की मांग को लेकर सरकार की स्पष्ट नीति और समयसीमा सामने आनी चाहिए।
केशरवानी ने कहा कि अरपांचल की जनता लंबे समय से अलग नगर निगम की मांग कर रही है। क्षेत्र की आबादी, विस्तार और संस्थागत महत्व को देखते हुए इस मांग पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। केवल बड़े संस्थानों और आयोजनों की मौजूदगी से विकास पूरा नहीं होता। नागरिकों को बेहतर प्रशासन और बुनियादी सुविधाएं मिलना भी जरूरी है।
भाजपा के चुनावी वादे पर सवाल, सरकार बताए अब तक क्या किया?
केशरवानी ने भाजपा के विधानसभा चुनाव घोषणा पत्र में अरपा पार क्षेत्र के लिए अलग नगर निगम बनाने के वादे का उल्लेख करते हुए सरकार से जवाब मांगा है।
उन्होंने पूछा कि अलग नगर निगम के गठन के लिए अब तक क्या प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू की गई है? क्या क्षेत्र का सर्वे कराया गया है? क्या सीमांकन, जनसंख्या आकलन और व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार की गई है? यदि प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, तो उसकी वर्तमान स्थिति क्या है? और यदि अब तक कोई प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है, तो सरकार इसे कब तक शुरू करेगी?
उन्होंने कहा कि चुनाव के समय वादा करना पर्याप्त नहीं है। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि अरपांचल को अलग नगर निगम का दर्जा देने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए जा रहे हैं और इस संबंध में अंतिम निर्णय कब तक लिया जाएगा।
केशरवानी ने कहा कि सरकार को अलग नगर निगम के गठन की समयसीमा और ठोस कार्ययोजना जनता के सामने रखनी चाहिए। क्षेत्रवासियों को यह जानने का अधिकार है कि उनके बेहतर प्रशासन और विकास के लिए सरकार की योजना क्या है।
उत्सव पर लाखों खर्च, लेकिन सड़क-नाली और पेयजल की समस्याएं बरकरार
केशरवानी ने कहा कि अरपांचल की जनता केवल उत्सव और घोषणाएं नहीं चाहती, बल्कि बेहतर प्रशासन और स्थायी विकास चाहती है। क्षेत्र में सांस्कृतिक आयोजन होते रहने चाहिए, लेकिन सड़क, नाली, जल निकासी, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और स्वच्छता जैसी मूलभूत सुविधाओं पर भी प्राथमिकता से काम होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि करीब 24 लाख रुपए के आयोजन की वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करना नगर निगम की जिम्मेदारी है। सीएसआर राशि का उपयोग जनहित में हो और पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुरूप चले, इसके लिए संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक किए जाने चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब अरपांचल की जनता अलग नगर निगम और बेहतर नागरिक सुविधाओं की मांग कर रही है, तो सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए। आयोजन पर खर्च की जानकारी देना और क्षेत्र की विकास संबंधी मांगों पर निर्णय लेना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
केशरवानी का सवाल- दो रावण दहन का उद्देश्य बताएं, अलग नगर निगम की तारीख भी
विजय केशरवानी ने कहा, “एक ही नगर निगम में दो-दो शासकीय रावण दहन हो रहे हैं। पुलिस ग्राउंड में 60 फीट और साइंस कॉलेज मैदान में 80 फीट का रावण। आखिर यह किस तरह की व्यवस्था है? क्या भाजपा के जनप्रतिनिधियों के बीच शह-मात और श्रेय लेने का खेल चल रहा है? साइंस कॉलेज मैदान में अरपांचल लोक मंच वर्षों से अपने खर्च पर रावण दहन की परंपरा निभाता रहा है। ऐसे में उसी मैदान पर शासकीय आयोजन की आवश्यकता और उसके पीछे का उद्देश्य जनता को बताया जाना चाहिए।”
उन्होंने आगे कहा, “मुझे दशहरा या रावण दहन से कोई विरोध नहीं है, लेकिन जनता के पैसे और आयोजन की प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए। करीब 24 लाख रुपए के आयोजन में सीएसआर राशि के स्रोत, टेंडर और भुगतान प्रक्रिया की जानकारी सार्वजनिक की जाए। साथ ही सरकार अरपांचल के लिए अलग नगर निगम बनाने के अपने वादे पर स्पष्ट समयसीमा और ठोस कार्ययोजना बताए। अरपांचल को केवल आयोजन नहीं, बेहतर प्रशासन और स्थायी विकास चाहिए।”
पारदर्शिता और अलग नगर निगम पर निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन
केशरवानी ने चेतावनी दी कि यदि नगर निगम और राज्य सरकार ने आयोजन की वित्तीय पारदर्शिता तथा अलग नगर निगम की मांग पर जल्द स्पष्ट निर्णय नहीं लिया, तो कांग्रेस कार्यकर्ता और क्षेत्र की जनता लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करेंगे।
वर्जन
नगर निगम शासकीय दशहरा आयोजन से संबंधित राशि के स्रोत, स्वीकृति, टेंडर, कार्यादेश और भुगतान की पूरी जानकारी सार्वजनिक करे। साथ ही राज्य सरकार अरपांचल के लिए अलग नगर निगम बनाने के चुनावी वादे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करे और गठन की समयसीमा तथा कार्ययोजना सामने रखे।
विजय केशरवानी
पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष
पूर्व बेलतरा विधानसभा विधायक प्रत्याशी
बिलासपुर, छत्तीसगढ़

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